Mar 24 2019 /
2:22 PM

क्रिकेटर मनोज प्रभाकर इंदौर कोर्ट से धोखाधड़ी मामले में बरी

इंदौर। जूनी इंदौर थाने में धोखाधड़ी के 17 साल पुराने धोखाधड़ी मामले में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सदस्य मनोज प्रभाकर को इंदौर की जिला कोर्ट ने दोषमुक्त किया है।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अमित भूरिया की कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त किया। प्रभाकर की ओर से अधिवक्ता अजय शंकर उकास ने पैरवी की। अधिवक्ता उकास ने बताया कि कोर्ट ने प्रभाकर पर आरोप सिद्ध नहीं पाते हुए उन्हें दोष मुक्त किया।

यह था मामला

मामला 2001 का है, जब इंदौर में रहने वाले बल्लभदास सिंघल ने थाना जूनी इंदौर में मनोज प्रभाकर सहित चार लोगों के खिलाफ भादवि की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था।

उनका कहना था, अपेक्स इंडिया चिटफंड कंपनी के इंदौर ऑफिस ने मनोज प्रभाकर सहित अन्य प्रभावशाली लोगों के कंपनी में डायरेक्टर होने की जानकारी दी थीं। कंपनी लोगों को मोटा ब्याज देने के नाम पर निवेश करने के लिए आकर्षित करती थी।

सिंघल ने भी उस समय 50 हजार रुपए की एफडी कंपनी में कर दी थी। इसके दो महीने बाद ही कंपनी भाग गई। उन्होंने 8 फरवरी 2001 को जूनी इंदौर थाने में केस दर्ज कराया था। मनोज प्रभाकर ने 30 अगस्त 2001 को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली थी।

इस बीच जमानत नियमित नहीं कराने पर 7 अप्रैल 2015 को जिला कोर्ट ने प्रभाकर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था। इसी के चलते वे इंदौर आए थे और कोर्ट में पेश होकर जमानत ली थी।

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