Aug 09 2022 / 7:05 AM

दिल्ली में बसों की भारी किल्लत: गुप्ता

-मात्र 100 बसें ऊंट के मुंह में जीरा
-पिछले 5 वर्षों में दिल्ली सरकार के नई बसें खरीदने के सभी प्रयास भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के चलते बुरी तरह विफल

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा 100 नई बसों को हरी झंडी दिखाना दिल्ली में बसों की विशाल आवश्यकता को देखते हुए एक बहुत छोटा और बहुत देरी से उठाया गया कदम बताया है। उन्होंने कह कि यह ऊंट के मुंह में जीरा वाली बात है। पिछले 5 साल में दिल्ली सरकार के नई बसें खरीदने के सभी प्रयास भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के चलते बुरी तरह विफल हुए।

सरकार द्वारा अपने कार्यकाल में डीटीसी और कलस्टर बसों की संख्या न बढ़ाने का खामियाजा दिल्ली की आम जनता को भुगतना पड़ा। उन्होंने केजरीवाल से पूछा कि 2015 में किये गए उनके वायदे का क्या हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि वे डीटीसी के बेडे में 5000 नई बसें और कलस्टर बस मिनी कलस्टर योजनाओं के तहत 5000 अतिरिक्त बसें सड़कों पर लेकर आयेंगे। आज जनता सार्वजनिक बसों की कमी से जूझ रही है और इसके लिए केजरीवाल और उनकी सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है।

नेता विपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि आज बसों को हरी दिखाते हुए केजरीवाल और उनके मंत्री कैलाश गहलोत ने यह छिपाया कि 1000 सीएनजी लो-फ्लोर बसें खरीदने का काम भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा जांच के कारण अधर में लटक गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार द्वारा 1000 लो-फ्लोर सीएनजी बसें खरीदने के मामले में भारी भ्रष्टाचार और अनियमिततायें हुईं हैं। सारा ताना-बाना बोगस कंपनी जे.बी.एम. लिमिटेड को फेवर करने के लिये बुना गया था।

नेता विपक्ष ने कहा कि डीटीसी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक एवं परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने दिल्ली परिवहन निगम के अधिकारियों पर नियम कायदों के उल्लंघन करने का दबाव बनाया। तकनीकी रिपोर्ट पर एक ही दिन में दर्जन भर अधिकारियों से हस्ताक्षर करवाके खुद भी इस प्रस्ताव की उसी दिन स्वीकृति दे डाली।

उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्री घोटाले में पूरी तरह लिप्त हैं। कंपनी विशेष को लाभ पहुंचाने के लिये टेक्नीकल बिड् में निविदायें खुलने के बाद अवैध रूप से स्पेसिफिकेशंस में महत्वपूर्ण परिवर्तन किये गये। इतना ही नहीं भारत सरकार के केवल बीएस-6 बसें खरीदने के पर्यावरण हितैषी नियम को भी ताक पर रख बीएस-4 की बसें खरीदने को स्वीकृति दी गईं।

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