मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास, 20 को बहस

नईदिल्ली। मानसून सत्र के पहले ही दिन लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मंजूर कर लिया है। एनडीए की सहयोगी रही तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने इसका नोटिस लोकसभा महासचिव को दिया था, जिसका अन्य विपक्षी दलों ने भी समर्थन किया।
संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने भी इस प्रस्ताव को मंजूर करने पर अपनी सहमति जताई। यानी चार साल पुरानी मोदी सरकार को अब संसद में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ेगा। बजट सत्र में भी विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था लेकिन स्पीकर ने उसे मंजूर नहीं किया था। अब चुनावी साल में सरकार ने सियासी नफा-नुकसान को समझते हुए इसकी मंजूरी दिलाकर न केवल अपनी चुनावी तैयारियों का परिचय देने की कोशिश की है बल्कि विपक्ष के इस मुद्दे को हमेशा के लिए जमींदोज कर देने की भी ठानी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार (20 जुलाई) को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी और बाद में वोटिंग होगी। मौजूदा समय में लोकसभा में सदस्यों की कुल संख्या 536 है। इसमें दो नामित सदस्य भी शामिल हैं। 9 सीट खाली हैं। यानी स्पीकर को हटा दें तो कुल संख्या 535 हो जाती है। लिहाजा, बहुमत के लिए 268 सदस्य चाहिए। लोकसभा में दलगत स्थिति के मुताबिक बीजेपी के पास कुल 273 (स्पीकर को छोड़कर) हैं। एनडीए के कुल आंकड़ों को देखें तो यह 358 तक जा पहुंचता है। यानी सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है। लिहाजा, अविश्वास प्रस्ताव से निश्चिंत है।

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