Oct 20 2021 / 6:28 PM

किन्नौर-हरिद्वार हाईवे पर चट्टानें गिरने से 10 की मौत, कई अब भी फंसे,रेस्क्यू जारी

शिमला। हिमाचल प्रदेश के रिकांगपिओ से उत्तराखंड के हरिद्वार जा रही एचआरटीसी की बस चट्टानों के गिरने के कारण हादसे का शिकार हो गई है। बताया जा रहा है कि यह हादसा हिमाचल के किन्नौर जिले के पास निगुलसेरी में पहाड़ से मलबा गिरने के कारण हुआ है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 50 से ज्यादा यात्री मलबे में फंस गए हैं। वहीं, अब तक 10 शव भी निकाले गए हैं। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और NDRF की टीमें रेस्क्यू में जुटी हैं। ITBP को भी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बुलाया गया है।

मलबे में फंसी बस हिमाचल रोडवेज की है, जो मूरंग से हरिद्वार जा रही थी। एक बस, एक ट्रक, बोलेरो और 3 टैक्सियों पर चट्टानें गिरी हैं। हिमाचल सरकार ने रेस्क्यू के लिए उत्तराखंड और हरियाणा सरकार से हेलिकॉप्टर मांगे हैं। आर्मी ने भी अपने दो हेलिकॉप्टर भेजे हैं। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी घटनास्थल पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा ले सकते हैं।

बस कंडक्टर महेंद्र पाल ने बताया, ‘बस में करीब 25 यात्री सवार थे। जैसे ही हम निगुलसेरी पहुंचे, तो उसने देखा कि सामने पहाड़ी से चट्टानें गिर रही हैं। हमने बस को 100 मीटर पीछे ही रोक दिया। यहीं पर कार और ट्रक समेत दूसरी गाड़ियां भी रुक गईं। इसके बाद अचानक पहाड़ी चट्टानें सभी गाड़ियों पर गिर गईं।’ बस ड्राइवर और कंडक्टर ने ही अफसरों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद रेस्क्यू शुरू हुआ

किन्नौर हादसे में बचा बस का कंडक्टर मोहेंद्र पाल जिला बिलासपुर का रहने वाला है, जबकि बस ड्राइवर गुलाब सिंह है। दोनों को सुरक्षित बचा लिया गया है। ये दोनों सड़क पर पहले से गिरे पत्थर देखने बस से बाहर निकले थे। इसी दौरान पहाड़ से मलबा गिरा, जिससे बस दब गई। दोनों ने भागकर अपनी जान बचाई। कंडक्टर का कहना है कि बस में 25 सवारियां थीं।

राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई टीम ने 25 लोगों को मौके से अस्पताल पहुंचाया। इनमें से 10 लोगों को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि 15 लोगों का इलाज किया जा रहा है। घायलों की हालत बेहद नाजुक है। चट्टानों के नीचे दबी हुई बस में 25 लोग सवार थे।

एनडीआरएफ, सेना, पुलिस और स्थानीय लोग घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटे हुए हैं।प्रशासन के मुताबिक, कुल 6 वाहन मलबे के नीचे दबे पड़े हैं। इनमें सवार लोगों की संख्या भी ज्यादा हो सकती है। मलबे के नीचे दबे पड़े लोगों को बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव कार्य की टीम रात भर प्रयास करेगी।

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