Jan 23 2019 /
11:08 PM

अभूतपूर्व कदम, मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने आलोक वर्मा को CBI निदेशक पद से हटाया

नईदिल्ली। गुरुवार को एक अभूतपूर्व कदम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति ने मैराथन बैठक के बाद आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया। उन्हें भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोपों में पद से हटाया गया।

अधिकारियों ने बताया कि वर्मा का दो वर्षों का निर्धारित कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने वाला है और वह उसी दिन सेवानिवृत्त होने वाले हैं। सीबीआई के 55 वर्षों के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई का सामना करने वाले जांच एजेंसी के वह पहले प्रमुख हैं।

गुरुवार शाम जारी एक सरकारी आदेश में बताया गया कि वर्मा को केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत दमकल सेवा, नागरिक रक्षा और होमगार्ड महानिदेशक के पद पर तैनात किया गया है। सीबीआई का प्रभार अतिरिक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को दिया गया है।

सीवीसी की रिपोर्ट में वर्मा के खिलाफ आठ आरोप लगाए गए थे। यह रिपोर्ट उच्चाधिकार प्राप्त समिति के समक्ष रखी गई। ‘हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार समिति में लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के रूप में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के सीकरी भी शामिल थे।

अधिकारियों ने बताया कि 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी वर्मा को पद से हटाने का फैसला बहुमत से किया गया। खड़गे ने इस कदम का विरोध किया।

समिति की बैठक बुधवार को भी हुई थी जो बेनतीजा रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सात लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर शाम साढ़े चार बजे गुरुवार को एकबार फिर से समिति की बैठक बुलाई गई।

बैठक तकरीबन दो घंटे तक चली। खड़गे ने सीवीसी द्वारा वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका देने की पुरजोर वकालत की। हालांकि, प्रधानमंत्री और न्यायमूर्ति सीकरी ने इससे सहमति नहीं जताई और एजेंसी से उन्हें बाहर करने का रास्ता साफ कर दिया।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस ने कहा, ”आलोक वर्मा को उनका पक्ष रखने का मौका दिये बिना पद से हटाकर प्रधानमंत्री मोदी ने एकबार फिर दिखा दिया है कि वह जांच–चाहे वह स्वतंत्र सीबीआई निदेशक से हो या संसद या जेपीसी के जरिये– को लेकर काफी भयभीत हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा के साथ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने चार अक्टूबर 2018 को वर्मा से मुलाकात की थी और राफेल खरीद सौदे में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।

वर्मा को विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के साथ उनके झगड़े के मद्देनजर 23 अक्टूबर 2018 की देर रात विवादास्पद सरकारी आदेश के जरिये छुट्टी पर भेज दिया गया था।

उन्होंने उच्चतम न्यायालय में सरकार के आदेश को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को सरकारी आदेश को निरस्त कर दिया था।शीर्ष अदालत ने वर्मा को छुट्टी पर भेजने वाले आदेश को निरस्त कर दिया था, लेकिन उनपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सीवीसी जांच पूरी होने तक उनके कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला करने पर रोक लगा दी थी।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि वर्मा के खिलाफ कोई भी आगे का फैसला उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति एक सप्ताह के भीतर करेगी। यह समिति सीबीआई निदेशक का चयन करती है और उनकी नियुक्ति करती है।

उच्चतम न्यायालय ने विनीत नारायण मामले में सीबीआई निदेशक का न्यूनतम दो साल का कार्यकाल निर्धारित किया था ताकि किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप से उन्हें बचाया जा सके। लोकपाल अधिनियम के जरिये बाद में सीबीआई निदेशक के चयन की जिम्मेदारी चयन समिति को सौंप दी गई थी।

कांग्रेस नें उठाएं सवाल, हटाने की ऐसी क्या जल्दी थी?

आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटाने के फैसले का विरोध करते हुए कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं कि आखिर पीएम नरेंद्र मोदी आलोक वर्मा को हटाने की जल्दी में क्यों थे?

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने आलोक वर्मा को हटाए जाने के फैसले के बाद गुरुवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सीवीसी ने आलोक वर्मा पर जो आरोप लगाए थे उनमें कोई सत्यता नहीं पाई गई.

6 आरोप गलत पाए गए, 4 आरोप निराधार मिले. 77 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बहाल किया था, आखिर क्या जल्दी थी कि उन्हें 24 घंटे के अंदर ही पद से हटा दिया गया.

आलोक वर्मा को लेकर फैसले में तेजी पर शंका जाहिर करते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि क्या कुछ ऐसा है जिसे सरकार छिपाना चाहती है.

आनंद शर्मा का कहना था कि सीवीसी की रिपोर्ट में अगर सुप्रीम कोर्ट कुछ गलत लगता तो सुप्रीम कोर्ट उस पर कार्रवाई करता. सवाल उठता है क्या सीवीसी पीएम के इशारे पर काम कर रहा था.

आनंद शर्मा ने कहा कि आधी रात को सीबीआई चीफ को क्यों हटाया गया, इसका जवाब नहीं मिल पाया है. एक सामान्य आदमी न्याय की अपेक्षा करता है उसकी अपेक्षा आलोक वर्मा भी कर सकते हैं.

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