भाजपा व कांग्रेस दोनों के ही समर्थकों द्वारा किए जा रहे हमलों पर अंकुश जरुरी

इंदौर। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे है सोश्यल मीडिया पर अलग अलग राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के बीच की जा रही जुमलेबाजी और बड़े नेताओं के बयानों के साथ छेड़छाड़ कर गलत ढंग से पोस्ट किए जाने की जो प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही हे। इस स्थिति पर यदि पुलिस प्रशासन द्वारा अंकुश नहीं लगाया गया तो अप्रिय स्थिति भी बन सकती है। वैसे तो अलग अलग विचारधारा वाले लोगों द्वारा सोश्यल मीडिया पर अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त किया जाना आम बात है लेकिन पिछले कुछ समय से एक नया खेल शुरु हुआ है जिसमें इस तरह के मामले पोस्ट कर दिए जाते है जिनमें विपक्षी दल के नेता के बयान अथवा भाषण के साथ छेड़छाड़ कर इस तरह से प्रस्तुत किया जाता है कि उनके खिलाफ माहौल बने।

इसके बाद शुरु होता है इन पर कमेंटस का दौर। उदाहरण के लिए राहूल गांधी द्वारा आलू से सोना बनाए जाने वाला बयान काफी चर्चा में रहा था। राहूल का यह बयान मोदी को लेकर था लेकिन विरोधियों द्वारा उसे इस तरह एडिट करके सोश्यल मीडिया पर पोस्ट किया गया कि राहूल इस तरह का हास्यास्पद बयान दे रहे है। ऐसे ही एक ताजा मामला राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत को लेकर सामने आया।
उनके द्वारा यह बयान दिया गया कि जब नेहरु जी के जमाने में बांध बनाए जारहे थे तब विरोधी यह दुष्प्रचार कर रहे थे कि बांध बनाने से पानी में से बिजली निकल जाएगी तो पानी का महत्व नहीं रह जाएगा। इस बयान को उनके विरोधियों ने इस तरह एडिट किया जिसमें दुष्प्रचार की बात हटा दी गई।

इससे ऐसा लग रहा था कि पानी से बिजली निकल जाने का बयान खुद गेहलोत ने दिया हो। हांलाकि उक्त दोनों ही बयानों में हुई छेड़छाड़ के बाद कांग्रेस की आईटी सेल सक्रिय हुई थी तत्काल उसकी ओर से भी वे ओरिजनल वीडियो सोश्यल मीडिया पर पोस्ट किए गए जिनमें वास्तविक बयान दिखाया गया था। डर्टी पालिटिक्स खतरनाक लेकिन इस तरह की डर्टी पालिटिक्स थमने का नाम नहीं ले रही है और लगातार
इस तरह के विवादास्पद पोस्ट सोश्यल मीडिया पर योजनाबद्ध तरीके से डाले जा रहे है जिन पर न तो अंकुश है ना ही ऐसे पोस्ट डालने वालों के विरुद्ध पुलिस प्रशासन सख्ती से कार्रवाई कर रहा है। ऐसे में चुनाव के निकट आने के दौरान ऐसी कृप्रवृत्ति और बढऩे की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।

इसके चलते राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं, समर्थकों के मध्य राजनीतिक कटुता और बढ़ेगी जो अप्रिय स्थिति का रुप भी ले सकती है। इसके लिए आवश्यक है कि इसे सख्ती से रोका जाए। इसके लिए आईटी एक्ट में व्याप्त प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई अपेक्षित है। इस हेतु प्रदेश पुलिस का जो सायबर सेल है वह अगल से एक टीम ऐसे मामलों पर नजर रखने के लिए बनाई जाना चाहिए।

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