Mar 21 2019 /
6:55 AM

शिवराज को चौंकाया, पी नरहरि को बाहुबली बनाया, विवेक अग्रवाल पर भरोसा जताया

इंदौर कीर्ति राणा। प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की नजर तो इसी पर लगी हुई थी कि कमलनाथ सीपीआर, माध्यम आदि के लिए किस अधिकारी पर विश्वास करेंगे। उन्होंने शिवराज से अधिक विश्वास कर के जिस तरह पी नरहरि को शक्ति संपन्न बनाया है वह शिवराज खेमे को अधिक चौंकाने वाला है। दरअसल एक तरह से मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज जिन वरिष्ठ अधिकारियों के विभाग चेंज किए हैं उनमें पी नरहरि को जनसंपर्क विभाग से जुडे़ तमाम विभागों का प्रमुख बनाकर एक तरह से चौंकाने वाला निर्णय किया है। दरअसल शिवराज सरकार के दौरान पी नरहरि को तटस्थ रहने का इस सरकार में सम्मान मिला है।एक कलेक्टर के रूप में इंदौर में नरहरि ने खुद के काम और नवाचार को लेकर लघु फिल्म तैयार कराई, शिवराज सरकार से लेकर सीएस कार्यालय तक ने उनके इस काम की सराहना करने के साथ ही अन्य कलेक्टरों को भी इसी तरह से नवाचार करने की हिदायत भी दी। इन्हीं सारे आधार पर इंदौर की मीडिया ने उन्हें अगला सीपीआर होने की अग्रिम बधाई तक दे डाली थी।

उनकी इस कार्यशैली का उपयोग शिवराज सरकार वैसे ही नहीं कर सकी जैसे एसआर मोहंती की ऊर्जा को गलाने में अधिक रुचि दिखाई या कैलाश विजयवर्गीय को सार्वजनिक रूप से कहना पड़ा था मेरे हाथ बंधे हैं। पी नरहरि बिना दाँत और नाख़ून वाले ऐसे शेर रहे जिनकी दहाड़ का इस्तेमाल भी एसके मिश्रा, मंगला प्रसाद मिश्रा से लेकर सीएम के घर परिवार से जनसंपर्क में आए (एसपी रहे) एपी सिंह करते रहे।यही कारण रहा कि तब के वक्त में वो नाम के और बाकी काम के सीपीआर से लेकर माध्यम के डायरेक्टर के रूप में सारे काम देखते रहे। सरकार को यह सोचने का वक्त ही नहीं मिला कि जो कलेक्टर अपने नवाचार से पूरे देश में अपनी छवि बना सकता है उसका उपयोग सरकार की छवि बनाने में भी लिया जा सकता है।

यही सारी वजह रही कि अभी जब कमलनाथ ने धड़ाधड़ बड़े पदों पर बदलाव शुरु किए तो अगला सीपीआर कौन यह उत्सुकता का विषय था।नरहरि और बाहुबली बन कर उभरे हैं ।वे पीएस के साथ अब थ्री डायमेंशन वाली कुर्सी पर विराजेंगे क्योंकि आयुक्त जनसंपर्क के साथ सचिव जनसंपर्क और मध्यप्रदेश माध्यम के “प्रबंध” संचालक भी हो गए हैं। कमलनाथ का उनके प्रति यह विश्वास अचानक नहीं बल्कि तब से है जब जिला पंचायत के सीईओके रूप में छिन्दवाड़ा में पदस्थ थे।एक तरह से यह उनकी बहुआयामी कार्यशैली का सम्मान तो है ही आयएएस लॉबी को संदेश भी है कि उन्हें किस तरह की वर्किंग स्टाइल पसंद है।

शिवराज का सिंहस्थ में आना जाना हो या अन्य यात्राओं को लेकर बात हो सारे सूत्र संचालन मिश्रा मंडली के हाथ में रहते थे। जहां मीडिया की नाराजी हो, पत्रकार भड़के हुए हों वहां सरकार नरहरि को ढाल बना कर आगे कर देती थी।सरकार की छवि बनाने का दायित्व रहता है जनसंपर्क के जिम्मे लेकिन जब अनुपम राजन सीपीआर रहे तब उनकी उपयोगिता भी कक्ष के बाहर लगी नाम पट्टिका जितनी ही रही। सरकार की हाल के वर्षों में जो छवि निरंतर गिरती रही तो उस गंभीर आरोप से नरहरि इसलिए बच गए कि उन्हें सरकार का चेहरा खूबसूरत दिखाने का मौका भी नहीं मिला।

विवेक अग्रवाल को चुनौती वाला विभाग

इसी तरह विवेक अग्रवाल की कार्यशैली पर भरोसा कर कमलनाथ ने इस क़यास को भी झूठा साबित कर दिया है कि शिवराज सरकार के आँख-कान रहे सलाहकार मंडली वाले आयएएस को ये सरकार पहले झटके में लूप लाईन में भेज देगी। विवेक अग्रवाल को शिवराज सिंह ने नगरीय प्रशासन का ज़िम्मा सौंप रखा था। स्वच्छता सर्वेक्षण मामले में नरेंद्र मोदी के सामने शिवराज सरकार की नाक ऊँची रही तो उसकी वजह विवेक अग्रवाल रहे हैं जिनके विश्वास पर इंदौर लगातार दो बार देश में नंबर वन और भोपाल नंबर दो बना।यह बात अलग है कि इंदौर बीआरटीएस बुरी तरह फ़्लॉप रहा जबकि इंदौर मेट्रो परियोजना का काम उनकी देखरेख में ही चल रहा है।

एक तरह से कमलनाथ ने अग्रवाल से नगरीय प्रशासन लेकर पीएचई का दायित्व सौंप कर प्रदेश के गाँवों में नल जल योजना के साथ ही जलसंकट के दिनों में ग्रामीण हिस्सों में बिगड़ने वाले हालात से सरकार के लिए पैदा होने वाली झंझटों से मुक्ति दिलाने की चुनौती से निपटने और पेयजल योजनाओं की बेहतरी का दायित्व अग्रवाल पर सौंपा है ।एक जो चर्चा चल पड़ी थी कि नई सरकार के आते ही शिवराज की सलाहकार मंडली के रूप में पहचाने वाले आयएएस प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में जाने का रास्ता खोज सकते हैं, इस अफ़वाह को एक तरह से कमलनाथ ने ही इन अधिकारियों पर विश्वास जताते हुए खारिज कर दिया है।

सभी प्रमुख सचिवों का सम्मान पुनर्वास

प्रशासनिक सर्जरी पर एक नजर डाली जाय तो सीएम सचिवालय से हटाए गए सभी प्रमुख सचिवों का ससम्मान पुनर्वास किया गया है। अशोक वर्णवाल की कार्य प्रणाली से कमलनाथ जब से प्रभावित रहे हैं जब वे केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके पीएस हुआ करते थे ।उन्हें जस के तस सीएम के प्रमुख सचिव बनाए रखना उनकी योग्यता और कार्यकुशलता को साबित करता है ।साथ साथ उन्हें लोक “प्रबंधन” का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। इसी प्रकार हरी रंजन राव को भले ही मुख्यमंत्री सचिवालय से मुक्त कर दिया गया हो लेकिन उन्हें पर्यटन की वर्तमान कमान के साथ-साथ अब तकनीकी शिक्षा विभाग का भी पीएस बनाया गया है। रेणु तिवारी को मनोज श्रीवास्तव के स्थान पर संस्कृति विभाग की पूरी कमान देने के साथ ही भारत भवन जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण कार्य का प्रभार देना लोगों को गले नहीं उतर रहा है।

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इंदौर