7 बच्चो की मौत में देना होगा 65 लाख मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की बुरहानपुर नगरनिगम व अन्य की अपीलें

इंदौर। तकरीबन 4 साल पहले इंदौर सम्भाग में हुए एक हादसे में 7 बच्चों की मौत मामले में 65 लाख रुपये मुआवजा चुकाना होगा। इस सम्बंध में नगर निगम बुरहानपुर व अन्य की अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए NGT के पूर्व के फैसले को बरकरार रखा है।

जस्टिस मदन बी लोकुर व जस्टिस दीपक गुप्ता की डिवीजन बेंच ने नगर निगम बुरहानपुर और वही के गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अपीलों को खारिज़ किया।

मृत बच्चों के परिजन व घायलो की ओर से एडवोकेट मनोज अग्रवाल, अनिता मनोज और दीक्षा हर्ष अग्रवाल ने पैरवी की।

मामला इस प्रकार है

कि बुरहानपुर में प्राचीन परकोटे की दीवार पर किये गए गैरकानूनी निर्माण का मलबा पीछे की ओर बने मकानों पर 14 जुलाई 2014 को गिर गया था।

इसमे गरीब मुस्लिम परिवार के 6 माह से लेकर 16 साल तक के 7 बच्चे दबकर मर गए थे और 3 महिला पुरुष गम्भीर घायल हुए थे। स्थानीय कलेक्टर व गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी ने मृतको के परिजनों को मात्र 50-50 हज़ार और घायलों को 25-25 हज़ार मुआवजा दिया था।

इससे असंतुष्ट होकर NGT भोपाल में मामला लगाया। 28 जुलाई 2016 को NGT ने ब्याज सहित 65 लाख मुआवजा देने के आदेश दिए। इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में उक्त अपीले दायर की गई थी, जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया।

एडवोकेट मनोज अग्रवाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने NGT के आदेश की पुष्टि की है जिसमे ब्याज सहित 65 लाख मुआवजा अदा करने को कहा गया है।

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