लो जी अब दवा में भी मिलावट!!!, इंदौर में पकड़ाई मिलावटी दवाई फेक्ट्री, संचालक व कर्मचारी सहित दो आरोपी गिरफ्तार

-सोडियम बायकारबोनेट से सोनामिंट व सोडामिंट नामक टेबलेट्स बनाई जाती थी जो कि दवाई के लिये उपयुक्त नही होता था

इंदौर। खाद्य पदार्थों में मिलावट की बात तो आम है लेकिन अब तो दवा में भी मिलावट होने लगी। इंदौर में ऐसी ही मिलावटी दवाई फेक्ट्री पकड़ाई है। क्राइम ब्रांच व आयुष विभाग ने संयुक्त छापा मारकर फैक्टरी संचालक व कर्मचारी सहित दो को गिरफ्तार किया है।


नवागत पुलिस महानिरीक्षक इन्दौर झोन विवेक शर्मा, डीआईजी रुचिवर्धन मिश्रा के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई। एएसपी कक्राइम अमरेंद्र सिंह ने बताया कि मुखबिर तंत्र से सूचना मिली कि इंदौर के म.नं. 35 शिक्षक नगर मे एक व्यक्ति मिलावटी दवाई बनाने का काम करता है तथा उसी स्थान पर कारखाना भी चलाता है ।

इस पर थाना एरोड्रम पुलिस,ड्रग इंसपेक्टर इन्दौर,आयुष विभाग के अधिकारी के साथ क्राईम ब्राँच की टीम व्दारा मौक पर पहुंचकर दबिश दी गई। यहां पर दो लोग उपस्थित मिले जिनके नाम संतोष पिता साहीबराव पाटिल उम्र 38 साल नि. 102 धर्मराज कालोनी इन्दौर तथा फेक्ट्री संचालक नरेन्द्र जैन पिता एस.एल. जैन उम्र 54 साल नि. कालानी नगर इन्दौर है।

कारखाने के निरीक्षण के दौरान पाया गया की कारखाने मे सोनामिन्ट नाम से दवाई बनायी जाती है, तथा मार्केट मे होल सेल मे बेची जाता है । कारखाने पर सोनामिन्ट नाम की दवाई की लाखों टेबलेट खुले मे कंटेनरो मे रखी मिली, जो कि संचालक नरेन्द्र जैन के व्दारा कारखाने मे ही बनवाई जाती थी। सोनामिन्ट टेबलेट मे सोडियम बायकारबोनेट 250 एमजी, मेनथाल.03 एमजी, जींजर 10 एमजी , पेपरमेंट आईल .0024 एमएल तथा शक्कर व कलर मिलाकर बनाया जाता था। एक डब्बे मे 1000 टेबलेट पैक की जाती थी ।

एक डब्बा नरेन्द्र जैन व्दारा 17 रुपये मे बेचा जाता था जो कि मार्केट मे 60 रुपये मे बिकता था। संचालक नरेन्द्र जैन व्दारा जो दवाई बनाई जाती थी उसमे सोडियम बायकारबोनेट जो उपयोग किया जाता था वह मेडिकल मे उपयोग करने लायक नही होता था। कारखाने मे कुल 27 बोरीयां मिली जो मेडिकल मे उपयोग नही की जाने वाले सोडियम बायकारबोनेट की थी, जिससे नरेन्द्र जैन व्दारा दवाई बनाकर मार्केट मे बेचा जा रहा था जिन्हे पुलिस व्दारा जप्त किया गया है।

नरेन्द्र जैन ने अपने भतीजे राजू बंबोरीया के नाम से फार्माकेम नाम से लायसेंस ले रखा था जो कि आयुर्वेदिक दवाई बनाने का लाइसेंस था, किन्तु उसके कारखाने पर कई एलोपेथिक दवाईयां जो वर्ष 2009 के पूर्व मे ही एक्सपायर्ड हो गयी है, उनकी भी तीस बोरी रखी मिली। नरेन्द्र जैन के व्दारा टेबलेट बनाने के लिये दो मशीनो का उपयोग किया जाता था।

