पत्रकार स्व. महेंद्र बापना की स्मृति इंदौर प्रेस क्लब प्रतिवर्ष देगा पत्रकारिता पुरस्कार

पहली पुण्यतिथि पर आयोजित स्मरण प्रसंग ‘हम तुम्हें भुला न पाएंगे’ कार्यक्रम में स्नेहीजनों ने दी बापू को श्रद्धांजलि

इंदौर। पत्रकारिता करना तलवार की धार पर चलने के समान है, बावजूद इसके यह भी सच है कि यह थैंक्सलेस जॉब है। यह बात राष्ट्रीय कवि सत्यनारायण सत्तन ने कही।

वे इंदौर प्रेस क्लब द्वारा मंगलवार को आयोजित महेन्द्र बापना स्मरण प्रसंग ‘हम तुम्हें भुला न पाएंगे’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उपस्थित बड़ी संख्या में स्नेहीजनों ने स्व. बापना को मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। कवि सत्तन ने कहा कि बापना जी अथक परिश्रमी थे, यही उनकी पहचान थी।

उन्होंने कहा कि कोरे कागज पर सत्य लिखने का साहस रखने वाला ही सच्चा पत्रकार होता है। आना-जाना संसार का धर्म है और महेन्द्र ने अपने धर्म का सत्य, साहस और ईमानदारी का हमेशा पालन किया।

उन्होंने अपनी पत्रकारिता एक योद्धा की तरह की और एक योद्धा कभी मौत से नहीं डरता। बापना जी की यही खूबी आज उन्हें शहर के लोगों के बीच में पहचान दिला गई।


महामंडलेश्वर दादू महाराज ने कहा कि बापू एक छोटा सा नाम था, एक बहुत बड़े व्यक्ति का, लेकिन मेरे लिए तो वह बापना जी ही थे। बापनाजी जिससे भी मिलते थे उन्हें लगता था कि मेरे हैं। मेरा उनसे उनसे आत्मीय संबंध थे। शहर हो या प्रदेश या देश के चुनाव हों, उनके नतीजों को लेकर उनका विश्लेषण सटीक बैठता था। शहर में कुछ भी घटना हो उनके होती तो सबसे पहले उनके इसकी सूचना पहुंच जाती थी।

इसका मुख्य कारण यह था कि उनका पूरे शहर में अपना एक बड़ा नेटवर्क था और यह नेटवर्क उनके अच्छे संबंधों के कारण ही स्थापित हो सका था। यही बापू की खासियत थी।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अपने उद्बोधन में कहा कि बापना जी को हमारे बीच से गए हुए एक साल हो गया यह समय पता ही नहीं चला कि कितने जल्दी बीत गया। बापना जी अपने मिजाज के मस्ताने व्यक्ति थे। देर रात को भी उनसे शहर की खबरों के बारे में बात होती रहती थी, उनका शहर में गजब का नेटवर्क।

बापू से मेरा जुड़ाव बहुत ही अलग तरह का था। मेरा उनसे आत्मीय जुड़ाव था, वे मेरे लिए एक छोटे भाई की तरह थे।
अग्निबाण के प्रबंध संपादक राजेश चेलावत ने महेन्द्र बापना जी को याद करते हुए कहा कि 1983 में मैंने अखबार की कमान संभाली और उसके एक साल बाद एक युवक मेरे संपर्क में आया और उसके बाद फिर वह कहीं नहीं गया। वह महेन्द्र बापना था, जिसने लगातार 35 साल अग्निबाण को दिए। यह समय कम नहीं होता, एक जुनून, जोश और काम के प्रति प्रतिबद्धता उनकी खूबी थी। और इसी खूबी ने उन्हें एक अलग मुकाम पर खड़ा कर दिया। लोगों के सुख में ही नहीं, दुख की घड़़ी में भी दरवाजे तक पहुंचना महेन्द्र की खूबी थी।

सही शब्दों में कहें तो वे पत्रकारिता के फिजीशियन थे। उन्होंने बीट से हटकर हर क्षेत्र में रिपोर्टिंग की, उनकी हर क्षेत्र में पकड़ थी। यही कारण है आज पत्रकारिता क्षेत्र के ही नहीं पूरे शहर के लोग उन्हें याद करते हैं। 25 साल तक उन्होंने रक भी छुट्टी नही ली।


