हाई कोर्ट के लंबित प्रकरणों में सभी प्रभारी अधिकारी प्रकरण की संक्षेपिका और अभिलेख आवश्यक रूप से प्रस्तुत करें, बैठक में AAG के निर्देश

इंदौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के प्रकरणों में जवाब प्रस्तुत करने और विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई के लिये अधिकारियों हेतु मार्गदर्शी निर्देश जारी हुये है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे इनका पालन करें। यह मार्गदर्शी निर्देश कल मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ इंदौर में प्रस्तुत प्रकरणों के संबंध में आयोजित बैठक में तय किये गये। बैठक में अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वय पुष्यमित्र भार्गव एवं विवेक दलाल सहित संबंधित विभागों के नोडल अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में अतिरिक्त महाधिवक्तागणों ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि वे प्रकरणों में नियमानुसार संक्षेपिका और आवश्यक अभिलेख अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि सभी प्रभारी अधिकारी प्रकरण की संक्षेपिका और अभिलेख आवश्यक आवश्यक रूप से प्रकरण में प्रस्तुत करें। प्रकरण में प्रस्तुत याचिका और उसके अनुरूप अभिलेख के अनुसार संक्षेपिका तैयार होना चाहिये। पिटीशन में अपेक्षित याचना के सबंध में विभाग का अभिमत्त स्पष्ट होना चाहिये। जवाब तैयार करवाने के लिए इन अनिवार्यताओं पूर्णता होना प्रभारी अधिकारी के लिए आवश्यक होगा ।

कोविड-19 की स्थितियों में अधिकारियों की व्यस्तता को दृष्टिगत रखते हुए प्रकरणों में जवाब तैयार करने हेतु शासकीय अधिवक्त्ता का नाम मार्किंग करने के लिए प्रभारी अधिकारी के प्रतिनिधि की उपस्थिति को भी मान्य किया जा रहा था । अब न्यायालय नियमित रूप से प्रारम्भ हो चुका है, इसलिए प्रकरणों में त्वरित कार्यवाही हेतु प्रभारी अधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य होगी । प्रभारी अधिकारी की ओर से अन्य अधीनस्थ अधिकारी या प्रतिनिधि के उपस्थित होने पर प्रकरण में मार्किंग नहीं की जाएगी । प्रभारी अधिकारी जिस तारीख को शासकीय अधिवक्ता से सम्पर्क करने एवं चर्चा करने के उपरान्त कार्यवाही की प्रगति रिपोर्ट फाईल पर अंकित करें और नाम, हस्ताक्षर और मोबाईल नम्बर अवश्य डालें।

प्रकरण में जिस दिन जवाब प्रस्तुत किया जाए उसी दिन जवाब प्रस्तुत करने का संक्षिप्त एसएमएस/व्हाट्सएप मेसेज अतिरिक्त महाधिवक्ता, उपमहाधिवक्ता एवं संबंधित शासकीय अधिवक्ता को अनिवार्यतः दिया जाये। वर्ष 2017 से 2020 तक के ऐसे प्रकरण जिनमें जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। समय-सीमा के आधार पर या कार्यालयीन कार्यवाही पूर्ण होने के कारण व्यर्थ हो चुके है ऐसे प्रकरणों की सूची संयुक्त आयुक्त लिटिगेशन एवं समन्वय इन्दौर को एक सप्ताह में प्रस्तुत करे । मध्यप्रदेश मुकदमा प्रबंधन नीति, 2018 की कण्डिका 20 के अनुसार सभी विभागों आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली प्रारम्भ की जाये।

इसका पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जाए । यदि कोई कर्मचारी इस समिति के समक्ष अभ्यावदेन प्रस्तुत किये बिना और निराकरण कराये बिना उच्च न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत करता है, तो विभाग की ओर से जवाब में इस आशय की आपत्ति प्रस्तुत की जाये, कि पिटीशनर को विभागीय स्तर पर उसके मामले के निराकरण के लिए आंतरिक शिकायत निवारण समिति के रूप में एक फोरम और अवसर उपलब्ध था, जिसका पिटीशनर ने उपेक्षा की है, इसलिए प्रकरण प्रचलन योग्य नहीं है। बैठक में अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव ने सभी विभागों द्वारा बेहतर समन्वय और सहयोग प्रदान करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।

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