इंदौर कोर्ट द्वारा सहायक राजस्व निरीक्षक की 37 लाख की संपत्ति राजसात करने का आदेश

इंदौर। इंदौर कोर्ट द्वारा एक सहायक राजस्व निरीक्षक की 36 लाख 92 हजार की अनुपातहीन संपत्ति राजसात करने का आदेश दिए गए हैं। विशेष जज प्रकाश चन्द्र आर्य की कोर्ट ने आरोपी कैलाश सांगते पिता मथुरालाल सांगते उम्र 69 साल तत्कालीन सहायक राजस्व निरीक्षक नगर पालिका निगम उज्जैन की उक्त सम्पत्ति राजसात के आदेश दिए।

जिला अभियोजन अधिकारी मो . अकरम शेख द्वारा बताया गया कि आरोपी मूल रूप से भवन क्र 2114 गली नं 6 कोटमोहल्ला, भीष्मनगर उज्जैन निवासी का है। उसके पिता नगर निगम उज्जैन में कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। उसके पिता 10 मार्च 1987 को सेवानिवृत्त हुये एवं दिनांक 28 जुलाई 1987 को इनकी मृत्यु हुई।

इसके बाद कैलाश सांगते ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के रूप में मई 1987 अनुकंपा नियुक्ति पर सेवा प्रारंभ की और छापा दिनांक तक नगर पालिका निगम उज्जैन में पदस्थ रहा। कैलाश सांगते का विवाह रामनाथ डागर की पुत्री ललीता से हुआ। इनका ससुराल भवानी मण्डी में है। उसके तीन पुत्र योगेश सांगते देवेन्द्र सांगते और देवगत सांगते है।


कैलाश सांगते का प्रमोशन वसूली कलेक्टर के पद पर वर्ष 1999 में हुआ था, छापा दिनांक को सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर नगर पालिका निगम में कार्यरत था। कैलाश सांगते के विरुद्ध सूचना प्राप्त हुई थी कि इनके द्वारा भ्रष्टाचार के जरिये अवैधानिक रूप से धन अर्जित किया गया है।

उक्त सूचना पर से 12 जनवरी 2012 को कैलाश सांगते के निवास 21 / 4 भीष्म नगर उज्जैन एवं दुकान क्रमांक 61 महाकाल सिंधी कॉलोनी उज्जैन पर छापा डाला गया। उसके यहाँ भूखण्ड , मकान , टाटा सफारी, स्कॉर्पियो , सोना चाँदी के आभूषण , नगदी , बीमा पॉलिसीयों आदि चल-अचल संपत्तियां मिली।

28 जून 2016 को विशेष न्यायालय अधिनियम 2011 के तहत विशेष न्यायालय इंदौर में संपत्ति राजसात का आवेदन प्रस्तुत कर उसकी 50 लाख 23 हजार 668 रुपये की चल-अचल अनुपातहीन संपत्ति को अधिहरण करने और कलेक्टर और जिला दण्डाधिकारी उज्जैन की सुपुर्दगी में जनहित में उपयोग करने हेतु आदेश पारित करने हेतु अनुरोध किया गया था।

आज विशेष जज प्रकाशचन्द्र आर्य की कोर्ट ने कैलाश सांगते ( लोकसेवक ) , योगेश सांगते ( पुत्र ), ललीता सांगते ( पत्नी ) तथा सुंदर बाई ( माँ ) के विरुध्द आदेश पारित करते हुए कुल संपत्ति 36 लाख 92 हजार 824 रूपये की संपत्ति राजसात करने का आदेश पारित किया।

उक्त प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक महेन्द्र कुमार चतुर्वेदी द्वारा की गई। वे पूर्व में भी 8 प्रकरणों में अभियोजन का पक्ष रखकर संपत्ति राजसात कराने में सफलता प्राप्त कर चुके है ।

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