कविता रैना हत्याकांड- हाई कोर्ट का CBi जांच से इनकार, DGP दोषी पुलिस अफसरों पर कार्रवाई करे

इंदौर। शहर के चर्चित कविता रैना हत्याकांड की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराए जाने से हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है लेकिन मप्र पुलिस के DGP से अपेक्षा की है कि वे इस सम्बंध में निचली कोर्ट द्वारा अपने फैसले में दिए गए निर्देश के अनुसार इस केस की विवेचना में लापरवाही व गलती करने वाले पुलिस अफसरों पर कारवाई करे।

जस्टिस पीके जायसवाल और जस्टिस विरेंदर सिंह की डिवीजन बेंच ने जस्टिस फ़ॉर लायर्स संस्था सचिव अजय लोणकर की तरफ से सीनियर एडवोकेट चंपालाल यादव, ओपी सोलंकी द्वारा लगाई गई जनहित याचिका निराकृत करते हुए उक्त बात कही। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान ये बात सामने आई कि याचिकाकर्ता ने CBI जांच से सम्बंधित जो बिंदु याचिका में उठाये है इसे लेकर पहले वे राज्य शासन की किसी भी सक्षम अथॉरिटी के पास नही गए।

अतः याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता है कि सक्षम अथॉरिटी के समक्ष याचिका के बिंदुओ को रखे। गौरतलब है कि याचिका में इस हत्याकांड में असली आरोपी की पहचान करने और उसके खिलाफ मुकदमा दायर करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि पुलिस ने कविता की हत्या में गलत व्यक्ति (महेश को) को आरोपी बनाया था और कविता का असली कातिल अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। कविता का शव छह टुकड़ों में मिला था लेकिन असली कातिल पुलिस की पहुंच से बाहर है। इस केस में पुलिस पूरी तरह से असफल साबित हुई है अत: मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाना चाहिए।

3 साल पहले हुई थी हत्या
मित्रबंधु नगर निवासी 30 वर्षीय कविता रैना 24 अगस्त 2015 को दोपहर में बच्ची को लेने स्कूल बस स्टॉप गई थी, बच्ची तो बस स्टॉप से घर आ गई, लेकिन कविता नहीं लौटी। तीसरे दिन उसकी लाश छह टुकड़ों में बोरी में भरी तीन इमली चौराहा स्थित पुलिया के नीचे मिली थी। पुलिस ने घटना के चार महीने बाद 9 दिसंबर 2015 को महेश बैरागी निवासी आलोक नगर (मूसाखेड़ी
क्षेत्र) को कविता की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था लेकिन पुख्ता साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने गत माह उसे बरी कर दिया था।

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