क्या कोर्ट कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग हो

नईदिल्ली। क्या राष्ट्रीय महत्व के मामलों के संबंध में अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग होना चाहिए? सोमवार को वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह  की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को लाइव दिखाने की  मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और  न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड की पीठ ने वकालत की। CJI दीपक मिश्रा ने  कहा कि शुरूआत में कोर्ट नंबर एक से ये शुरू किया जा सकता है।
 
लाइव स्ट्रीमिंग से पारदर्शिता और न्याय में प्रवेश को बढावा मिलेगा।वादी जान सकेंगे कि उनके केस में क्या चल रहा है?
वहीं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि  हमारे यहां खुली अदालतों का प्रावधान है और लाइव स्ट्रीमिंग इसी का एक एक्सटेंशन है। इससे छात्रों को सीखने का मौका मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगे सुझाव

केंद्र सरकार ने भी मांग का समर्थन किया।  अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट तैयार होता है तो सरकार लोकसभा या राज्यसभा की तरह अलग से सुप्रीम कोर्ट चैनल की व्यवस्था कर सकती है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि रेप के मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं होगी। इसी तरह वैवाहिक मामलों की भी नहीं हो सकती। सभी पक्ष इस संबंध में सुझाव दें। कोर्ट ने कहा कि 23 जुलाई तक इस संबंध में सुझाव दाखिल करें।

26 मार्च  को राष्ट्रीय महत्व के मामलों के संबंध में अदालत की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग की याचिका पर  मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और  न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मुद्दे पर अटॉर्नी जनरल के साथ-साथ बार की दलीलें  सुनने पर जोर दिया था।

(लाइव लॉ से साभार)

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