Jan 23 2019 /
11:28 PM

Category: ब्लॉग

एक अफसर, दो कहानियां, दो राजनयिक नजरिए

सात या आठ जून 2017 की बात होगी... मध्य प्रदेश का मालवा अंचल किसान आंदोलन की आंच से बुरी तरह झुलस रहा था... खासतौर पर मंदसौर में पुलिस फायरिंग में छह लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार यानी उस वक्त की शिवर

ट्विंकल डागरे और भय्यू महाराज कांड ने उजागर कर दिया पुलिस और ‘मामा’ का असली चेहरा

मानना पड़ेगा मोटा भाई को, एक झटके में शिवराज सिंह के मंसूबों पर पानी ही नहीं फेरा वरन उन्हें कांग्रेस द्वारा आए दिन किए जाने वाले हमलों से भी बचा लिया। यदि अब भी शिवराज का मन मध्यप्रदेश में और अ

कमल के पैतरों से ‘कमल‘ हैरान

नई विधानसभा के पहले सत्र में विधानसभा में जो हुआ, उसने भाजपा को हैरत में डालने का काम कर दिया है। कहां तो कमलनाथ सरकार को गिराने के मंसूबे नेताओं ने पाल रखे थे और कहां विधानसभा अध्यक्ष के साथ उप

सवर्णो के बाबासाहेब !

वीपी सिंह के वक्त पूरा देश मंडल-कमंडल की आग में झुलसा था। आरक्षण को लेकर आंदोलन होते ही रहे हैं और अभी जब मोदी सरकार ने एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन किया तब पहले इससे जुड़े वर्ग ने और बाद में इसके

तो विधानसभा में होगी कमलनाथ की पहली अग्नि परीक्षा…

मप्र में नई कांग्रेस सरकार बनने के बाद 7 जनवरी से शुरू हो रहे विधानसभा के पहले सत्र में ही कांग्रेस के समक्ष बड़ी चुनौती विधानसभा अध्यक्ष चुनाव रूप में खड़ी होने के आसार बन रहे है। यह चुनौती इस

तीन तलाक पर कानून: समस्या से निजात या खुद समस्या!

अधिवक्ता अभिजीत दुबे तीन तलाक पर सरकार द्वारा लाया गया कानून समस्या से निजात दिलाने की जगह समस्या को बढ़ाने वाला प्रतीत होता है। अगर इस कानून की गहन पड़ताल की जाए तो स्पष्ट होगा कि इसके ढ

लँगड़ी सरकार की बैसाखी लेकर ना भाग जाए भाजपा

कमलनाथ की माया, हीरा को भरमाया, उज्जैन को तरसाया

मंत्रिमंडल गठन में भले ही जातीय-गुटीय संतुलन बनाए रखने में कमलनाथ ने राहुल गांधी का भरोसा जीत लिया हो लेकिन मनावर से जीते जयस के डॉ हीरा अल