Mar 20 2019 /
11:14 AM

मप्र में बागियों के तेवर ने बढ़ाई भाजपा की उम्मीदें

  • भाजपा सहित अन्य दलों के संपर्क में हैं नाराज निर्दलीय

इंदौर, प्रदीप जोशी। अपनी नई टीम के गठन के साथ मुख्यमंत्री कमलनाथ की मुसीबतें भी बढ़ती नजर आ रही हैं। काफी जद्दोजहद के बाद गठित हुए मंत्रिमंडल में उन लोगों को स्थान नहीं मिल पाया, जिनकी बदौलत कांग्रेस सत्ता पर काबिज हो सकी। अपनी ही पार्टी में गुटीय तालमेल बैठाने के चक्कर में पार्टी के तीन निर्दलीय विधायकों को कमलनाथ ने बिसरा दिया।

यही नहीं, बसपा और सपा जिन्होंने सबसे पहले समर्थन की घोषणा की उनके भी तीन विधायकों की अनदेखी कर दी गई। अब यही छह विधायक सरकार पर आंखें तरेर रहे हैं। इस सारे नाटकीय घटनाक्रम को भाजपा आसभरे अंदाज में निहार रही है।

राज्य की नवनिर्वाचित सरकार बनने से पहले ही अस्थिर होती नजर आने से भाजपा की उम्मीदें बढ़ गई हैं। उधर, नाराज बागी विधायक भी अन्य दलों के संपर्क में हैं। राजधानी में बीते दो दिनों में इसको लेकर खासी हलचल देखी गई।

कांग्रेस के तीन बागी कमलनाथ से रुष्ट

विधानसभा चुनाव में टिकट से वंचित करीब पचास नेताओं ने निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ा था। इनमें बुरहानपुर से ठाकुर सुरेंद्रसिंह शेरा भैया, वारासिवनी से प्रदीप जायसवाल, भगवानपुरा से केदार डावर और सुसनेर से विक्रमसिंह राणा जीत का परचम लहराने में सफल रहे। जब कांग्रेस 114 पर टिक गई तो सरकार बनाने की चाबी इन्हीं बागियों के हाथ में आ चुकी थी।

उधर, बसपा ने दो और सपा ने एक सीट पर जीत दर्ज कर कांग्रेस को समर्थन की घोषणा कर दी थी। तय माना जा रहा था कि सभी निर्दलीयों और बसपा-सपा को सरकार में भागीदारी दी जाएगी, मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं।

कमलनाथ की पसंद पर सिर्फ प्रदीप जायसवाल

मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली से जब 28 मंत्रियों की सूची फाइनल करवाकर लाए, उसके बाद से ही निर्दलीयों में नाराजी बढ़ गई थी। सूची में सिर्फ वारासिवनी से निर्वाचित प्रदीप जायसवाल का नाम था। वो भी कमलनाथ की निजी पसंद होने के कारण।

गौरतलब है कि शिवराज के साले संजय मसानी के कारण जायसवाल का टिकट कटा था और उन्होंने मसानी को ही पटखनी देकर क्षेत्र में अपना वर्चस्व दिखा दिया।

खास बात यह है कि संजय को कमलनाथ भाजपा से तोड़कर लाए थे और उनको हराने वाले बागी भी कमलनाथ की पहली पसंद बने और मंत्री पद भी पा गए।

दिग्विजय के कारण अटके शेरा

बुरहानपुर से टिकट की मांग करने वाले ठाकुर सुरेंद्रसिंह नवलसिंह शेरा भैया के टिकट की राह में दिग्विजयसिंह रोड़ा बन गए। निर्दलीय रूप से वे चुनाव जीत तो गए, मगर मंत्री पद नहीं पा सके और इसके लिए जिम्मेदार दिग्विजयसिंह को ही बताया जा रहा है। 24 दिसंबर की रात कमलनाथ के साथ उनकी गर्मागर्मी भी हो गई थी।

भाजपा का गढ़ भेदने के बाद भी नहीं मिला लाभ

आगर जिले की सुसनेर विधानसभा सीट पर पार्टी से बगावत कर मैदान में उतरे राणा विक्रमसिंह को खासी उम्मीद थी कि टीम कमलनाथ में उन्हें स्थान मिलेगा, पर टीम की घोषणा होने के बाद उन्हें निराशा हाथ लगी। भाजपा के गढ़ में जीत की पताका फहराने के बाद भी हुई उपेक्षा से राणा खासे नाराज हैं।

तोड़ा डावर का भरोसा

खरगोन जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुके केदार डावर अपना टिकट कटने के बाद से नाराज थे और इसी नाराजी के चलते उन्होंने पार्टी से बगावत कर दी। भगवानपुरा सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष में जीतकर आए डावर को दिग्विजय सिंह से उम्मीद थी, पर नाउम्मीदी ही उन्हें हाथ लगी।

डॉ. अलावा भी दिखा रहे तेवर

जय आदिवासी युवा शक्ति के प्रवर्तक डॉ. हीरालाल अलावा ने ऐन चुनाव के वक्त अपने संगठन का विलय कांग्रेस में कर दिया और खुद मनावर से टिकट पा गए। मंत्रिमंडल में नाम नहीं होने के कारण डॉ. अलावा भी तेवर दिखा रहे हैं और उन्होंने पार्टी सुप्रीमो राहुल गांधी से मुलाकात का समय भी मांगा है।

बसपा और सपा भी नाराज

मंत्रिमंडल के गठन के बाद बसपा और सपा को उम्मीद थी कि समर्थन देने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाएगा।

भिंड से भाजपा के कद्दावर उम्मीदवार चौधरी राकेश सिंह को हराने वाले बसपा के संजीव सिंह और पथरिया से रामाबाई गोविंद सिंह को निराशा हाथ लगी।

यही हाल सपा के टिकट पर छतरपुर की बीजावर सीट से जीते उम्मीदवार राजेशकुमार सिंह का भी रहा।
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप जोशी
की फेसबुक वॉल से साभार।

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