इंदौर एसटीएफ ने 9 वर्ष पूर्व क्लिनिक से नवजात बच्चो को अपहरण करने वाले 7 आरोपियों को किया गिरफ्तार, 2 अपह्रत बच्चे बरामद


इंदौर। इंदौर एसटीएफ ने लगभग 9 वर्ष पूर्व क्लिनिक से नवजात बच्चो को अपहरण करने वाले 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 2 अपह्रत बच्चे बरामद किए गए।
एसटीएफ द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी-

  1. लीलाबाई निवासी इदौर
  2. पुष्पा निवासी देवास
  3. प्रभूदयाल निवासी देवास
    4.शिरीष देवास (बालक को अधिपत्य में रखने वाले )
  4. सुधा देवास (बालक को अधिपत्य में रखने वाले )
    6.अजय कुमार रतलाम (बालक को अधिपत्य में रखने वाले ) और
  5. स्वर्णलता रतलाम (बालक को अधिपत्य में रखने वाले ) अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एस.टी.एफ. विपिन माहेश्वरी के निर्देशन में पुलिस अधीक्षक एस टी एफ इंदौर मनीष खत्री व टीम ने इन्हें पकड़ा। एसपी खत्री ने बताया की एसटीएफ इकाई इंदौर को नवजात बच्चो को जन्म के पश्चात अस्पताल से उसकी माँ से अलग कर अस्पताल स्टाफ द्वारा अन्य निः संतान दम्पत्तियो को देने के सम्बन्ध में चाइल्ड लाइन द्वारा सुचना प्राप्त हुई थी जिस पर कार्यवाही हेतु 2 टीमें बनाई गई । चाइल्ड लाइन की काउन्सलर श्रीमती मंजू चौहान , राहुल गोठाने, आदित्य को मदद हेतु लिया गया । जाँच एवं सुचना को विकसित करने के बाद लीलाबाई जिला इदौर को ट्रेस किया जाकर पूछताछ की गई जो पहले यश मेटरनिटी क्लीनिक स्कीम नंबर 51 इंदौर में काम करती थी। लीला बाई नें यह जानकारी दी कि उसनें दिनांक 30/10/2011 उसकी बहन पुष्पा श्रीवास व पुष्पा के पति प्रभुदयाल श्रीवास के माध्यम से यश क्लीनिक से एक दिन का नवजात शिशु देवास निवासी शिरीष व उनकी पत्नी सुधा को दिया था तथा वह बालक अब लगभग 09 वर्ष 03 माह का हो गया होगा। उसके गोद लेने का कोई कागजात तैयार नहीं किए गए थे।
    टीम ने देवास में जाँच की तो शिरीष एवं सुधा के पास पुष्टि करने पर एक बालक आयु लगभग 9 वर्ष 3 माह का होना पाया एवं पूछताछ करने पर शिरीष व सुधा ने उसे यश क्लिनिक से गोद लेना बताया परन्तु उनके पास गोद लिए जाने सम्बन्धी कोई भी अनुमति वा दस्तावेज होना नहीं पाया। नोटिस दिए जाने पर शिरीष द्वारा बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जिसमे जन्म स्थान देवास बताया जाकर अपने आपको माता पिता बताया था । पुष्टि वा जाँच उपरांत यह पाया कि लीलाबाई, शिरीष इंदुल्कर, सुधा इंदुल्कर , पुष्पा श्रीवास एवं प्रभूदयाल श्रीवास एवं अन्य द्वारा नवजात शिशु को यश क्लीनिक से उसकी माँ के विधिक संरक्षरण से अपहरण किया गया, उसका जन्म शिरीष के निवास देवास में होना बताकर इस संबंध में नगर निगम देवास में जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर अवैध लाभ अर्जित करने व नवजात बालक का अपहरण करने का योजना बनाकर षडयंत्र करने का कृत्य किया गया जो धारा 363, 420,120 बी भादवि तथा 80,84 किशोर न्याय अधिनियम 2015 का पाया जाने से बालक का बरामदगी पंचनामा बनाया जाकर बालक को काउंसलर मंजू चौधरी की अस्थाई अभिरक्षा में दिया गया तथा एसटीएफ इकाई इंदौर में अपराध पंजीबद्ध कर उपरोक्त पांचो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
    आरोपी लीला बाई से पूछताछ में उसके द्वारा एक अन्य बच्चे को यश क्लिनिक से ही रतलाम निवासी उसकी समधन वा समधी को देना बताया जिसपर से टीम ने चाइल्डलाइन स्टाफ के साथ रतलाम जाकर बालक आयु 13 वर्ष को अजय कुमार एवं स्वर्णलता के पास होना पाया ।
    पूछताछ करने पर अजय कुमार एवं स्वर्णलता ने उसे यश क्लिनिक से गोद लेना बताया परन्तु उनके पास गोद लिए जाने सम्बन्धी कोई भी अनुमति वा दस्तावेज होना नहीं पाया नोटिस दिए जाने पर शिरीष द्वारा बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जिसमे जन्म स्थान यश क्लिनिक इंदौर बताया जाकर अपने आपको माता पिता बताया था । पुष्टि वा जाँच उपरांत यह पाया की लीलाबाई, अजय कुमार एवं स्वर्णलता द्वारा नवजात शिशु को यश क्लीनिक से उसकी माँ के विधिक संरक्षरण से अपहरण किया गया, उसका जन्म यश क्लिनिक इंदौर में होना बताकर इस संबंध में नगर निगम इंदौर में कूटरचित जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर अवैध लाभ अर्जित करने व नवजात बालक का अपहरण करने का योजना बनाकर षडयंत्र करने का कृत्य किया गया जो धारा 363, 420, 468, 120 बी भादवि तथा 80,84 किशोर न्याय अधिनियम 2015 का पाया जाने से बालक को बरामद किया गया एवं चाइल्ड लाइन इंदौर की अस्थाई अभिरक्षा में दिया गया तथा एसटीएफ इकाई इंदौर में अपराध पंजीबध किया गया। प्रकरण में लीलाबाई, अजय कुमार एवं स्वर्णलता को गिरफ्तार किया गया।
    एसपी खत्री ने बताया कि प्रकरण में बरामद बच्चो को जन्म देने वाली माँ के सम्बन्ध में तलाश व विवेचना की जा रही है। किसी भी दंपत्ति का नवजात बच्चा यदि यश क्लिनिक स्कीम नंबर 51 इंदौर से 30-10-2011 एवं 11-05-2008 या इसके आसपास जन्म होने के बाद गायब हुआ हो या अस्पताल स्टाफ द्वारा उन्हें मृत बच्चा बताया जाकर गुमराह किया गया हो तो वे इस सम्बन्ध में कथन वा प्रमाण एसटीएफ इकाई इंदौर में आकर प्रस्तुत कर सकते है, उनकी यथासंभव मदद की जाकर बालको की अभिरक्षा उन्हें दिलाये जाने की कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी।

भंडाफोड़ करने वाली एस.टी.एफ. टीम
उपपुलिस अधीक्षक सोनू कुर्मी, निरीक्षक एम.ए. सैयद, निरीक्षक ममता कामले, निरीक्षक श्रीकांत जोशी, प्रधान आरक्षक श्रीकृष्ण बोर्डे, आरक्षक सतीश चौहान, राहुल जाट, शुभम कटारे, विकास, प्रशांत परिहार, रविन्द्र कुंतल, आरक्षक चालक देवेन्द्र सिंह।

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