समयावधि पूर्ण कर चुके इंदौर नगर निगम सहित प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों में महापौर/अध्यक्ष की अध्यक्षता में प्रशासकीय समिति गठित, इंदौर में मालिनी गौड़ सम्हालेगी काम

-शिवराज की मंत्रि-परिषद की पहली बैठक में हुए कई निर्णय

भोपाल। समयावधि पूर्ण कर चुके इंदौर नगर निगम सहित प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों में महापौर/अध्यक्ष की अध्यक्षता में प्रशासकीय समिति गठित करने का निर्णय हुआ है, यानि निकट भविष्य में नगर निगम/पालिकाओं के चुनाव नही होंगे। इस निर्णय से इंदौर में मेयर रही मालिनी गौड़ इस प्रशासकीय समिति की अध्यक्ष रहेगी ओर इंदौर नगर निगम का कामकाज सम्हालेगी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रि-परिषद की पहली बैठक हुई। बैठक में कोरोना महामारी को देखते हुये निर्णय लिया गया कि प्रदेश के ऐसे नगरीय निकाय,जिनकी समयावधि समाप्त हो चुकी थी, में प्रशासकीय समिति का गठन किया जायेगा। समिति में वह सभी निर्वाचित सदस्य रहेगें, जो पूर्ववती निकाय में सदस्य थे और अन्यथा निर्हरित नहीं हुए हैं।

यह समिति एक वर्ष तक या उक्त निर्णय का निर्वाचन होने तक, इन दोनों में से जो भी पहले हो, तक कार्य करेगी। प्रशासकीय समिति की अध्यक्षता संबंधित नगरीय निकाय का मेयर/ अध्यक्ष करेगा । प्रशासकीय समिति के अध्यक्ष तथा सदस्यों के अधिकारों के बारे में राज्य शासन द्वारा अलग से निर्णय लिया जायेगा। बैठक में 23 मार्च 2020 से अभी तक लिये गये निर्णयों से मंत्रि-परिषद को अवगत करवाया गया।

निर्धन, कमजोर वर्गों और श्रमिकों के लिये प्रमुख निर्णय

बैठक में प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित पेंशन आदि का भुगतान दो माह के अग्रिम के रूप में किया जाने का निर्णय लिया गया। बताया गया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में 46 लाख हितग्राहियों के खातों में दो माह की पेंशन राशि लगभग 562 करोड़ रूपये अग्रिम जमा करायी गयी है। संनिर्माण कर्मकार मण्डल में पंजीकृत 8 लाख 85 हजार मजदूरों के खातों में प्रारंभ में एक हजार रूपये की सहायता राशि और बाद में एक हजार रूपये की राशि अतिरिक्त रूप से उपलब्ध कराये जाने का निर्णय लिया गया।

ग्राम पंचायतों में पंच परमेश्वर योजना की प्रशासकीय मद में उपलब्ध राशि का उपयोग लोगों के भोजन/आश्रम की व्यवस्था के लिए किये जाने का निर्णय लिया गया। इसमें प्रवासी श्रमिकों एवं अन्य निराश्रितों एवं असहायों के भोजन आदि की व्यवस्था करने के लिये 70 करोड़ रूपये से अधिक की राशि जारी की गई है।

मध्यप्रदेश के असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को, जो अन्य राज्यों में फंसे हैं, उनकी तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये उनके बैंक खाते में एक हजार रूपये भेजने का निर्णय लिया गया । प्रत्येक जिले के लिये राहत शिविरों की व्यवस्था के लिये दो करोड़ रूपये तथा अन्य आकस्मिक व्यवस्थाओं के लिये एक करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश में लॉकडाउन के कारण फंसे अन्य 22 राज्यों के 7000 प्रवासी श्रमिकों को भी उनकी तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये प्रति मजदूर एक हजार रूपये सहायता देने का निर्णय लिया गया ।

अभियान में तैनात अधिकारी/कर्मचारी की कोरोना संक्रमण से मौत पर 50 लाख

राज्य शासन द्वारा कोविड योद्धा कल्याण योजना 2020 लागू करने का निर्णय लिया गया है। कोरोना के विरूद्ध अभियान के अंतर्गत कर्तव्य के दौरान उसमें तैनात अधिकारी/कर्मचारी की संक्रामकता के कारण मृत्यु होती है, तो उसके परिवार को 50 लाख रूपये की सहायता राशि दी जायेगी। इससे वे सभी अधिकारी/ कर्मचारी लाभान्वित होंगे, जिन्हें भारत शासन की बीमा नीति के लाभ की पात्रता नहीं बनती।

कोविड-19 की असामान्य परिस्थितियों से निपटने के लिए यह भी निर्णय लिया गया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए जिला कलेक्टर्स, विधायक निधि की राशि का उपयोग कोरोना टेस्टिंग किट्स/पीपीई किट्स / वेंटीलेटर्स/ फेस मास्क/ग्लव्स/ इन्फ्रारेड थर्मामीटर आदि चिकित्सा उपकरणों को क्रय करने में कर सकेंगे।

