गोल्ड डिक्लेरेशन स्कीम लाने से कालाधन आएगा मार्केट में…

सरकार काला धन डिक्लेयर करने के लिए स्कीम देती रही है। अब गोल्ड डिक्लेरेशन स्कीम दी जानी चाहिए। अपने देश में टैक्स देने वाले बहुत कम लोग है। उसमें से भी कुछ लोग टैक्स छूट तक की ही आय का रिटर्न भरते हैं।


कुछ लोग 10 प्रतिशत तक स्लैब में आते हैं कुछ लोग 20 प्रतिशत वाली में आते हैं। बहुत कम लोग है जो 30 प्रतिशत वाली स्लैब या उसके ऊपर वाले स्लैब में आते हैं। इसमें ज्यादातर कंपनियां हैं। सोना जो है वो लोगों के पास काले धन के रूप में पड़ा है, सोना या तो छोटे परिवारों के पास पड़ा है या फिर ऐसे लोगों के पास पड़ा है, जो टैक्स नहीं भरते। ज्यादा टैक्स करके जो भी स्कीम लांच की गई है,

वह फेल हो गई है, क्योंकि कोई भी यह नहीं चाहता कि वह 100 रुपए डिक्लेयर करें और 60-70 रुपये सरकार ले ले और उसे 30 रुपये मिले। इसलिए गोल्ड डिक्लेरेशन स्कीम का टैक्स स्लैब 30 से 35 प्रतिशत ही रखा जाना चाहिए। इससे दो फायदे होंगे। एक तो देश में जो बेकार सोना घरों में पड़ा है और मिलावटी है वो बड़ी मात्रा में बाहर आएगा।

वर्तमान में जो कोरोना महामारी के कारण मार्केट में जो परेशानी आ रही है वो दूर होगी। वहीं, अगर टैक्स ज्यादा नहीं रखा जाएगा और तो लोग आसानी से सोना डिक्लेयर कर देंगे। इसमें यह होना चाहिए कि आदमी या तो सोना प्यूरीफाई कराकर लाए।

या फिर पूरे देश में अलग-अलग जगहों पर सेंटर खोले जाए, जहां आदमी अपना सोना लाएगा और उसके सामने ही सोने को गलाकर प्यूरीफाई कर उससे वह सोेना खरीदा जाए और उसमें से 30 या 35 प्रतिशत टैक्स काटकर बाकी पैसा चैक से या उसके खाते में आरटीजीएस करके जमा कर दिया जाए। सोना लाने वाले व्यक्ति आधार कार्ड, पैन कार्ड और खाते की विस्तृत जानकारी लानी होगी।

इसके आधार पर उसके खाते में एक नंबर में पैसा जमा हो जाएगा और सरकार के पास सोना आ जाएगा और पैसा जो बाजार में घूमेगा उससे होने वाली आय पर सरकार को फिर से टैक्स मिलेगा और सरकार को बाहर से सोना खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी और सरकार का सोने का रिर्जव भी बढ़ जाएगा।

साभार- जगजीत सिंह भाटिया
प्रधान संपादक-जवाबदेही समाचार पत्र

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इंदौर