Aug 15 2022 / 7:30 PM

दीपावली पर इस शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन

दीपावली रोशनी और खुशियों का त्योहार है। सभी लोग बड़ी ही बेसब्री से इस पर्व का इंतजार करते हैं। दीपावली पर पूरे घर की साफ सफाई कर इसे सजाया जाता है। साथ ही पूरे घर को दीयों की रोशनी से भर दिया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। यह खुशहाली, समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का द्योतक है। रोशनी का यह त्योहार बताता है कि चाहे कुछ भी हो जाए असत्य पर सत्य की जीत अवश्य होती है।

मान्यता है कि रावण की लंका का दहन कर 14 वर्ष का वनवास काटकर इस दिन भगवान राम अपने घर लौटे थे। इसी खुशी में पूरी प्रजा ने नगर में अपने राम का स्वागत घी के दीपक जलाकर किया था। राम के भक्तों ने पूरी अयोध्या को दीयों की रोशनी से भर दिया था।

दिवाली के दिन को मां लक्ष्मी के जन्म दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है। वहीं, यह भी माना जाता है कि दिवाली की रात को ही मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से शादी की थी। इस दिन भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि तथा बुद्धि का आगमन होता है।

दिवाली की तिथि और शुभ मुहूर्त-

दिवाली/लक्ष्मी पूजन की तिथि-
27 अक्टूबर 2019
अमावस्या तिथि प्रारम्भ-
27 अक्टूबर 2019 को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से
अमावस्या तिथि समाप्त-
28 अक्टूबर 2019 को सुबह 09 बजकर 08 मिनट तक
लक्ष्मी पूजा मुहुर्त-
27 अक्टूबर 2019 को शाम 06 बजकर 42 मिनट से रात 08 बजकर 12 मिनट तक
कुल अवधि-
01 घंटे 30 मिनट

दिवाली पूजन की सामग्री-

लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, लक्ष्मी जी को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, लाल कपड़ा, सप्तधान्य, गुलाल, लौंग, अगरबत्ती, हल्दी, अर्घ्य पात्र, फूलों की माला और खुले फूल, सुपारी, सिंदूर, इत्र, इलायची, कपूर, केसर, सीताफल, कमलगट्टे, कुशा, कुंकु, साबुत धनिया, खील-बताशे, गंगाजल, देसी घी, चंदन, चांदी का सिक्का, अक्षत, दही, दीपक, दूध, लौंग लगा पान, दूब घास, गेहूं, धूप बत्ती, मिठाई, पंचमेवा, पंच पल्लव (गूलर, गांव, आम, पाकर और बड़ के पत्ते), तेल, मौली, रूई, पांच यज्ञोपवीत (धागा), रोली, लाल कपड़ा, चीनी, शहद, नारियल और हल्दी की गांठ।

लक्ष्मी पूजन की विधि-

धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति खरीदकर दिवाली की रात उसका पूजन किया जाता है।

मूर्ति स्थापना-

सबसे पहले एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा रखें। अब जलपात्र या लोटे से चौकी के ऊपर पानी छिड़कते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें।

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा ।
य: स्मरेत् पुण्‍डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि: ।।

इसके बाद गंगा जल से आचमन करें। मां लक्ष्मी का ध्यान करें। मां लक्ष्मी का आवाह्न करें। हाथ में पांच पुष्प अंजलि में लेकर अर्पित करें। मां लक्ष्मी का स्वागत करें। मां लक्ष्मी को अर्घ्य दें। मां लक्ष्मी की प्रतिमा को जल से स्नान कराएं। फिर दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण यानी कि पंचामृत से स्नान कराएं। आखिर में शुद्ध जल से स्नान कराएं। मां लक्ष्मी को मोली के रूप में वस्त्र अर्पित करें। मां लक्ष्‍मी को आभूषण चढ़ाएं। मां लक्ष्मी को सिंदूर चढ़ाएं। कुमकुम समर्पित करें। अब अक्षत चढ़ाएं।

मां लक्ष्मी को चंदन समर्पित करें। पुष्प समर्पित करें। बाएं हाथ में फूल, चावल और चंदन लेकर दाहिने हाथ से मां लक्ष्मी की प्रतिमा के आगे रखें। अब मां लक्ष्मी को धूप, दीपक और नैवेद्य (मिष्‍ठान) समर्पित करें। फिर उन्हें पानी देकर आचमन कराएं। इसके बाद ताम्बूल अर्पित करें और दक्षिणा दें। फिर मां लक्ष्मी की बाएं से दाएं प्रदक्षिणा करें। मां लक्ष्मी को साष्टांग प्रणाम कर उनसे पूजा के दौरान हुई ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए माफी मांगे। इसके बाद मां लक्ष्मी की आरती उतारें।

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