प्रदेश के 22 जिलों में जिला खनिज निधि में प्रतिवर्ष एकत्रित होने वाली 500 करोड़ रूपये की राशि एकत्र होती है। राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि का एक तिहाई अर्थात 30 प्रतिशत राशि को इन्ही जिलों में कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण एवं बचाव के लिये – दवाएं, बेड्स, वेंटीलेटर्स, मास्क, सेनिटाईजर आदि आवश्यक कार्यों में के लिए उपयोग किया जा सकेगा।

ग्राम पंचायतों को प्राप्त़ 14वें वित्त आयोग की राशि का 2.5 प्रतिशत सेनेटाइजर एवं मास्क की खरीदी पर व्यय किये जाने सम्बन्धी निर्देश प्रसारित किये गए हैं। प्रदेश के 26 कोरोना प्रभावित जिलों की नियमित निगरानी एवं पर्यवेक्षण तथा समन्वय के लिये भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारीयों को जिलों का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।

प्रदेश में सरकार द्वारा कोरोना टेस्टिंग क्षमता बढाने का निर्णय लेकर इस दिशा में सघन प्रयास किये गये। जिसकी बदौलत प्रदेश में मान्यता प्राप्त टेस्टिंग लैब्स की संख्या 4 से बढ़कर 11 तक पहुंची और टेस्टिंग क्षमता प्रतिदिन लगभग 200 टेस्ट से बढ़कर 1800 टेस्ट प्रतिदिन हुई I टेस्टिंग शीघ्र कराने के उद्देश्य से निरन्तर सैम्पल स्टेट प्लेन से दिल्ली भी भेजे जा रहे हैं।

प्रदेश में त्वरित निर्णय लेकर किये गए युद्ध स्तर के प्रयासों से अब लॉजिस्टिक्स के मामले में प्रदेश की स्थिति संतोषजनक है I वर्तमान में प्रदेश में पीपीई किट्स, एन 95 मास्क, 3 लेयर मास्क, हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन टेबलेट और ऑक्सीजन सिलेंडर आदि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में निर्णय

प्रदेश की शासकीय प्राथमिक शालाओं में अध्ययनरत 60 लाख 81 हजार और प्रदेश की शासकीय माध्यमिक शालाओं में अध्ययनरत 26 लाख 68 हजार विद्यार्थियों के खाते में मध्यान्ह भोजन योजना की राशि जमा करने का निर्णय लिया गया। इन छात्रों तथा दो लाख रसोईयों के खातों में लगभग 165 करोड़ की राशि जमा कराई गई है।

प्रदेश के सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में फीस जमा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2020 कर दी गयी है। छात्रवृत्ति योजना के तहत 430 करोड़ की राशि मिशन वन क्लिक के माध्यम से विद्यार्थियों के खातों में जमा कराई गयी है। कक्षा 1 से 8 तक सभी विद्यार्थियों को इस वर्ष जनरल प्रमोशन दे दिया गया है। प्रदेश के सभी स्कूलों एवं कॉलेजों में लॉक डाउन अवधि तक के लिए अवकाश घोषित कर दिया गया है।

प्रदेश में लॉकडाउन के चलते स्कूल एवं कॉलेज बंद होने के फलस्वरूप सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में ऑनलाइन माध्यमों से अध्ययन एवं अध्यापन कार्य किया जा रहा है ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई किसी भी स्थिति में प्रभावित न हों।

सार्वजनिक वितरण संबंधी निर्णय

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत पात्र परिवारों को एक माह का राशन निःशुल्क दिए जाने का निर्णय लिया गया। चार बड़े संभागीय मुख्यालयों के लिये 10,000 क्विंटल, शेष 6 संभागीय मुख्यालयों के लिये 7,500 क्विंटल तथा शेष सभी जिलों के लिये खाद्यान्न उठाव की अधिकतम सीमा 2,000 क्विंटल स्वीकृत की गई। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सभी हितग्राहियों को मई, 2020 तक के राशन का अग्रिम प्रदाय मार्च, 2020 में ही करवाने का निर्णय लिया गया। इसके तहत 1 करोड़16 लाख परिवारों को 7 लाख 71 हजार मीट्रिक टन खाद्यान्न प्रदाय किया गया है।

किसानों के हित में लिए गए निर्णय

किसान क्रेडिट कार्ड के भुगतान की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2020 तक बढाए जाने का निर्णय लिया गया। सरकार द्वारा किसानों को फसल बीमा का लाभ देने मार्च माह में ही बीमा कंपनियों को 2200 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए। अब शीघ्र ही प्रदेश के 15 लाख किसानों को 2900 करोड़ रूपये की बीमा राशि प्राप्त होगी।

