Sep 15 2019 /
11:08 AM

इंदौर क्राइम ब्रांच ने विदेश भागने के पहले करोडों का फ़र्ज़ी लोन स्वीकृत कराकर धोखाधडी करने वाले पति पत्नी को धरदबोचा, 112 करोड़ का टर्नओवर मिला

इंदौर। इंदौर क्राइम ब्रांच ने विदेश भागने के पहले करोडों का फ़र्ज़ी लोन स्वीकृत कराकर धोखाधडी करने के मामले में पति पत्नी को धरदबोचा है।

ये किसानों से भूमि खरीदी का वादा कर, खरीदने के बजाय उनकी भूमि के छलकपट से दस्तावेज प्राप्त कर बैंकों में रख देते और जमीन गिरवी के रूप में करोडों का लोन लेते थे।

एएसपी क्राइम अमरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि अन्य आरोपियों की मदद से यह फ्राड करते थे। इन आरोपियों पर विभिन्न बैंकेा का करोडों रुपये से भी ज्यादा का लोन बकाया है।

थाना बेटमा जिला इन्दौर में अपराध पंजीबद्ध कर गिरोह के मुख्य सरगना संजय द्विवेदी व उसकी पत्नी नेहा द्विवेदी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

आरोपी संजय बैंकों से करोडों रुपये का लोन लेकर बोगस कम्पनियों के अकाउंट में करता था ट्रांसफर। तकरीबन 112 करोड से अधिक का टर्नओवर मिला है। ये दोनों विदेश भागने की तैयारी में थे लेकिन पकड़े गए।

ये है 6 आरोपी
इस मामले में कुल 6 आरोपी है जिनमे सरगना संजय द्विवेदी के अलावा अमित द्विवेदी, विजय द्विवेदी, रोहित शर्मा, राजेश शुक्ला, नेहा द्विवेदी उर्फ नेहा शर्मा व अन्य। इनके द्वारा विरूद्ध अपराध धारा 420, 120 बी, 406, 467, 468, 471, भादवि कापंजीबद्ध कर विवेचना लिया गया है।

इस गिरोह को पकड़ने में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रुचि वर्धन मिश्र, पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) अवधेश कुमार गोस्वामी एवं पुलिस अधीक्षक पश्चिम सूरज कुमार वर्मा का मार्गदर्शन रहा।

क्राईम ब्रांच इंदौर में आवेदक मुकेश कलोता द्वारा शिकायती आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था जिसमें आवेदक ने लेख किया था कि उसके पुत्र अनमोल को कैंसर की बीमारी होने से वह अपने स्वामित्व की जमीन को बेच रहा था जिसमें आवेदक की जमीन का सौदा, क्रेता मेसर्स वेंकटेश सिलीकॉन एण्ड इन्फ्रारिअल इंडिया प्राईवेट लिमिटेड तर्फे संजय द्विवेदी पिता स्व. शेषमणी द्विवेदी पता यु.जी. 20 – चेतक चेम्बर प्लाट नम्बर 13-14 आर एन टी मार्ग इन्दौर के मध्य हुआ था जिसमें उपरोक्त सौदे के लिये कुल राशि चार करोड छेहत्तर लाख रुपये तय की जाकर क्रय विक्रय का दिनांक 25.02.2016 को अनुबंध पत्र लेख किया गया था।

विक्रेता पक्ष अनावेदक द्वारा उक्त जमीन के अनुबंध के एवज में कुल 3200000/- रुपये जिसमें 01 लाख रुपये टोकन मनी के माध्यम से नगद आवेदक को मिल गई थी तथा साढ़े पन्द्रह लाख रू के दो अलग अलग चैक आवेदक ने प्राप्त किये थे।

इस प्रकार अब तक कुल 32 लाख रूपये की राशि आवेदक ने प्राप्त कर ली थी तथा शेष राशि चुकाने के लिये भूमि के क्रेता पक्ष ने 03 अलग अलग चेक बैंक के आवेदक को दिय थे जो संबंधित बैंक में लगाने पर अनादरित (बाउंस) हो गये थे।

