सही कहा कैलाश भाई, इंदौर में जिसे देखो वह कहीं से भी घुस आता है

सफाई की तरह ट्रेफिक सुधार में भी नंबर वन की कवायद जरुरी

इंदौर। इंदौर वासी तो जानते ही है कि यहां का ट्रेफिक देश के अन्य शहरों के मुकाबले बेहद खराब है, लेकिन अब बाहर से आने वाले सेलिब्रेटी भी खुलकरयह बात कहने लगी है। गत दिनों सूफी गायक कैलाश खेर द्वारा इंदौर के बिगड़ेल ट्रेफिक को लेेकर ऐसी ही टिप्पणी की गई थी। वास्तव में देखा जाएतो वे गलत नहीं थे। इंदौर शहर में हर तरह के विकास की बात हो रही है लेकिन कैंसर के थर्ड स्टेज जैसी स्थिति में पहुंच चुके अस्त व्यस्तट्रेफिक सुधार की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए जा रहे है आने वाले दिनों में और घातक हो सकते है।

केन्द्र सरकार द्वारा जिन शहरों को देश में स्मार्ट बनाया जा रहा है, उसमें इदौर का भी नाम है। इसके अलाव हाल ही में लगातार दूसरी बार इस शहर में देश में सफाई में नंबर वन रहने का खिताब पाया है। यह खिताब देने खुद देश के प्रधान मंत्री गत 23 जून को इंदौरआए थे। नेहरु स्टेडियम में आयोजित इसी कार्यक्रम में संगीत की प्रस्तुति देने के लिए मशहूर सूफी गायक कैलाश खेर को बुलाया गया था। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था की तो सराहना की लेकिन बिगड़ेल ट्रेफिक पर उंगली उठाते हुए कहा था कि यहां सडक़ पर कोई भी कहीं से भी घुस आता है। इसके पहले कई साल पूर्व मशहूर क्रिकेटर कपिल देव भी इंदौर प्रवास के दौरान यहां के ट्रेफिक व्यवस्था की आलोचना कर चुके है।

कुछ भी गलत नही
बाहर से आने वाली सेलिब्रेटी द्वारा यदि इंदौर के अस्त व्यस्त ट्रेफिक की आलोचना की जा रही है, तो इसमें कुछ भी गलत है। जिस तेजी से शहर बढ़ रहा है, उसके हिसाब से शहर के ट्रेफिक के लिए कोई प्लानिंग नहीं हो पा रही है। न तो शहर में चाहे जहां बसें और ट्रक घुसने और खड़ी होने पर सख्ती से पाबंदी है, ना वाहनों के पार्किंग की समुचित व्यवस्था है। वन वे कहने को शहर में 41 है लेकिन कड़ाई से पालन एक का भी नहीं होता। इसके तीन सबसे बड़े उदाहरण देखना हो तो एमजी रोड पर गांधीहाल से उलटे कोठारी मार्केट की तरफ, जेलरोड पर चिमनबाग की ओर से आने वाली सडक़ पर, राजवाड़ा पर शिव विलास पेलेसे से खजूरीबाजार की ओर प्रमुख है। यहां के वन वे में खुलेआम घुसते वाहनों को रोकने वाला कोई नहीं रहता, नतीजतन दिन भर यहां वाहन चालक आपस में उलझते रहते है।

ड्रायवर गाड़ी में बैैठाओ, कहीं भी लगाओ
इन दिनों मुख्य मार्गो पर सडक़ पर कारें खड़ी करने का एक नया ट्रेंड चालू हुआ है। इसमें कार में ड्रायवर को बैठा दिया जाता है और पूरा परिवार आराम से शापिंग करता है। ऐसे में कोई क्रेन या ट्रेफिक कर्मी आ भी गया तो उसे यह बहाना कर दिया जाता है कि बस हटा ही रहे है। इसके नजारे देखना हो तो राजवाड़ा, कोठारी मार्केट, जवाहर मार्ग, आरएनटी मार्ग जैसे इलाकों में देखें जा सकते है।

ट्रेफिक के लिए सक्षम अथारिटी बनाना होगी
जानकारों का मानना है कि अभी जो ट्रेफिक पुलिस है वह बल और संसाधनों की कमी से जूझ रही है। कई वित्तीय मामलों में उसे नगर निगम के भरोसे रहना पड़ता है। शासन स्तर पर भी इंदोर जैसे मेट्रो की शकल ले रहे शहर के लिए ट्रेफिक को लेकर कोई अलग से प्लान नहीं है। ऐसे में यह जरुरी है कि एक पृथक से ऐसी सक्षम अथारिटी शासन इसमें गठित करे जिसे बल के साथ ही साधन व अधिकार संपन्न बनाया जाए। इस अथारिटी को यदि इतने अधिकार भी दे दिए जाएं वह यहां से चालान के रुप में जितनी भी राशि वसूली जाएगी वह इंदौर के ही ट्रेफिक सुधार पर खर्च होगी, तो इस दिशा में कुछ स्थितियां सुधर सकती है, अन्यथा शहर स्मार्ट तो हो जाएगा लेकिन बिगड़ेल ट्रेफिक के रुप में
उसकी सुंदरता का दाग हमेशा बना रहेगा।

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