Sep 15 2019 /
11:08 AM

इंदौर में भाजपा में दो फाड़

  • ताई समर्थक बोले – शहर को रंगदारी, गुंडागर्दी और माफियाओं के जाल से बचाना हो समय निकालें
इंदौर। (प्रदीप जोशी)।

इंदौर लोकसभा सीट पर टिकट को लेकर चल रहे असमंजस को खत्म करते हुए लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अंतत: खुद ही चुनाव से दूर होने की घोषणा कर दी। हालांकि यह घोषणा मीडिया को पहले जारी की गई और इसके साथ ही पूरी भाजपा में हड़कंप मच गया। पार्टी के स्थापना दिवस के एक दिन पूर्व शुरू हुए हाई वॉल्टेज ड्रामे का असर दिल्ली में भी देखा गया। जाहिर सी बात थी कि आठ बार की सांसद और लोकसभा स्पीकर का यह कदम पार्टी संगठन को हिलाने के लिए काफी था।

हालांकि विरोधी इसे ताई की प्रेशर पॉलिटिक्स करार दे रहे हैं, जबकि ताई समर्थक इसे पार्टी के प्रति निष्ठा दिखाने से जोड़ते हुए ताई को फिर मैदान में आने के लिए मनाने के प्रयास में जुट गए हैं। बहरहाल, इंदौर से शुरू हुई सियासी ड्रामे ने भाजपा के अंतरविरोध को और मुखर कर दिया है। अब चर्चा इस बात की जोरों पर है कि ताई का विकल्प कौन? उधर, स्थानीय भाजपा में सीधे दो फाड़ होती नजर आ रही है। ताई समर्थक आज राजवाड़ा पर एकत्रित हुए और उन्हें मनाने मनीष पुरी स्थित घर पहुंचे। समर्थकों ने शहर के संगठनों और समाजों को भी यह कहते हुए आमंत्रित किया कि शहर को रंगदारी, गुंडागर्दी और माफियाओं के जाल से बचाना हो तो सुबह जरूर समय निकालें।

क्या ताई समर्थकों का इशारा विजयवर्गीय की ओर है

ताई समर्थकों ने सोशल मीडिया पर ताई के समर्थन में एक सूचना जारी की है। इसमे शहर के गणमान्यजनों, समाजों के प्रतिनिधियों और संगठनों को आमंत्रित किया गया। समर्थकों का कहना है कि ताई की उम्र 75 वर्ष 358 दिन है यानी 76 में 7 दिन कम और वे लगती 65 की हैं। 40 साल की राजनीति में बेदाग रहने वाली ताई की ऐसी विदाई के लिए शहर क्या तैयार है। सूचना में आग्रह किया गया कि आप चाहते हैं कि आपका प्यारा शहर गुंडागर्दी, रंगदारी और माफियाओं के जाल में न उलझे तो सुबह एक घंटे का समय जरूर निकालें। अब बड़ा प्रश्न यह है कि यह इशारा किसकी तरफ है। कांग्रेस तो मुकाबले में नजर नहीं आ रही ऐसे में ताई का सबसे बड़ा विकल्प कैलाश विजयवर्गीय है और निशाना भी उन्हीं पर लगाया गया है।

क्या संगठन से निराश हैं ताई

ताई के अचानक चुनाव से दूरी बनाने की बात के पीछे यह भी बात कही जा रही है कि ताई पिछले तीन दिनों से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से चर्चा की कोशिश कर रही थीं मगर उन्होंने बात नहीं की। आज सुबह आठ बजे राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल ने फोन पर उन्हें टिकट नहीं दिए जाने की सूचना दी। संभवत: इस सूचना के बाद उन्होंने मीडिया को चुनाव नहीं लड़ने की सूचना जारी करवाई। लगातार आठ चुनाव से इंदौर में जीत का परचम बुलंद करने वाली सुमित्रा ताई पार्टी के व्यवहार से खफा हैं। 75 के क्लब में शामिल नेताओं को विश्राम देने का फैसला पार्टी ने कई माह पूर्व कर लिया था। टिकट की कतार में खड़े इन तमाम नेताओं को संगठन ने इशारा भी कर दिया था।

ताई इनमें अपवाद रहीं। संगठन ने उन्हें टिकट के संबंध में कुछ नहीं कहा, उलटे हर बार तैयारी में जुटने का बात कही जाती रही। यही कारण था कि टिकट की घोषणा में हो रही देरी के बावजूद उन्होंने अपना चुनावी अभियान शुरू कर दिया। फिलहाल हर विधानसभा क्षेत्र के वार्डों की बैठक चल रही हैं। टिकट को लेकर छाए असमंजस के बीच ताई ने पार्टी अध्यक्ष शाह से चर्चा के काफी प्रयास किए मगर बात नहीं हुई। यह भी कहा जा रहा है कि शाह ने ताई से चर्चा में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसी बात से ताई नाराज हो गईं और उन्होंने खुद चुनाव से किनारा करने का मन बना लिया।

भाजपा को समर्थन देने वाला बड़ा वर्ग नाराज

पार्टी का इंदौर को लेकर जो रुख रहा और ताई ने चुनाव से दूर होने की जो घोषणा की, उससे पार्टी को समर्थन देने वाला बड़ा वर्ग भी नाराज हुआ है। ताई शुचिता की राजनीति के लिए पहचानी जाती हैं। सरल, सौम्य और मृदभाषी होने के कारण मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग उन्हें तीन दशकों से बिना शर्त समर्थन देता रहा है। 2009 में इसी तरह का विरोध उन्हें झेलना पड़ा था। उस वक्त मतदान वाले दिन कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला के क्षेत्र में भाजपा की टेबलें फेंक दी गई थीं। पहली बार भाजपा में खुलेआम इस तरह का विरोध देखने को मिला। इस चुनाव में ताई कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल से महज 11 हजार वोट से जीत पाईं। यह जीत भाजपा के लिए हार और ताई की व्यक्तिगत जीत मानी गई थी। हालांकि पिछला चुनाव उन्होंने उन्हीं पटेल को 4 लाख 66 हजार से ज्यादा मतों से पराजित कर जीता था।

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