मोदी पर विश्वास कायम…

लोकसभा में गिर अविश्वास प्रस्ताव नईदिल्ली।चुने जाने के करीब साढ़े चार साल भी लोकसभा में सदन का विश्वास अभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कायम है।

यह शुक्रवार को सदन में लाये गए अविश्वास प्रस्ताव से सिद्ध हो गया जिसे सदन ने सिरे से खारिज कर दिया।
पहली बार लाये गए विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ 325 सांसदों ने ना में अपना जवाब दिया। प्रस्ताव के समर्थन में 126 सांसद आए।

इस दौरान सदन में सभी सांसदों की मौजूदगी रही। ध्वनी मत से फैसला न हो पाने के बाद मतदान हुआ। इससे पहले लोकसभा महासचिव ने मत विभाजन के पहले सभी सांसदों को मतदान की प्रक्रिया समझाई।

संख्याबल की दृष्टि से पहले से मजबूत सरकार को अन्नाद्रमुक का समर्थन मिलने और बीजेडी-टीआरएस के मतदान से दूर रहने के फैसले से शक्ति परीक्षण का तिलिस्म खत्म हो गया।

वर्तमान में लोकसभा में 534 सदस्य हैं। राजग को 310 सांसदों का समर्थन हासिल है। इसके अलावा उसे 37 सदस्यों वाले अन्नाद्रमुक का समर्थन मिला है।

ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ सदस्यों की संख्या 347 हो गई, जो बहुमत के लिए जरूरी 268 सांसदों से 79 ज्यादा रही।

इस बीच 19 सांसदों वाली बीजेडी और 11 सांसदों वाली टीआरएस ने मतदान से पहले ही दूर रहने की घोषणा की थी।

इसके पहले अपने भाषण में पीएम ने कहा कि हमने बैंक में सुधार के लिए बहुत सारे कदम उठाए हैं।

हमने एनपीए को भी कम करने के लिए कार्रवाई की है। बैंकों को 2 लाख 10 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि री-कैपिटलाइजेशन के लिए दिए जा रहे हैं।

अगर 2014 में एनडीए की सरकार नहीं बनी होती तो यह देश बहुत बड़े संकट में होता। कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था को खोखला कर दिया। 2009 से 2014 तक बैंकों को लूटने का खेल चलता रहा।

आजादी के 60 साल में हमारे देश की बैंकों ने लोन के रूप में जो राशि दी वो 18 लाख करोड़ थी लेकिन 2008 से 2014 के बीच यह राशि 18 लाख से 52 लाख करोड़ हो गई।

भारत-पाकिस्तान विभाजन कांग्रेस की देन है। गरीबों की उपेक्षा से ही कांग्रेस की आज ऐसी दुर्दशा है।

मोदी बोले हम आपकी तरह सौदागर या ठेकेदार नहीं हैं, हम देश के गरीबों के, युवाओं के, आकांक्षी जिलों के सपनों के भागीदार हैं।

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इंदौर