Feb 19 2019 /
6:59 AM

इंदौर के MIG थाने में फांसी मामले में अंतिम रिपोर्ट नहीं होने पर डीजीपी को बुला सकती है हाई कोर्ट

इंदौर। एमआईजी थाने में एक रेलवे कोर्ट के कर्मचारी पंकज वैष्णव द्वारा फांसी लगाने के मामले में दायर याचिका की सुनवाई जस्टिस विवेक रूसिया की बेंच में हुई। मृतक की पत्नी फुलकुवर बाई की ओर से एडवोकेट गगन बजाड़,

धर्मेंद्र गुर्जर द्वारा दायर इस याचिका की सुनवाई में कोर्ट के निर्देश के बावजूद फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में पेश नही किये जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए अधिवक्ता रविंद्र सिंह छाबड़ा को तलब किया। छाबड़ा ने आश्वस्त किया कि इस मामले को वे व्यक्तिगत रूप से देखेंगे और पक्षकारों को उचित सलाह देंगे।

कोर्ट ने कहा कि अगली पेशी पर रिपोर्ट नहीं आने पर डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया जा सकता है, क्योंकि पुलिस 2 साल बाद भी केस की विवेचना ही पूरी नही कर पाई हैं। इसी के साथ याचिकाकर्ता द्वारा यह केस सीबीआई को ट्रांसफर किए जाने बिंदु पर कोर्ट ने याचिका में सीबीआई को भी पक्षकार बनाए जाने के निर्देश दिए।

यह था मामला

इंदौर के एमआईजी थाने में दिसम्बर 2015 में कोर्ट के कर्मचारी पंकज वैष्णव ने लगाई फांसी लगा ली थी। उसे वाहन चोरी के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था। उसने थाने के बाथरूम में जाकर जूते की लैस से फांसी लगाई थी।

इस मामले की न्यायिक जांच हुई थी जिसमें घटना को सदोष मानव वध माना गया था। इसके बाद पुलिस ने इसमें गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था लेकिन 2 साल से पुलिस इसमें विवेचना ही पूरी नहीं कर पाई। इसी को लेकर कोर्ट ने उक्त नाराजी जताई।

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