इसी दरमियान आरोपी संजय द्विवेदी द्वारा अपने परिजनों साथ मिलकर, पूर्व सुनियोजित ढंग से षडयंत्र रचकर, आवेदक को गुमराह करके, क्रय की गई भूमि पर मध्य प्रदेश वित्त निगम इन्दौर से लोन लेने हेतु उपपंजीयक कार्यालय जिला इन्दौर में, मेसर्स अमिताय ट्रेडिंग कम्पनी तथा मेसर्स श्री व्यक्टेंश इंज. प्रोजेक्ट कम्पनी को मोडगेज (गिरवी) कराया गया।

आरोपी संजय द्वारा आवेदक पक्ष को विक्रय अनुबंध पत्र की पक्की लिखापढ़ी करने के संबंध में गुमराह किया जाकर, पंजीयन कार्यालय में हस्ताक्षर कराये गये और इसी तरह अनावेदक संजय द्विवेदी व अन्य के द्वारा भी आवेदक पक्ष को गुमराह करते मध्य प्रदेश वित्त निगम नवरतन बाग आफिस को स्वयं का आफिस बताते हुए उक्त बैंक की फाईल जो कि अंग्रेजी में थी उस पर हस्ताक्षर कराकर, जमीन के मूल दस्तावेज व रजिस्ट्री ले ली जबकि आवेदक अंग्रेज़ी नही पढ़ पाता था ।

मध्य प्रदेश वित्त निगम के द्वारा मेसर्स अमिताय ट्रेडिंग कम्पनी (प्रो. अमित द्विवेदी तथा रोहित शर्मा ) तथा मेसर्स श्री व्यक्टेंश इंज.प्रोजेक्ट कम्पनी (अमित द्विवेदी ) हेतु 1.25 – 1.25 करोड़ कुल 2.50 करोड रुपये लोन हेतु स्वीकृत कराये गये और उक्त स्वीकृत लोन के संबंध में बतौर ग्यारण्टी (बंधक) आरोपी संजय द्वारा बिना रजिस्ट्री कराये आवेदक की जमीन को बैंक में उपयोग किया गया जिसमें बैंक ने उक्त भूमि को गिरवी रखकर, संजय द्विवेदी को लोन स्वीकृत किया था। उल्लेखनीय बात यह है कि आवेदक, आरोपी संजय द्विवेदी को जमीन बेचना चाहता था ना कि अपनी जमीन, बैंक में गिरवी रखना चाहता था।
आवेदक पक्ष को विश्वास दिलाने हेतु भी आरोपी संजय के साथियों राजेश शुक्ला, अमित द्विवेदी , विजय द्विवेदी, रोहित शर्मा द्वारा भी मध्य प्रदेश वित्त निगम में डिड ऑफ ग्यारण्टी में अमिताय ट्रेडिंग कम्पनी व व्यक्टेंश इंज. प्रोजेक्ट कम्पनी के संबंध में हस्ताक्षर किये गये है। अमिताय ट्रेडिंग कम्पनी के संबंध में आर बी एल बैक से खाता ओपनिंग की जानकारी प्राप्त करते पाया गया कि अमिताय ट्रेडिंग कम्पनी का स्थापना पंजीयन का प्रमाण पत्र में स्टेशनरी एवं जनरल मटेरियल के क्रय व विक्रय के संबंध में लेख है जबकि उक्त कम्पनी के द्वारा मध्य प्रदेश वित्त निगम को दी गई जानकारी में स्वंय को परिवहन व्यवसाय, लोडिंग, ग्रेडिंग, कोल संबंधित कार्य आदि करने की जानकारी दी गई थी जो कूटरचित होकर स्थापना पंजीयन का प्रमाण पत्र का दुरुपयोग करते मिथ्या दस्तावेजों के आधार पर खाता खोला जाना पाया गया जिसमें कम्पनी का वित्तीय ट्रांजेक्शन हुआ है ।

