13 हो गयी, शिक्षको को वेतन नहीं मिला

सरकार के प्रति गहरा आक्रोश

इंदौर । शासन ने पूर्व में सभी शासकीय विभागों को निर्देशित किया था कि सभी शासकीय कर्मचारियों का वेतन प्रतिमाह एक तारीख को उनके बैंक खाते में जमा हो जाना चाहिये किंतु शिक्षा विभाग के शिक्षकों , अध्यापकों एवम अन्य कर्मचारियों का वेतन 10 तारीख तक ही मिल पा रहा है । इस माह तो 13 दिन बीत जाने के बाद भी शिक्षको को वेतन नही मिल पाया है । इससे शिक्षको में सरकार के प्रति गहन आक्रोश व्याप्त है ।

राज्य आदर्श शिक्षक मंच (रस्म ) के संयोजक भगवतीप्रसाद पण्डित , नियाज़ मोहम्मद खान , गंगाराम प्रजापति , मोहन सोलंकी एवम दिनेश परमार ने बताया कि शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को विगत 5 माह से समय पर वेतन भुगतान नहीं हो रहा है । अध्यापक एवम अन्य कर्मचारियों के साथ भी यही हो रहा है । माह जून का वेतन 13 दिन बाद भी नही मिल पाया है । इससे शिक्षक आर्थिक रूप से त्रस्त हो गए हैं । अपने लोन की किश्त समय पर नहीं चुकाने पर पेनल्टी भर रहे हैं । बच्चों की फीस एवम अन्य जरूरी कार्य नहीं हो पा रहे हैं । प्राप्त जानकारी अनुसार जिले भर में कमोबेश यही स्थिति है । विभाग के ddo और अन्य अधिकारी से बात करने पर वे कभी शासन द्वारा फंड न देने , सॉफ्टवेयर की खराबी , सर्वर डाउन होने , कोषालय के अधिकारियों के असहयोग का कारण बताकर अपना पल्ला झाड़ देते हैं किंतु शिक्षकों की पीड़ा पर कोई भी गम्भीर नहीं है ।

वेतन की देरी के साथ ही शिक्षकों के अन्य भुगतान में भी कोई ध्यान देने वाला नहीं है । जिले के हजारों शिक्षको को सातवें वेतनमान की एरियर की प्रथम किश्त का भुगतान आज तक नहीं हुआ । जबकि मई माह में ही भुगतान किए जाने के शासनादेश थे । अब जुलाई माह की 10 तारीख को देने को कहा गया था किंतु वह राशि से भी शिक्षक वंचित हैं । ऐसी प्रकार सेवा में 30 वर्ष पूर्ण कर चुके समयमान वेतनमान के एरियर की रकम भी सैकड़ों शिक्षकों को नहीं मिल पाई । उस बारे में शिक्षामंत्री एवं मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी है और मांग की है कि शिक्षकों को प्रतिमाह एक तारीख को वेतन मिलना सुनिश्चित किया जाए । समयमान एवं सातवे वेतनमान की एरियर राशि का भुगतान तत्काल किया जाए । लापरवाही बरत रहे विभागीय एवं कोषालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर तुरंत कठोर कार्यवाई की जाए । इन अधिकारियों की वजह से सरकार की बदनामी हो रही है और जनता तथा कर्मचारियों में सरकार की छवि खराब ही रही है ।

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इंदौर