50 हजार के लिए BRTS पर 21 लाख क्यों परेशान.. , समाप्त कर दें BRTS

 इंदौर। लोक परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शहर में बनाये गए BRTS को लेकर दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को लगभग 15 माह बाद अंतिम बहस हुई।

जस्टिस पीके जायसवाल और जस्टिस एसके अवस्थी की डिवीजन बेंच में उक्त बहस हुई।तकरीबन एक घण्टे से अधिक चली बहस में शासन की ओर से महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव ने तर्क रखते हुए BRTS को जनता के उपयुक्त बताते हुए याचिका खारिज करने की गुहार की।

याचिका कर्ता किशोर कोडवानी ने अपने तर्क में कहा कि मात्र 50 हज़ार लोग आई बस से रोजाना सफर करते हर जिनके लिए बीच की लेन में अन्य वाहनों को प्रवेश नही है, जबकि इसी BRTS पर बाकी दो लेन में रोजाना 21 लाख लोग गुजरते है, जो जाम के कारण परेशान होते है।

अहमदाबाद ओर भोपाल का उदाहरण देकर याचिकाकर्ता ने कहा कि यहाँ भी आई बस वाली लेन में सभी चार पहिया वाहनों को प्रवेश देकर इस BRTS को समाप्त किया जाए और रेलिंग हटाकर सामान्य यातायात यहां संचालित किया जाए।

अब इस मामले में कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमित्र की ओर से बहस होना बे। इस हेतु आगामी 9 अगस्त तिथि निर्धारित की गई ।

याचिकाकर्ता ने बताया कि बीआरटीएस को लागू करने में शासन द्वारा जिन 20 बिंदुओं में अनियमितता बरतते हुए इसे लागू किया उस पर दस्तावेज आधारित तर्क उन्होंने कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए।

इनमे से मात्र दो बिंदुओं पर ही शासकीय अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा । शेष बिंदुओं पर प्रशासन का पक्ष मौन रहा ।

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इंदौर