आवेदक पक्ष को मध्य प्रदेश वित्त निगम से उसकी भूमि गिरवी रखकर स्वीकृत कराये गये लाने के संबंध में पता न चले इसीलिए आरोपी के द्वारा आवेदक को पुनः विश्वास में लेकर शेष राशि के नये 03 चेक दिये जाकर आवेदक पक्ष की भूमि का रजिस्ट्री करने का अश्वासन दिया गया परंतु रजिस्ट्री न कराते हुये शेष राशि का भुगतान किये बिना बैंक में उपरोक्त भूमि को गिरबीं रख दिया।
मध्य प्रदेश वित्त निगम के द्वारा मेसर्स अमिताय ट्रेडिंग कम्पनी तथा मेसर्स श्री व्यक्टेंश इंज.प्रोजेक्ट कम्पनी के द्वारा स्वीकृत लोन की राशि न भरने के कारण वसूली नोटिस, आरोपीगणों जिन्होंनें भूमि को गिरवी रखा उन्हें प्राप्त ना होने की बजाय आवेदक पक्ष को प्राप्त हुआ तो आवेदक पक्ष को उसकी जमीन पर लोन होना तथा लोन के एवज में उसकी भूमि मध्य प्रदेश वित्त निगम में बंधक होना पता चली। खातों के बैंक स्टेटमेन्ट का अवलोकन करते पाया गया कि उक्त प्राप्त लोन राशि को अलग अलग दिनांको में आरोपीगणों ने व्यक्तिगत खातों व उनसे संबंधित अन्य विभिन्न कम्पनियों में ट्रांसफर करते उपयोग किया गया है । आरोपियों द्वारा लोन की राशि आदाईगी नही की गई जो अनावेदक गणों द्वारा मध्य प्रदेश वित्त निगम की बैंक की राशि का दुरुपयोंग किया जाकर राशि का गबन किया गया है ।

इसी तरह अन्य अन्य आवेदकों द्वारा भी उपरोक्त उल्लेखित आरेापियों विरूद्ध इसी आशय की शिकायतें की गई जिसमें आरेापियों ने संबंधित भूमियों को विभिन्न बैंको में मोडगेज रखते हुये मध्य प्रदेश वित्त निगम नवरतन बाग इन्दौर , बैंक ऑफ इन्डिया बम्बई ,बैक ऑफ इंडिया इन्दौर , आन्ध्रा बैंक विजय नगर इन्दौर, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, आदि शाखाओं से करोडो रुपये का लोन स्वीकृत कराया जाकर निजी उपयोग में लिया जाकर उसका दृरूप्योग किया गया।
आरेापियों की कम्पनियो के संबंध में ज्ञात हुआ कि संजय द्विवेदी के नाम से समर्थ इन्फ्रा बील्ड(इंडिया)प्रा. लि.नाम की कम्पनी है उक्त कम्पनी के व्दारा-बैक आफ इंडिया तारदेव रोड बम्बई से 6.52 करोड रुपये, 13.00 करोड तथा 15 करोड रुपये लोन लिया गया है जो बकाया है। स्टेट बैक आफ इंडिया का 8.75 करोड़ रुपया तथा बैक आफ बडा़ेदा का 2.70 करोड रुपये का लोन बकाया है है। आरोपी संजय व्दिवेदी की उपरोक्त कम्पनी (समर्थ इन्फ्रा) में श्री वैकटेश प्रो. क. के खाते में म. प्र. वित्तनिगम से प्राप्त लोन विभिन्न दिनांको में स्वीकृत होकर उसका गबन किया गया जो कि आरोपी ने नहीं चुकाया हैं। आरोपी संजय की पत्नि नेहा द्विवेदी के नाम से कुल 07 कम्पनिया रजिस्ट्रर्ड होना पाई गई है जिसमें से कई बैंकों से लोन तथा गबन की राशि स्थानांतरित किया जाना पाई गई है।

एएसपी चौहान ने बताया कि बैंकों की भूमिका के संबंध में भी जाँच की जा रही है आरोपी के परिवार के चल अचल सम्पत्ति के बारे में भी जाँच की जा रही है। इसी तरह अन्य पीड़ितों को साथ हुई धोखाधडी के संबंध में भी जाँच की जा रही है। आरोपी व उसके परिवार के संबंध में यह जानकारी लगी है कि इनके पास पासपोर्ट है और कुछ ही दिनों में भारत के बाहर विदेश जाने की तैयारी में थे और यह भी जानकारी लगी है कि और अन्य बैंको में आरोपी की फाईल लोन हेतु लंबित है जिस संबंध में जानकारी प्राप्त की जा रही है।

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