May 26 2019 /
8:56 AM

Category: ब्लॉग

इंदौर में भी सूरत हादसे से तुरन्त सबक लेने की जरूरत

इंदौर में भी सूरत हादसे से तुरन्त सबक लेने की जरूरत है। मोटी फीस वसूलने वाले कोचिंग क्लास के कर्णधारो का पूरा फोकस फीस वसूलने पर रहता है। सुरक्षा तो दूर की बात है, मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है

जनादेश का स्वागत है…

नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं, एक बार फिर मोदी सरकार देश की संसद की चौखट चूमने जा रही है। न्यूज चैनल प्रशस्तियां गा रहे हैं कि नेहरू और इंदिरा के बाद मोदी तीसरे व्यक्ति हैं, जो लगातार दूसरी बार प्र

ना मैं चौकीदार.. ना मैं नामदार…. मैं हूँ कामगार..

चूंकि मैं मध्यमवर्ग से हूँ, इसलिए ना मुझे एक रूपये किलो में गेंहूँ मिलेगा.. ना ही मुफ़्त में शौचालय.. ना ही मैं प्रधानमन्त्री आवास का हक़दार.. ना ही उन 50 करोड़ लोगों में हूँ, जिन्हें आयुष्मान भारत क

एक्जिट पोलः अंदाजी घोड़े

एक्जिट पोल की खबरों ने विपक्षी दलों का दिल बैठा दिया है। एकाध को छोड़कर सभी कह रहे हैं कि दुबारा मोदी सरकार बनेगी। विपक्षी नेता अब या तो मौनी बाबा बन गए हैं या हकला रहे हैं। उन्हें समझ में नहीं आ

नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर नाथूराम गोडसे का साया..

कभी आपने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को लाचार होते देखा है? वो जो करते हैं खम ठोक के करते हैं और उस पर कभी अफ़सोस नहीं जताते और कभी कभार ही सफ़ाई देने की ज़रूरत महसूस करते हैं. गुजरात में हुए 2002 के

साहब… ये इंदौर का मीडिया है आपसे डरेगा नही

राजेन्द्र माथुर, प्रभाष जोशी, बालाराव इंगले के संस्कारों से भरे इस शहर की पत्रकारिता को जिस तरह से आप बिकाऊ बताकर डराने की जो कोशिश आपने अपने भाषण में की है, उस पर लगाम लगाए। ये इन्दोरी पत्रकार

अगली सरकार और अहंकार…

2019 का चुनाव अब अंतिम चरण में है। लोग पूछ रहे हैं कि सरकार किसकी बनेगी ? यह क्यों पूछ रहे हैं ? क्योंकि किसी की भी बनती नहीं दिख रही है याने किसी की भी बन सकती है। किसी की याने क्या? किसी एक पार्टी की

बनारस से प्रियंका गांधी के न लड़ने के मायने

प्रियंका गांधी की बनारस से उम्मीदवारी को हवा देकर न लड़ाने का फैसला करके कांग्रेस ने मोदी को ज़ोर का झटका धीरे से दे दिया है. मतलब शहर में एक दिलचस्प मुक़ाबले का डंका बज गया, टिकट बिक गए और स्टेडिय