वर्ल्ड विटीलिगों डे पर सफेद दाग के प्रति भ्रांतियों को दूर करने की सार्थक पहल की आरुष फाउंडेशन की टीम ने, तीन दिनी कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया

मुंबई। वर्ल्ड विटीलिगों डे (25 जून) पर सफेद दाग के प्रति आम लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर करने की सार्थक पहल आरुष फाउंडेशन की टीम ने की। इसके लिए तीन दिनी कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया।


आरुष फाउंडेशन ने हर साल की तरह इस साल भी वर्ल्ड विटीलिगों डे (सफ़ेद दाग़) मनाया लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण लगे लॉक डाउन की वज़ह से इस बार कोई बड़ा कार्यक्रम न करते हुए सामाजिक दूरी का ख़्याल रखने के साथ ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किए।

आरुष फाउंडेशन सफ़ेद दाग़ से प्रभावित लोगों में जागरूकता व इनमे सकारात्मकता बढ़ाने के लिए पिछले चार साल से निरन्तर प्रयत्नशील है। दरअसल भारत में सफ़ेद दाग़ (विटीलिगों) से प्रभावित लोगों को बीमारी के रूप में देखा जाता है। शिक्षा और जानकारी के अभाव में लोगों को लगता है कि सफ़ेद दाग़ से प्रभावित लोगों को छूने या उनके साथ खाने पीने से उनमें भी ये फ़ैल जाएगा जो पूरी तरह से निराधार है।

इस गलत अवधारणा के कारण न जाने कितने विटिलिगो (सफेद दाग) प्रभावित युवक युवतियों की शादी में रुकावट आती है और नौकरी में भी संघर्ष करना पड़ता है, जिससे कि सफ़ेद दाग़ से प्रभावित लोगों का आत्मविश्वास कमज़ोर हो जाता है। उन्हें लगता है वो समाज के एक उपेक्षित वर्ग से है जिन्हें लोग हेय दृष्टि से देखते हैं।


इन्ही परेशानी को देखते हुए आरुष फाउंडेशन (Aarus Foundation) समाज की इस गलत अवधारणा को समाप्त करने और लोगों को जागरूक करने के लिए संकल्पित हुआ है।
आरुष फाउंडेशन के संस्थापक आकाश तिवारी जो कि मुंबई से है और ख़ुद सफ़ेद दाग़ से प्रभावित है, उन्हें भी समाज के इस भेदभाव का सामना करना पड़ा था।

इसलिए इस गलत अवधारणा को समाप्त करने हेतु उन्होंने आरुष फाउंडेशन का स्थापना की । इसी मुहीम को आगे बढ़ाने के लिए देश के अनेक राज्यो से भी कई लोग आरुष फाउंडेशन से जुड़े है। जिसका लक्ष्य है ऐसे हर इंसान जो इससे प्रभावित है उसे प्रोत्साहित करना और समाज में जागरूकता लाना कि यह कोई बीमारी नहीं है।

इनमे मप्र के इंदौर से दीपिका सेन और सुहास बलंग, गुजरात से ज़ीनेश पटेल,चैताली पटेल, निखिल पटेल, निकिता मकवाना,भार्गव प्रजापति, हेता पटेल, महाराष्ट्र के नासिक से विमला सक्सेना, हैदराबाद से सचिन क्षीरसागर, नेहल फैजल आदि आरुष फाउंडेशन के माध्यम से लगातार प्रयासरत है।

ऑनलाइन हुए कार्यक्रम

Covid-19 के कारण इस वर्ष आरुष फाउंडेशन ने ऑनलाइन कार्यक्रम करने का फ़ैसला लिया है जो कि तीन दिन 23 जून से लेकर 25 जून तक रखा गया। पहले दिन 23 जून को पोस्टर के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें लोगो ने पोस्टर के माध्यम से घर में ही रह कर सोशल मीडिया के द्वारा लोगों तक संदेश पहुंचाएं गए, जैसे, ‘मैं विटीलिगो को सपोर्ट करता हूं,’ ‘दाग अच्छे है’, ‘Please accept Vitiligo’ आदि संदेश शामिल थे।


दूसरे दिन 24 जून को एक ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमे सफ़ेद दाग़ से सम्बन्धित प्रश्न पूछे गए। जिसके माध्यम से लोगो के मन से सफ़ेद दाग के लिए गलत अवधारणा दूर हो सके। हर प्रतियोगी को उसके सहभागिता के लिए सम्मान पत्र भी दिया जाएगा।


तीसरे और आख़िरी दिन 25 जून को आरुष फाउंडेशन ने ऑनलाइन लाइव सेशन रखा था, जिसमें सभी सफ़ेद दाग़ से प्रभावित लोग शरीक हुए। इसमे इस बात को बल दिया गया कि आरुष फाउंडेशन इन्हे खुशकिस्मत मानता है क्योंकि भगवान सामान्य इंसान को एक ही रंग देता है लेकिन सिर्फ़ खुशकिस्मत लोगों को ही वो दो रंग देता है। लाइव सेशन बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और इससे जुड़े भी।

आप सभी से अपील है कि आरुष फाउंडेशन को सहयोग करते रहे जिससे हम समाज में सफ़ेद दाग़ से होने वाले भ्रांति को दूर कर सके।

Spread the love

इंदौर