कुत्तों पे करम…गायों पर सितम …ऐसा क्यों

शहर में तेजी से बढ़ रहे आवारा कुत्ते, बढ़ रही काटने की घटनाएं

इंदौर। देश-प्रदेश में हिंदूवादी सरकार के राज में इंदौर नगर निगम द्वारा गो-माता के नाम से पुकारी जाने वाली गायों को तो इंदौर शहर से बाहर कर दिया गया है लेकिन आवारा कुत्तों को लेकर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

इस कारण इन कुत्तो की बढ़ती संख्या के साथ साथ ही राह चलते लोगों को इनके द्वारा काटे जाने की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो रहा है।
स्मार्ट हो रहे शहर से गायों को नगर निगम द्वारा इसलिए बाहर किया गया क्योंकि गो पालक इन्हें दूध निकालने के बाद चरने के लिए सड़को पर छोड़ देते थे

जिसके कारण ये मुख्य मार्गों पर विचरण करती थी और ट्रेफिक बाधित होता था। इस हेतु कई दिनों तक निगम ने अभियान चलाया और करीब 13 हजार गायों को शहर से बाहर कर दिया।

इस अभियान के दौरान एक निगम कर्मी को भी जान से हाथ भी धोना पड़ा। इस अभियान के चलते गाये तो शहर से पूरी बाहर हो गई लेकिन कुत्तों ने पूरे शहर पर कब्जा जमा लिया है।

इन दिनों मुख्य सड़को से लेकर गलियो तक में आवारा कुत्तों का राज है। इनकी संख्या इतनी अधिक बढ़ गई है कि एक एक मोहल्ले अथवा कालोनी में 15 से 20 कुत्ते हो गए है।

ये न केवल वहां से गुजरने वाले वाहन चालको के पीछे भोंकते हुए दौड़़ते है जिसके कारण हड़बड़ाहट में वे दुर्घटना का शिकार हो रहे है बल्कि राह चलते लोगों को इनके द्वारा काट लेने की घटनाएं भी तेजी से बढ़ गई है।

कोर्ट में याचिका भी विचाराधीन

इस मामले में हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी विचाराधीन है। अधिवक्ता अमिताभ उपाध्याय के माध्यम से दायर इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने इनके नियंत्रण के संबंध में एक कमेटी भी बनाई थी।

नगर निगम ने कोर्ट को आश्वस्तकिया था कि वह इन कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण हेतु इनकी नसबंदी का अभियान चलाएगा लेकिन वह भी बंद पड़ा है। इन्हें पकड़कर शहर से बाहर छोड़े जाने की मुहीम तो लगभग ठप्प ही हो गई है।

महापौर हेल्प लाइन, क्षेत्रीय पार्षद से लेकर निगम अफसरों को शिकायत करने पर भी सुनवाई नहीं हो रही है। इसके कारण रहवासी बेहद परेशान हो रहे है।

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इंदौर