इदौर के युवा इंजीनियर को केन्द्र सरकार की नौकरी लगाने के नाम पर 17 लाख ठगने वाले हाइटेक दंपत्ति सायबर सेल की गिरफ्त में

इंदौर। इदौर के युवा इंजीनियर को केन्द्र सरकार की नौकरी लगाने के नाम पर 17 लाख ठगने वाले हाइटेक दंपत्ति सायबर सेल की गिरफ्त में लिया गया है।


इनमे आरोपी सोहेल अहमद- एडीशनल डायरेक्टर रणविजय सिंह बनकर व उसकी पत्नि जाहिरा अहमद- प्रोग्राम डायरेक्टर कीर्ति तिवारी बनकर पीड़ित हर्षवर्धन से बात करती थी। आरोपी इंदौर शहर के बेलमोंट पार्क व ओशियन पार्क में 2 – 3 माह किराये से भी रहा है।

एसपी सायबर सेल जितेंद्र सिंह ने बताया कि गत जनवरी में राष्ट्रीय दैनिक अंग्रेजी समाचार पत्र में एक विज्ञापन छपा था। उड़ीसा (भुवनेश्वर) की एडवरटाइजिंग एजेंसी के माध्यम से मिनिस्ट्री ऑफ HRD के सेंटर फार डेवलपमेंट स्टडीज के असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर नियुक्ति का विज्ञापन दिया गया था। विज्ञापन मे जारीकर्ता की जगह तथाकथित आइएएस अधिकारी का नाम व पदनाम डला था।


इस बारे में युवा इंजीनियर हर्षित भारद्वाज पिता आनंद भारद्वाज निवासी 51, द्वारकापुरी फूटी कोठी इंदौर ने उनके साथ नौकरी के नाम पर 17,11,220 रूपयें की ठगी की शिकायत की थी।

आरोपी सोहेल अहमद पिता स्व. अफज़ल अहमद निवासी- लखनऊ हाल मुकाम- मुम्बई तथा जाहिरा रफीक पति सोहेल अहमद निवासी- निवासी- लखनऊ हाल मुकाम- मुम्बई जो केन्द्रीय जेल भोपाल में निरूध्द थे, इन्हें न्यायालय इन्दौर द्वारा जारी प्रोड्क्शन वारण्ट पर राज्य सायबर सेल, इन्दौर लाकर पूछताछ की गई।

आरोपी सोहेल के द्वारा बताया गया कि मानव संसाधन विकास मत्रालय शास्त्री भवन नई दिल्ली को 9वी एवं 10वी राउण्ड CMECSS प्रोजेक्ट प्राप्त करने का आवेदन म0प्र0, छत्तीसगढ, राजस्थान एवं उडीसा राज्यों के लिये मंत्रालय को प्रस्तुत किया, जो कि विश्व बैंक द्वारा वित पोषित किया जाना था। इस प्रोजेक्ट के अन्तर्गत सर्व शिक्षा अभियान, स्कीम इंडिया, डिजिटल इंडिया IGMSSY, RGGVY एवं अन्य परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जाना था।

इसी प्रोजेक्ट के साथ आरोपी सोहेल ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय में एक अन्य प्रोजेक्ट ILC (इंडिया लिट्रेसी मिशन) का भी आवेदन किया था। प्रशासनिक कारणों से विश्व बैंक द्वारा CMECSS परियोजना अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई एवं प्रोजेक्ट का आवंटन नही हो पाया।

जिस कारण से आरोपी सोहेल अहमद को बहुत घाटा हुआ, एवं इन्ही प्रोजेक्ट्स में नौकरी लगाने के नाम पर आरोपी अपनी पतनियो के साथ मिलकर लोगों को नौकरी देने के नाम पर झांसा देकर ठगी करने लगा।

