इंदौर संभाग में अब रिचार्जिग की व्यवस्था कराने के पश्चात ही नये नलकूप खनन की अनुमति मिलेगी

-संभागायुक्त त्रिपाठी ने सभी कलेक्टर्स को जारी किए निर्देश


इंदौर। इंदौर संभाग में वर्षा जल को संरक्षित करने तथा भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिये कार्ययोजना बनाई गई है। इस संबंध में संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी ने संभाग के सभी कलेक्टरों एवं नगर निगमों के आयुक्त और अन्य नगरीय निकायों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किये है।

जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कर ही नये नलकूप खनन की अनुमति जारी करने के निर्देश दिये गये है। जारी निर्देशानुसार संभाग में अब रिचार्जिग की व्यवस्था कराने के पश्चात ही नये नलकूप खनन की अनुमति मिलेगी। रिचार्जिग की व्यवस्था कराने का प्रमाण-पत्र नगरीय निकाय द्वारा जारी किया जायेगा।इस संबंध में जारी किये गये परिपत्र अनुसार त्रिपाठी द्वारा निर्देश दिये गये है कि नलकूप खनन की प्रत्येक अनुज्ञा के साथ यह शर्त भी अधिरोपित की जाये कि अनुज्ञा प्राप्त करने के प्रत्येक आवेदन के साथ आवेदक यह प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करेगा कि उसके द्वारा भू-जल रिचार्जिग की व्यवस्था की जा चुकी है।

यह प्रमाण-पत्र नगरीय निकाय/ स्‍थानीय निकाय जारी किया जायेगा.प्रत्येक आवेदक जो नलकूप खनन की अनुज्ञा चाहता है, वह आवेदन करने के पूर्व स्वंय के निवास/वाणिज्यिक एवं व्यवसायिक स्थल/औद्योगिक स्थल या अन्य स्थल क्षेत्रफल न्यूनतम एक हजार वर्गफीट पर रूफ टॉप रेन वाटर हारवेस्टीग सिस्टम (छत्तीय वर्षा जल संवर्धन तकनीक) अनिवार्य रूप से लगवायेगा। (स्वंय का स्थल न होने पर पारिवारिक रिश्तेदार, मित्र आदि के स्‍थल पर उसकी सहमति से) लगवाना होगा।

तत्पश्चात आवेदक नगरीय निकाय अथवा स्थानीय निकाय में यह प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु आवेदन करेगा की उसके द्वारा भू-जल रिचार्जिग की व्यवस्था की गई है।नगरीय निकाय/ स्थानीय निकाय आवेदक से प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु आवेदन प्राप्त होने पर आवेदित स्थल का निरीक्षण करवायेगा। स्थल निरीक्षण में आवेदित स्थल पर यदि भू-जल रिचार्जिग की व्यवस्था पाई जाती है, तो आवेदक को इस बावत् प्रमाण पत्र जारी करेगा। आवेदक नलकूप खनन की अनुज्ञा के आवेदन के साथ अन्य दस्तावेजों के साथ-साथ यह प्रमाण-पत्र भी संलग्न कर सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा।

सक्षम प्राधिकारी केवल इस प्रकार प्रमाण-पत्र संलग्न आवेदनों को ही प्राप्त करेंगे एवं नियानुसार आवेदनों का निराकरण करेंगे।इस प्रक्रिया के अनुसरण से एक ओर आमजन वर्षा जल को रिचार्जिग कर भू-जल के रूप में संरक्षण करने हेतु प्रेरित होगें वहीं दूसरी ओर अनावश्यक नलकूप खनन पर रोक लगेगी। सामान्यतः वार्षिक 1000 मिमी औसत वर्षा वाले क्षेत्रों में 1000 वर्गफीट की रूफ टॉप क्षेत्रफल की बिल्डिंग पर भूजल रिचार्जिग व्यवस्था से 800 सी.यू.एम. जल संरक्षण होता है।

इससे वर्षा जल को बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सकता है। आगामी नलकूप खनन की समस्त अनुज्ञायें उक्त निर्देशों का पालन कर ही जारी की जाये। परिपत्र में कहा गया है कि वर्तमान में भू-जल का अति दोहन हो रहा है। इसकी तुलना में भू-जल का पुर्नभरण (रिचार्जिग) नहीं हो रहा है, जिससे भू-जल का स्तर सतत् रूप से गिरता जा रहा है। नगरीय निकायों में आवासीय एवं व्यवसायिक कॉलोनियों का विस्तार शहर के बाहरी क्षेत्रों में हो रहा है।

जहां पर नगरीय निकाय की जल वितरण व्यवस्था उपलब्ध नहीं है या अन्यथा ऐसे क्षेत्रों में भू-खण्डधारी, भवन स्वामियों द्वारा जल की आवश्यकता की पूर्ति हेतु नलकूप खनन कराया जाता है और यह नलकूप खनन का कार्य बड़ी संख्या में हो रहा है।


मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत जल अभावग्रस्त क्षेत्र में बिना अनुज्ञा के नलकूप खनन प्रतिबंधित रहता है। यद्यपि अधिनियम की धारा 4 एवं 6 के तहत नलकूप खनन की अनुमति सक्षम प्राधिकारी द्वारा दी जाती है। अनुमति देते समय स्थानीय निकाय एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से अभिमत प्राप्त किया जाता है।

परंतु आवेदक द्वारा नलकूप के माध्यम से जिस भू-जल का उपयोग किया जायेगा, उसके रिचार्जिग के लिये क्या उपाय किये गये है, इस संबंध में किसी प्रकार की जानकारी नहीं ली जाती है। अधिनियम की धारा 4 एवं 6 में यह प्रावधान है कि अनुमति “ऐसी अन्य शर्तों और निबंन्धनों के अध्यधीन होगी जो विहित की जायें।

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