आयुष विभाग के अधिकारीयों व्दारा अनुपयुक्त रा मटेरियल का सैंपल लेने के पश्चात एक रिपोर्ट मय प्रतिवेदन के थाना एरोड्रम मे प्रस्तुत कि जिसमे स्पष्ट किया गया कि संचालक नरेन्द्र जैन , मालिक राजू बंबोरीया व कर्मचारी संतोष पाटिल व्दारा दवाई बनाने के लिये अनुपयुक्त सोडियम बायकारबोनेट का उपयोग किया जाकर दवाई की बडी खेप तैयार की जा रही है तथा इस प्रकार से धोखाधडी से काफी मुनाफा कमाया जा रहा है।

उक्त प्रतिवेदन व रिपोर्ट के आधार पर थाना एरोड्रम पुलिस व्दारा धारा 420 , 274 , 275 भादवि का अपराध आरोपीगण संचालक नरेन्द्र जैन , मालिक राजू बंबोरीया व कर्मचारी संतोष पाटिल के विरुध्द पंजीबध्द कर विवेचना मे लिया गया तथा आरोपीगण नरेन्द्र जैन तथा संतोष पाटिल को गिरफ्तार किया गया है।


आरोपी नरेन्द्र जैन ने पूछताछ पर बताया कि वह करीब 18 साल से दवाई बनाने का काम कर रहा है। पहले वह वर्ष 2000-09 तक एलोपेथि दवाई बनाने का काम करता था । वर्ष 2009 से वह आयुर्वेदिक दवाई बनाने का काम कर रहा है । उसके भतीजे राजू बंबोरिया के नाम से उसने फार्माकेम नाम से लाईसेंस लिया था। नरेन्द्र जैन के व्दारा बताया गया की वह दवाई बनाने के उपरान्त इन्दौर शहर के विभिन्न फार्मा को दवाईयों का सप्लाय करता था जिनके नाम सुगन फार्मा , जैनम फार्मा , शाह फार्मा , माताश्री फार्मा , ममता मेडिकोज जैसे कई फार्मा एजेंसियों को दवाबाजार मे होलसेल मे दवाई सप्लाय करता था। उसके व्दारा बताया गया कि हातोद मे पालिया रोड पर उसके भतीजे राजू बंबोरिया का एक ओर कारखाना है, जिसमे एलोपेथिक दवाईया बनाई जाती हैं ।

कारखाने पर भी क्राईम ब्रांच की दूसरी टीम तथा ड्रग्स विभाग की टीम व्दारा निरीक्षण किया गया तो वहाँ पर भी लाईसेंस मे दी गयी शर्तो को उल्लंघन होना पाया गया तथा कई अनियमितता पायी गयीं। टीम व्दारा दबिश के दौरान पाया गया की भारतीय ड्रग एवं कास्मेटिक एक्ट के अन्तर्गत बनाये गये अनेकों नियमो की अनदेखी कर जानबूझकर निम्नगुणवत्ता की एलौपेथिक दवाये बनाकर अपने आर्थिक स्वार्थों की पूर्ति के लिये आम लोगो के स्वास्थय एवं जीवन के साथ खिलवाड किया जा रहा है।

फैक्ट्री के भीतर अकुशल वृध्द महिला श्रमिकों से गंदगी पूर्ण जगह पर बिना प्रयोगशाला परीक्षण के तथा दवाओं मे प्रयुक्त रसायनों के सही अनुपात की मात्रा का ध्यान रखे बिना बडे पैमाने पर दवा निर्माण किया जा रहा है। एक ही कैंपस के भीतर कैपसूल , टेबलेट्स, सीरप का निर्माण किया जा रहा है।इस प्रकार की बडी अनियमितता पाये जाने पर ड्रग्स विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों के व्दारा एरो फार्मा के पालिया स्थित फैक्ट्री को सीलबंद किया गया तथा नमुना सैंपल की जाँच रिपोर्ट पश्चात उसका लायसेंस रद्द कर दिया गया।

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इंदौर


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