आरोपी द्वारा धोखाधडी करने के लिये उपरोक्त प्रोजेक्ट का हवाला देते हुए राष्ट्रीय दैनिक अग्रेजी सामाचार पत्रों में विज्ञापन छपवाया। जिसके परिणम स्वरूप अलग-अलग राज्यों से बहुत से लोगों ने विज्ञापन में दिये गये मेल एड्रेस पर आरोपी से सम्पर्क किया।

तब आरोपी व उसकी पत्नियों द्वारा आवेदक से फर्जी नामों से बात कर इन्दौर के आवेदक हर्षित भारद्ववाज से असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर के फर्जी पद पर नियुक्ति देने के लिये हर्षित भारद्ववाज से विभिन्न मदों जिनमें ट्रेनिंग फीस, सेन्ट्रल गर्वमेंट हेल्थ स्कीम का हेल्थ कार्ड, एलआइसी, बैंक आफ बडौदा का खाता खोलने के लिये, किसान विकास पत्र, पीपीएफ अकाउण्ट, हाउस अलाटमेट]

सरचार्ज व सेस, स्टाप वेलफेयर फण्ड, पोस्टल लाइफ स्कीम, हाउसिंग एण्ड स्टाफ वेलफेयर फण्ड, यूलीप चार्ज, आइटीएफ चाज, सीयूएफ चार्ज, यूआरएलएफ चार्ज, एवीआरडब्ल्युएफ चार्ज, पीएफएमएस चार्ज, बैंक चार्जेस और ऐसे कई चार्जेस के नाम पर तीन बैंक खातो मे धोखाधडी करके 17,11,220/- रूपये डलवाये गये थे।

आरोपी द्वारा दिये गये विज्ञापन में प्रोजेक्ट मैनेजर, असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर, प्रोजेक्ट सुपर वाइजर (डिस्ट्रीक वाइस), असिस्टेंट प्रोजेक्ट सुपर वाइजर (डिस्ट्रीक वाइस), एक्सटेंशन आफिसर, डाटा इन्ट्री आफिसर, डाटा इन्ट्री आपरेटर, फिल्ड आफिसर (डिस्ट्रीक वाइस), फिल्ड इंवेस्टीगेटर्स। इस तरह कुल नौ पदो के लिये कुल 537 रिक्तियों के लिये विज्ञापन दिया गया था।

आरोपी द्वारा युनिवर्सिटी आफ रियु क्यु ओकिनावा जापान से एग्रीकल्चर इकोनामिक्स से किया है, एवं आरोपी की पत्नि साइंस से ग्रेजुएट एवं कामर्स से ग्रेजुएट है।

पुलिस अधीक्षक सायबर इंदौर जितेन्द्र सिंह के नेतृत्व निरीक्षक अंबरीश मिश्रा, रामप्रकाश बाजपेई, रमेश भिड़े, विनिता त्रिपाठी, दीपिका व्यास और आशीष शुक्ला, विशाल महाजन, दिनेश कुमार, गजेन्द्रसिंह विक्रांत तिवारी की भूमिक रही है

सायबर एडवाइजरी

  1. ऑनलाइन जॉब सर्च करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि संबंधित वेबसाइट कही फर्जी तो नहीं ।
  2. किसी भी सरकारी विभाग द्वारा सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर रूपयें नही लिए जाते ।
  3. सरकारी नौकरी हेतु संबंधित विभाग के शासकीय पोर्टल/ वेबसाइट अथवा समाचार पत्रों मे नौकरी हेतु विज्ञप्ति दी जाती है ।
  4. किसी भी शासकीय विभाग द्वारा शासकीय नौकरी हेतु लुभावने प्रलोभन नहीं दिए जाते है ।
  5. प्राइवेट एजेंसियों में ऑनलाइन नौकरी सर्च करते समय संबंधित एजेंसी की वेब साइट के पोर्टल से ही ऑफिशियली फोन नंबर/ मोबाइल नंबर लेकर बात करना चाहिए ।
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