ताई का भावुक पत्र सांसदों के नाम…..

मानसून सत्र के पहले लिखा

नईदिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष और इंदौर की सांसद ताई सुमित्रा महाजन ने संसद के मानसून सत्र से पहले सभी सांसदों को एक भावुक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा है कि अगर सांसद अतीत में दूसरे दलों के आचरण का हवाला देते हुए व्यवधान को उचित ठहरायेंगे, तब संसद में ‘व्यवधान का चक्र’ कभी खत्म नहीं होगा।

उन्होंने सांसदों को उनकी नैतिक जिम्मेदारी की याद दिलाते हुए कहा कि 16वीं लोकसभा के आखिरी वर्ष में अधिक से अधिक विधायी कार्य संपन्न कराने में योगदान दें तथा राजनीतिक एवं चुनावी लड़ाई को सदन के बाहर अपने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लड़ें।

समय आ गया है कि हम आत्म चिंतन करें और इस बारे में फैसला करें कि हमारी संसद और लोकतंत्र की छवि के लिये आगे बढऩे का रास्ता क्या है। दो पन्नों के पत्र में कहा कि लोकतंत्र के पवित्र मंदिर संसद की प्रतिष्ठा और पवित्रता को अक्षुण्ण एवं सुरक्षित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

अपने अनुभव के आधार पर मैं यह कह सकती हूं कि लोग अपने प्रतिनिधियों के कामकाज पर करीबी नजर रखते हैं और मीडिया भी लोगों के समक्ष संसद और संसदीय क्षेत्र में उनके कामकाज की विस्तृत रिपोर्ट पेश करता है।

पत्र में लिखा कि आप न केवल अपने क्षेत्र और देश की उम्मीदों पर खरा उतरें बल्कि देश की प्रगति और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में भी योगदान करें । लोगों के विश्वास को रखें कायम पिछले सत्र के दौरान सदन में सदस्यों के शोर शराबे, तख्तियां दिखाये जाने का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अलग अलग विचार और असहमति संसदीय मर्यादा एवं मानदंडों के अनुरूप होने चाहिए ताकि लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों का विश्वास कायम रह सके।

उन्होंने कहा कि क्या हम अपने अनुपयुक्त आचरण को अतीत में दूसरे दलों द्वारा कामकाज बाधित करने की दलील देकर उचित ठहरा सकते हैं ? अगर इस दलील को स्वीकार कर लिया जाता है तब व्यवधान कभी खत्म नहीं होगा।

सुमित्रा महाजन ने इस संबंध में श्रीमद.भावगत गीता के श्लोक का भी जिक्र किया कि एक नेक व्यक्ति जो कुछ करता है, दूसरे उसका अनुसरण करते हैं।

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इंदौर