व्यापमं घोटाले के डॉ सागर, त्रिवेदी, नितिन मनीलांड्रिंग में भी आरोपी

इंदौर। लगभग 5 साल पहले मप्र में व्यापमं घोटाला उजागर हुआ था। इसमे अब जाकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चालान कोर्ट में पेश किया है।

जांच में व्यापम घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा होने के बाद सबूतों के आधार पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करते हुए ईडी ने डॉ. जगदीश सागर, डॉ. विनोद भंडारी, डॉ. पंकज त्रिवेदी के साथ नितिन महिंद्रा को भी इसमें आरोपी बनाया है।

लगभग ढाई हजार पेज का चालान ईडी ने स्पेशल कोर्ट में पेड़ किया। जांच में ईडी को सबूत मिले हैं कि पीएमटी और प्री-पीजी में सागर और भंडारी व्यापम के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी और सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा के साथ मिलकर गड़बड़ी करते थे।

इसमें पैसा लेकर विद्यार्थियों का प्रवेश तय किया जाता था। सागर और भंडारी रैकेटियर थे, जबकि व्यापम के त्रिवेदी व महिंद्रा सहयोगी। उम्मीदवारों से वसूला पैसा सभी आरोपी आपस में बांटते थे।

इसी पैसे से करीब 14 करोड़ की चल-अचल संपत्ति भी जुटाई गई थी। तीन अटैचमेंट आदेशों के जरिए ईडी पहले ही संपत्ति अटैच कर चुका है।

ये था मामला

इंदौर पुलिस ने 2013 में होटल पथिक में छापा मारकर पुलिस ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बैठने वाले फर्जी विद्यार्थियों को पकड़ा था। मामले में 7 जुलाई 2013 को एफआईआर दर्ज हुई थी। बाद में जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी। मामले में कुल 10 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इसी को आधार बनाते हुए ईडी ने भी जांच शुरू की थी। व्यापम घोटाला उजागर होने के पांच साल बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अभियोजन कोर्ट में पेश किया है।

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