किसानो को इस वर्ष भी शून्य ब्याज दर पर ऋण दिये जाने का निर्णय लिया गया। किसानों को प्राथमिक कृषि सहकारी साख समितियों के माध्यम से शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर, जो फसल ऋण वर्ष 2018-19 में दिया गया था, उसके भुगतान की अंतिम तिथि 28 मार्च से बढ़ाकर 31 मई 2020 कर दी गई है।

उपार्जन संबंधी निर्णय

प्रदेश में गत 15 अप्रैल 2020 से रबी उपार्जन कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। किसानों को तीन प्रकार से अपनी फसल बेचने की सुविधा दी गयी है। पहले उपार्जन केंद्र से दूसरी मंडी द्वारा अधिकृत प्राइवेट खरीद केन्द्रों से और तीसरी मंडी में पंजीकृत व्यापारी को सौदा पत्रक के माध्यम से ग्राम स्तर पर प्रदेश में विगत वर्ष कुल 3511 उपार्जन केंद्र संचालित थे। इस वर्ष 4000 से भी अधिक उपार्जन केन्द्र बनाए जाने का निर्णय लिया गया है। उपार्जन केन्द्रों पर स्वास्थ्य परीक्षण की भी व्यवस्था की गयी है।

प्रदेश में तेंदूपत्ता तुड़ाई का कार्य 25 अप्रैल से प्रारंभ किया जा रहा है और तेंदूपत्ता की क्रय दर इस बार 2500 रूपये प्रति मानक बोरा निर्धारित की गयी है। इसी प्रकार, हर्रा, बेहड़ा, महुआ आदि लघु वनोपजों को क्रय करने के लिए भी दरें जारी गयी हैं।

बिजली आपूर्ति एवं वितरण के सम्बन्ध में निर्णय

प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में 10 घंटे एवं शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति किया जाना सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिजली का बिल भरने की अंतिम तिथि बढाकर 15 मई की गयी है। इस तिथि तक भुगतान पर किसी प्रकार का विलम्ब शुल्क /अधिभार देय नहीं होगा। इसी प्रकार, कृषि उपभोक्ताओं, जिनके बिलों का भुगतान अप्रैल में होना था, वे अब बिना विलम्ब शुल्क /अधिभार के अपने बिलों का भुगतान माह मई 2020 तक कर सकेंगे ।

कोरोना संक्रमण में बचाव कार्य कर रहे अमले के सम्बन्ध में निर्णय

मुख्यमंत्री कोरोना योद्धा कल्याण योजना के माध्यम से प्रदेश के कोरोना नियंत्रण कार्य में लगे शेष सभी कर्मियों के लिए भी अनहोनी हो जाने पर राज्य सरकार की ओर से 50 लाख रुपये का बीमा कवच प्रदान करने का निर्णय लिया है।

कोरोना के पॉजिटिव मरीज के साथ काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को 10 हजार रुपये प्रतिमाह की विशेष प्रोत्साहन राशि दने का निर्णय राज्य सरकार ने किया है। इसी प्रकार, यदि किसी भी विभाग का कर्मी कोरोना नियंत्रण सम्बन्धी कार्य करते हुए कोविड पॉजीटिव हो जाता है, तो उसे 10 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता राशि दी जाएगी।

राज्य सरकार द्वारा शासकीय अस्पतालों, चिकित्सा महाविद्यालयों एवं उनसे सम्बद्ध अस्पतालों में कार्यरत उन सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को, जिनके द्वारा कोविड अस्पताल में कोविड पॉजिटिव मरीज की चिकित्सा /देखभाल की जा रही है, उन्हें प्रतिमाह 10 हजार रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान किये जाने का भी निर्णय लिया गया है I

इंदौर में जूनी इंदौर के थाना प्रभारी देवेन्द्र चंद्रवंशी का कोरोना के संक्रमण से लड़ते हुए निधन होने के फलस्वरूप राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया कि श्री चंद्रवंशी के परिवार को सरकार की ओर से 50 लाख की राशि, चंद्रवंशी की पत्नी सुषमा चंद्रवंशी को पुलिस उपनिरीक्षक के रूप में सरकारी नौकरी तथा परिवार को श्री चंद्रवंशी के मरणोपरांत असाधारण पेंशन दी जायेगी।

कोरोना संक्रमण से बचाव में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को कर्मवीर पदक और उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकीय अमले एवं अन्य अधिकारी /कर्मचारियों को कर्मवीर सम्मान दिए जाने का निर्णय लिया गया है।

अन्य निर्णय

कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के कार्यकाल में एक वर्ष की वृद्धि कर दी गयी है। कोरोना महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने के लिए राज्य-स्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया गया है।

राज्य में गरीबों और अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के कल्याण की जनकल्याण (संबल) योजना का प्रभावी क्रियान्वन सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। योजना के प्रवधानों पर पुनर्विचार कर शीघ्र इसे और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। संबल योजना में राज्य के करीब डेढ करोड़ निर्धन श्रमिक शामिल हैं।

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