इंदौर में गीले कचरे के निपटान हेतु एक और अभिनव पहल, पांच सौ टन प्रतिदिन क्षमता का बायो-मेथेनाईजेशन प्लांट होगा स्थापित, शुक्रवार को भूमिपूजन

इंदौर। देश के स्वच्छतम शहर इन्दौर द्वारा गीले कचरे के निपटान हेतु एक और अभिनव पहल के अंतर्गत डिस्पोजल साईट देवगुराड़िया पर 500 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो-मेथेनाईजेशन प्लांट इनवायरमेंटल इन्फ्रास्ट्रक्चर एण्ड सर्विस लिमिटेड (EESL) के माध्यम से स्थापित कराया जा रहा है। उक्त प्लाट स्थापना का कार्य दो चरणों में पूर्ण किया जाना प्रस्तावित है।

प्रथम चरण में 200 टन क्षमता का प्लांट माह अप्रैल 2021 में सी.एन.जी. गैस का उत्पादन शुरू होगा। द्वितीय चरण में सम्पूर्ण क्षमता के साथ अर्थात 500 टन क्षमता का प्लांट दिसम्बर 2021 तक लगभग 17 हजार 500 किलोग्राम सी.एन.जी. गैस का उत्पादन पूर्ण होगा। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान आज 28 अगस्त को देवगुराड़िया में आयोजित कार्यक्रम में इस प्लांट की स्थापना के लिये भूमिपूजन करेंगे।

इनवायरमेंटल इन्फ्रास्ट्रक्चर एण्ड सर्विस लिमिटेड (EESL), नईदिल्ली के साथ ही ज्वाईंट वेंचर के रूप में विदेशी कंपनी प्रोविप्स एनवायरोटेक जीएमबीएच, जर्मनी इस प्लांट की स्थापना में अपना योगदान देंगे। प्लांट का कार्य पूर्ण होने पर इंदौर शहर के अंदर पैदा होने वाले 500 टन गीले कचरे का पर्यावरण हितैषी निपटान होने के साथ ही नगर निगम इन्दौर को आय का स्त्रोत भी होगा। कंपनी द्वारा इस प्लांट स्थापना पर लगभग 150 करोड़ रुपये व्यय किए जायेंगे।

इस प्लांट स्थापना पर नगर निगम इन्दौर को कोई वित्तीय भार वहन नहीं करना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अवधारित किया गया है कि, हमें “Waste to Wealth” आधारित कचरा निपटान पद्धति पर कार्य करना है। इस अवधारणा को दृष्टिगत रखते हुए इस बायो-मेथेनाईजेशन प्लांट का कार्य नगर निगम इंदौर द्वारा हाथ में लिया गया है। इस प्लांट स्थापना पर जहाँ एक ओर नगर निगम को काई वित्तीय भार वहन नहीं करना है, वहीं दूसरी ओर इस प्लांट को स्थापित करने वाली कंपनी द्वारा नगर निगम इंदौर को 2 करोड़ 52 लाख 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष प्रीमियम के रूप में 20 वर्षों तक अदा किया जायेगा।

इसके साथ ही प्लांट में पैदा होने वाली 17 हजार 500 किलोग्राम सी.एन.जी. गैस में से 50 प्रतिशत गैस अर्थात् 8 हजार 750 किलोग्राम सी.एन.जी. गैस मार्केट रेट से 5 रूपये प्रति किलोग्राम कम दर पर नगर निगम इंदौर को उपलब्ध कराई जायेगी। प्रतिदिन 8 हजार 750 किलोग्राम सी.एन.जी. गैस प्राप्त होने पर एआईसीटीएसएल के माध्यम से संचालित परिवहन सेवा को सुगमता से संचालित किया जा सकेगा।

उक्त प्लांट की स्थापना से नगर निगम इन्दौर को आय के साथ ही नगरीय परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। बायो-मेथेनाईजेशन प्लांट से 500 टन गीले कचरे का प्रतिदिन निपटान तो होगा ही इसके साथ ही वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

बायो-मेथेनाईजेशन प्लांट आत्मनिर्भर भारत की कड़ी में एक अहम पहल होने के साथ ही पन्द्रहवे वित्त आयोग द्वारा प्राथमिक एवं निर्दिष्ट अनुदान प्राप्त करने में भी सहायक होगा।

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