व्हाट्सएप्प व एसएमएस के माध्यम से भी मान्य हो कोर्ट के समन

केन्द्र व राज्य सरकार के कानूनी विभाग को भेजा सुझाव

इंदौर । वर्तमान में अनेक सिविल एवं आपराधिक मकदमों में न्यायालय द्वारा भेजे जाने वाले नोटिस अर्थात समन की तामील नहीं होने से न्यायिक प्रक्रिया में आ रहे अवरोध को दूर करने के लिए केन्द व राज्य सरकार के कानूनी विभाग को कानून में संशोधन हेतु रिप्रेजेंटेशन भेजा गया है ।

इसमें सुझाव दिया गया है कि व्हाट्सएप एवं एसएमएस के माध्यम से नोटिस तामील कराए जाने संबंधी आवश्यक नियम बनाकर इसे लागू किए जाएं ।

इस रिप्रेजेंटेशन में कहा गया है कि नोटिस को तामिल करने के जो पारंपरिक तरीके हमारे कानून में बताए गए हैं उनमें व्यक्तिगत तामिली को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है अर्थात जिस व्यक्ति को नोटिस जारी हुआ है उसे ही नोटिस दिया जाए ।

इसके अलावा अन्य तरीकों में डाक द्वारा तामिली , व्यक्ति के घर अथवा दुकान में दिखने वाली जगह पर नोटिस को चस्पा किया जाना , अखबार में प्रकाशन किया जाना इत्यादि शामिल है , किंतु व्यक्ति द्वारा जानबूझकर विभिन्न तरीकों के माध्यम से नोटिस लेने से बचता है ।

अनेक मर्तबा कर्मचारियों के साथ मिलकर नोटिस को अवॉइड कर दिया जाता है , इस समस्या से वादी को न्यायालय से अत्यधिक विलंब होता है ।

यह रिप्रेजेंटेशन भेजने वाले लॉ प्रोफेसर अधिवक्ता पंकज वाधवानी ने कहा कि अब समय की मांग है कि ऐसे मामलों में जहां विरोधी पक्ष अर्थात प्रतिवादी आरोपी यदि मोबाइल धारक होकर सोशल मीडिया का उपयोग कर रहा है

तो उसे व्हाट्सएप अथवा टैक्स मैसेज के माध्यम से भी नोटिस की तामिली कराई जा सके और इसके लिए हमारे प्रक्रियात्मक कानून सीपीसी एवं सीआरपीसी में आवश्यक संशोधन किए जाना जरूरी है ।

इंटरनेट का हर व्यक्ति कर रहा उपयोग

वाधवानी ने कहा कि वर्तमान के औद्योगिक क्रांति के युग में इंटरनेट का प्रयोग दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है । वर्तमान में गांव में रहने वाला निरक्षर व्यक्ति भी एंड्राइड मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए इंटरनेट का उपयोग कर रहा है और फेसबुक , वाट्सएप इत्यादि जैसी सोशल नेटवर्किग साइट का उपयोग आम बात होता जा रहा है ।


वाट्सएप एप्लीकेशन न्यायालय के लिए भी कोई नई बात नहीं है । अनेक प्रकरणों में न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक मारठाम से संचार को विभिन्न प्रकरणों में अनुमति दी है ताकि शीय विचारण हो सके जो कि व्यक्ति का मौलिक अधिकार भी है ।


समन एक प्रकार का वैधानिक दस्तावेज है जिसके माध्यम से न्यायालय वाद के पक्षकार अथवा साक्षी को न्यायालय में चल रहे प्रकरण में उपस्थिति के लिए सूचित करता है ।
विधि विभाग को भेजे गए रिप्रेजेंटेशन में कहा गया है

कि समन के संबंध में भारत की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 61 से 69 तथा धारा 91 – 92 तथा सिथिल प्रक्रिया संहिता की धारा 27 एवं आदेश 5 में कानूनी प्रावधान किए गए हैं ।
हमारे देश के सिविल प्रक्रिया संहिता कानून के आदेश 5 नियम को उपधारा 2 में न्यायालय को शक्ति दी गई है

कि समन की तामिली के लिए वह जो उचित समझे कदम उठा सकता है , जिसमें स्पष्ट रूप से यह दर्शित किया गया है कि किसी भी माध्यम से न्यायालय समन की तामील ही करा सकता है।अर्थात फेक्स और इलेक्ट्रॉनिक मेल भी इसमें शामिल है।


इस प्रकार समन को तामील करने के लिए वाट्सएप का उपयोग कानूनी प्रावधानों के विरुद्ध नहीं माना जा सकता । 2 प्रति केस के अंतर्गत न्यायालय द्वारा इमेल से भेजे गए समन को वैलिड समन माना था।


इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेजे गए कानूनी नोटिस के संबंध में हाई कोर्ट को नियम बनाने की शक्ति भी प्रदान की गई है, जिसका उपयोग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा नियम बनाए भी गए हैं ।

उन्होंने कहा कि हाट्सएप एप्लीकेशन में डबल टिक का तात्पर्य व्यक्ति को संदेश प्राप्ति और नीले रंग से आने वाले डबल टिक से तात्पर्य संदेश पढ़ लेने से है।

इस मामले में न्यायालय यह उदाहरण सकता है कि व्यक्ति को समन मिल चुका है और मामला व्यक्ति के ज्ञान में आ चुका है ।


वादी को सही व्हाट्सप्पयन देने के लिए शपथ पत्र दिया जाना भी आवश्यक होना चाहिये ताकि यह बात सुनिश्चित की जा सके जिस व्यति को वाट्सएप पर समन भेजा गया है वह वही व्यक्ति है।

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इंदौर