इंदौर में एक था रीगल टॉकीज…

इंदौर। इंदौर की शान रहे रीगल टॉकीज की लीज आज मंगलवार रात 12 बजे से समाप्त हो गयी। इसी के साथ आगे कोई आसमानी सुल्तानी नही हुई तो इस टाकीज का अस्तित्व समाप्त हो जावेगा।

शहर के सबसे पुराने रीगल टॉकीज की लीज 11 सितंबर 2018 तक की थी। नगर निगम इंदौर ने लीज का नवीनीकरण नहीं करने का निर्णय लिया है और टाकीज प्रबन्धन की लीज नवीनीकरण का आवेदन गत दिनों निरस्त कर दिया था।

नगर निगम की प्लानिंग अब यहां पर या तो मेट्रो का स्टेशन बनाने अथवा वेस्ट मैनेजमेंट का सेंटर या कमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने की है। इसके चलते नगर निगम अब यहां पर बुधवार को बेदखली की कार्रवाई करेगा।

इधर प्रबंधन न्यायालय की शरण में जा सकता है लेकिन उसे वहां से यदि कोई रेमेडी नहीं मिलती है तो फिर नगर निगम अपनी आगे की कार्रवाई करेगा। वर्तमान में यहां स्त्री फ़िल्म का प्रदर्शन चल रहा है।

पुराना है इतिहास
यह शहर की एक प्रमुख पहचान भी है और रीगल सिनेमा के कारण ही इस क्षेत्र को रीगल सर्कल के नाम से जाना जाता है। सन 1917 में इंदौर के नंदलालपुरा क्षेत्र में ओपन एयर टॉकीज की स्थापना हुई थी।

होलकर महाराज फिल्म देखने के शौकीन थे और लंदन में अक्सर फिल्मे देखते थे। उन्होंने ही सन 1930 में रीगल टॉकीज के लिए ठकुरिया परिवार को जमीन दी और 1934 में रीगल टॉकीज की विधिवत शुरुआत हुई। महाराजा खुद अपने परिवार के साथ रीगल टॉकीज पर फिल्मे देखने आते थे।

बाद में होलकर महाराज ने अपने अभिन्न मित्र बड़ौदा के महाराज गायकवाड को इंदौर के रेलवे स्टेशन के सामने सिनेमा हॉल बनाने के लिए जगह दी । वहां गायकवाड महाराज ने यशवंत टॉकीज और बैंबिनो टॉकीज बनाया जो अब नहीं है।

ठाकुरिया परिवार का रीगल टॉकीज के अलावा इंदौर में एक और एलोरा टॉकीज के नाम से सियागंज क्षेत्र में था जो कुछ वर्ष पूर्व खत्म हो गया और वहां पर अभी मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बन गई है। रीगल टॉकीज की बेशकीमती जमीन अभी करीब 100 करोड रुपए की है।

Spread the love

इंदौर