इंदौर व पीथमपुर से विदेशों में एक्सपोर्ट कर रही कंपनियों के डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग कर 2 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के 6 सदस्य साइबर सेल की गिरफ्त में

इंदौर। इंदौर एवं पीथमपुर से विदेशों में एक्सपोर्ट कर रही कंपनियों के डिजिटल सिग्नेचर का अनाधिकृत उपयोग कर लगभग 2 करोड़ रुपए की ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्ट बेचने वाले गिरोह के 6 सदस्य राज्य साइबर सेल इंदौर की गिरफ्त में आया है।

गिरोह के पकड़े गए सदस्यों के नाम आशुतोष उर्फ आशु श्रीवास्तव पिता सत्यनारायण श्रीवास्तव उम्र 36 साल 77 कासाग्रीन तलावली चांदा मॉगलिया थाना लसुडिया इंदौर .

  1. हिमांशु उर्फ अंशु जैन पिता हिम्मतलाल जैन उम्र 42 साल नि0 59 सी बसंत बिहार कॉलोनी बाम्बे अस्पताल के पीछे थाना लसुडिया इंदौर
  2. अभिषेक ठाकुर पिता राजेन्द्र ठाकुर उम्र 24 साल नि0 स्थाई पता 107 शास्त्री वार्ड नीयर नटराज टॉकिज खुरई थाना खुरई हाल मुकाम 1505 पीटी 1 पिनेकल ड्रिम्स निपानिया रोड इंदौर
  3. राजेश जगताप पिता रामक्रष्ण जगताप उम्र. 52 ए निवासी. प्लाट न 27 सर्वे नम्बर 45/4 B चंदन नगर ए खराडी रास्ता दुकीर लाईन पुणे
  4. हर्षल पिता दिलीप घोडके उम्र. 40 निवासी. श्रीमान सोसायटी प्लाट न 6 विठ्ठल मंदिर रोड कर्वे नगर पुणे
  5. मनोज लुंकड पिता सुरेश कुमार लुंकड उम्र- 45 साल निवासी- गंगाधाम चोक के पास, 402,हाईड पार्क,मार्केट यार्ड , पुणे हैं।
    पुलिस अधीक्षक राज्य सायबर सेल इंदौर जितेन्द्र सिंह ने बताया कि देवेन्द्र थापक की कंपनी Erawat Pharma एवं दिनांक 07/10/2020 को ब्रजेश दुबे के द्वारा राज्य साइबर सेल इंदौर आकर अपनी कंपनी VE COMMERCIAL VEHILES LTD के साथ हुए डिजिटल सिग्नेचर का दुरूपयोग कर अनाधिकृत तरीके से लगभग दो करोड़ रूपए का लाभ कमाने सम्बन्धी शिकायत की गयी थी | विवेचना में अनाधिकृत तरिके से बेचे गए डिजिटल सिग्नेचर की रकम as paisawala market pvt ltd कंपनी एवं KP tech impects pvt. ltd कंपनी के खाते मे ट्रांसफर होना पाया गया । as paisawala market pvt ltd कंपनी के डायरेक्टरों को पुछताछ हेतु सायबर सेल इंदौर बुलाया गया एवं उनसे सख्ती से पुछताछ करने पर कंपनी के डायरेक्टर आशुतोष उर्फ आशु श्रीवास्तव, हिमांशु उर्फ अंशु जैन, अभिषेक ठाकुर द्वारा अपना जुर्म स्वीकार किया एवं लालच में आकर अपने खाते में रकम डलवाना स्वीकार किया गया। इनके द्वारा बताया गया कि वह अपनी कम्पनी में 120 दिन में पैसे 10 प्रतिशत बढ़ाकर वापस देने का काम करते हैं। वर्तमान में कंपनी में लगभग 08 से 10 लाख रुपए का इनवेस्टमेंट होने की बात कही हैं। साथ ही साथ उक्त विवेचना में पुणे / मुम्बई से जुडे तारों को खंगालने के लिए एक टीम को रवाना किया गया जहॉ से एक अन्य आरोपी राजेश जगताप ने बताया कि वह इंम्पोर्ट एक्सपोर्ट कम्पनीयों को Merchandise Export India Scheme (MEIS) सर्टीफिकेट कमीशन पर देने का काम करता हैं। उक्त घटना में इसी के माध्यम से as paisawala market pvt ltd कंपनी एवं मनोज लुंकड की कंपनी KP tech impects pvt. ltd के दलाल हर्षल पिता दिलीप घोडके के माध्यम से खाते में पैसे डलवाए थे जिसके एवज में उसे लाखों रुपए का कमीशन प्राप्त हुआ था। आरोपियों के बताये अनुसार पुणे और मुंबई एक दर्जन से ज्यादा आरोपियों की तलाश है जिसमे साइबर सेल इंदौर द्वारा छापेमार कार्यवाही की जा रही है।
  6. एसपी जितेंद्र सिंह ने बताया कि एक्सपोर्ट प्रमोशन के लिए भारत सरकार Merchandise Export India Scheme (MEIS) चलाती है। इस स्कीम के तहत निर्यातक कंपनी को. 2% से लेकर 5% तक के निर्यात फ्री ऑन बोर्ड (FOB) मूल्य की ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्ट दी जाती है। इस DSC के बदले में कंपनियां कस्टम ड्यूटी इंपोर्ट ड्यूटी एवं नए सामान का आयात कर सकती है।
  7. उक्त स्क्रिप्ट बिना डिजिटल सिग्नेचर के नहीं बेची जा सकती है। कम्पनी अधिकृत डिजिटल सिग्नेचर से उसको ट्रांसफर भी कर सकती है।
    यह स्कीम फॉरेन ट्रेड पॉलिसी (FTP) 2015-2020 के तहद एक्सपोर्ट प्रमोशन के लिए लाई गई थी। इस योजना को DGFT के साथ Ministry of commerce & Industry monitor करती है। Issue करने के 24 माह तक DSC वैलिड रहती है।
    उन्होंने बताया कि इंदौर एवं पीथमपुर से केप्सूल कवर व व्यवसायिक भारी वाहन बनाकर एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियां एरावत फार्मा व वोल्वो आयशर कमर्शियल मोटर्स उक्त अपराध की शिकार हुई।
    पकड़े गए आरोपियों के तार मुंबई पुणे से जुड़े हैं। उक्त स्क्रिप्ट देश की नामी-गिरामी बड़ी-बड़ी कंपनियों को बेची गई।
  8. एरावत कम्पनी को चूना लगाने वाली कंपनी SAM EXIM इंदौर ऑफिस भी बंद करके भाग गई है। गिरफ्तार आरोपियों के खाते में बेचे गई स्क्रिप्ट के एवज में 01 करोड़ 60 लाख रूपए आए हैं।
    अवैध तरीके से कुल 17 स्क्रिप्ट बेची गई है। साइबर सेल ने DGFT एवं E MUDHRA से विवेचना में तकनीकी जानकारी देने हेतु संपर्क किया है।

उक्त प्रकरण के खुलासा करने में निरी0 राशिद अहमद, उप0निरी0 संजय चौधरी, उप0 निरी0 गोपाल अजनार, प्रधान आरक्षक प्रभाकर महाजन, राम प्रकाश बाजपाई, आर0 विवेक मिश्रा, गजेन्द्र सिंह राठौर, विजय बडोदकर, आशीष शुक्ला, राहुल सिंह गौर, रमेश भिड़े की भूमिका रही।

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