डंपर प्रकरण में मुख्यमंत्री सहित 5 अन्य के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर

नई दिल्ली:डंपर प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान सहित 5 अन्य आरोपितों के ख़िलाफ़ मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर और ज़िला न्यायालय,रीवा में दायर याचिका ख़ारिज होने के बाद याचिकाकर्ता के.के मिश्रा ने शुक्रवार 6 जुलाई,18 को सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की है,जिसकी सुनवाई आगामी दिनों में होगी।

याचिकाकर्ता मिश्रा ने इस याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से प्रार्थना की है कि इस प्रकरण में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह,उनकी पत्नी श्रीमती साधनासिंह,मंत्री राजेन्द्र शुक्ल,आइएएस एस.के.मिश्रा,तत्कालीन आरटीओ के.एन. थापक व तत्कालीन सरपंच श्री नित्यानंद पाठक के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित कई आदेशों के प्रकाश में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम -1988 के तहत प्रकरण करवाया जाये ।

याचिका में कहा गया है कि ज़िला न्यायालय,रीवा ने उनके द्वारा गत दिनों इस विषयक दायर परिवाद को CRPC की धारा -200 के तहत उनके स्वयं और अन्य गवाहों के बयान लिए बिना यह कह कर खारिज कर दिया था कि आरोपित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ,मंत्री राजेंद्र शुक्ल एवम वरिष्ठ आईएएस एस.के. मिश्रा लोकसेवक की श्रेणी में आते हैं। लिहाजा, इन्हें लेकर अभियोजन की स्वीकृति जरूरी है, किन्तु जिला न्यायालय ने पारित अपने इस आदेश में आरोपित श्रीमती साधनासिंह,सेवानिवृत आरटीओ के.एन थापक तत्कालीन सरपंच नित्यानंद पांडे को लोकसेवक नहीं मानते हुए उनके विरुद्ध लोकायुक्त /ईओडब्ल्यू जैसी जांच एजेंसियों में जाने के लिए परिवादी को स्वतंत्र कर दिया था।

विधि सम्मत नियमों के आधार पर ऐसे प्रकरणों में न्यायालय द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद अभियोजन की स्वीकृति जरूरी होती है।किंतु जिला न्यायालय ने मिश्रा सहित अन्य गवाहों के बयान व संज्ञान लिए बगैर परिवाद खारिज कर दिया ! इस पारित आदेश के बाद याचिकाकर्ता मिश्रा ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन की स्वीकृति को लेकर पारित विभिन्न आदेशों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये दृष्टांतों का उल्लेख करते हुए एक याचिका दायर की, जिसे उच्च न्यायालय ने भी ख़ारिज कर जिला न्यायालय द्वारा पारित आदेश को सही माना* ।

मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को दायर अपनी इस याचिका में माननीय शीर्ष अदालत से प्रार्थना की है कि..क्या कोई ट्रायल कोर्ट याचिककर्ता व उनके गवाहों के धारा- 200 में बयान लिए बग़ैर उसे ख़ारिज कर सकता है..प्रकरण को न्यायालय द्वारा संज्ञान में लिए बग़ैर याचिकाकर्ता से अभियोजन स्वीकृति माँगी जा सकती है ? श्रीमती साधना सिंह,के एन थापक व नित्यानंद पांडे जो लोकसेवक नहीं है उनके विरुद्ध ज़िला न्यायालय ने अपराध दर्ज करने हेतु संज्ञान क्यों नहीं लिया? याचिकाकर्ता मिश्रा की ओर से यह विशेष अनुमति याचिका देश के ख्यात वकील व राज्यसभा सदस्य विवेक तनखा तथा वरिष्ठ वकील वैभव श्रीवास्तव ने दायर की है*।

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