समाजवादी चिंतक सुभाष खंडेलवाल ने कहा कि बापना जी किसी के भी सुख में और दुख में उनके हमेशा उनके साथ रहते थे। वे मेरे लिए सदैव महेन्द्र थे, फिर बापना जी हो गए और फिर कब बापू बन गए पता ही नहीं चला। उनकी यादें हमेशा बनी रहेंगी।


कला समीक्षक संजय पटेल ने बापू को याद करते हुए कहा कि व्यक्ति के रहते हम उन बातों को नजरअंदाज कर देते हैं जो उनके नहीं रहने पर याद आती हैं। महेंद्र बापना जी में खबरों को लेकर जो बेचैनी होती थी, वह उन्हें अन्य लोगों से अलग बनाती थी। यही कारण है कि आज हम लोग बापना जी को याद करने के लिए यहां उपस्थित हुए हैं।


कार्यक्रम में शहर के ख्यात गायक राजू शर्मा ने रहे न रहे हम, बन के वफा… गीत गाकर श्री बापना जी को स्वरांजलि अर्पित की। उनके गाए इस गाने से पूरे सभागार का माहौल गमगीन हो गया। इसी प्रकार भजन गायक कमल आहूजा ने सपनों में आने वाले, सामने तो आ जा… की कुछ पंक्तियों के जरिए बापना जी को याद किया।


इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि बापना जी हम तुम्हें भुला न पाएंगे, कभी भी भुला न पाएंगे, भले ही आप दैहिक स्वरूप में हमारे साथ न हों, लेकिन, आप हमेशा हमारे बीच ही रहेंगे। यह प्रेस क्लब आपका दूसरा परिवार है और अपने परिवार से कभी किसी का बिछोह नहीं होता।


तिवारी ने कहा कि बापू के प्रति सम्मान व्यक्त करने एवं उनसी जुड़ी यादों को अक्षुण्ण रखने के लिए इंदौर प्रेस क्लब हर साल उनके जन्मदिन के मौके पर किसी एक सिटी रिपोर्टर को महेंद्र बापना स्मृति सम्मान से अलंकृत करेगा। उक्त सम्मान में एक सम्मान पट्टिका के साथ 21 हजार रुपए नकद दिए जाएंगे। टीम इंदौर प्रेस क्लब का बापना जी का पत्रकारिता में जो योगदान रहा, इस शहर के प्रति जो योगदान रहा उसको अक्षुण्ण रखने के लिए हमने यह छोटा सा प्रयास किया है।


कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने स्व. बापना के चित्र पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप जोशी ने किया।

कार्यक्रम में प्रेस क्लब महासचिव नवनीत शुक्ला, उपाध्यक्ष संजय जोशी, सचिव हेमन्त शर्मा, कोषाध्यक्ष दीपक कर्दम, कार्यकारिणी सदस्य सूरज उपाध्याय, संजय त्रिपाठी, विजय गुंजाल, वरिष्ठ पत्रकार राजेश ज्वेल, तेजकुमार सेन, मेघश्याम अगाशे, अंकुर जायसवाल, अन्ना दुराई, रघुनाथसिंह पंवार, कीर्ति राणा, रोहित तिवारी, महेन्द्रसिंह सोनगिरा, मुकेश तिवारी, जितेन्द्र जाखेटिया, प्रदीप मिश्रा, संजीव मालवीय, राकेश शर्मा, सुनील नावरे, राजेश मिश्रा, मीना खान, ओम व्यास, लोकेन्द्र थनवार, धर्मेन्द्र शुक्ला, सुधाकर सिंह, लक्ष्मीकांत पंडित, महेश मिश्रा, नीतेश पाल, राजेश राठौर, विपिन नीमा, राजेन्द्र कोपरगांवकर, नरेन्द्र भाले, वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेश चौकसे, गिरधर नागर, भाजपा नेता उमेश शर्मा, अशोक चौहान चांदू, किशोर चौधरी, नीलेश नीमा, वरिष्ठ अधिवक्ता के.पी. माहेश्वरी, समाजसेवी नासिर खान आदि मौजूद थे। कार्यक्रम में बापना परिवार के सदस्य भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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