भक्त मुझे भी देश द्रोही कहने को स्वतंत्र है…

भक्त मुझे भी देश द्रोही कहने को स्वतंत्र है….
भारत रत्न अटल जी, देशप्रेमियों को माफ करना।
राहत इंदौरी साहब नही रहे, यह उनकी उम्र, तबियत के हिसाब से ईश्वर का फैसला उनके पक्ष का ही रहा।
राहत साहब ने जो मुकाम दुनिया में पाया, उसमें उनके इंदौरी होने का गर्व होना चाहिये।
शायर हो, लेखक हो, कवि हो, वह उसकी वक्त की परिकल्पना रहती है, जो सही भी हो सकती है, गलत भी…
चिंतन अपना काम करता है उसे शब्द लेखक, शायर या कवि देता है।
कबीर कह गए ‘पाथर पूजे हरि मिले तो मै पूजूँ पहाड़.., कह गए तो कह गए, फिर आगे कहा- ‘यासे तो चाकी भली पीस खाए संसार।’
किसी को यह बात सही लगी होगी तो किसी को गलत…
राहत साहब व अटल जी चले गए, उनके जाने के बाद छीछालेदारी अकल्पनीय है। यह तुम्हारे इंसान होने का सबूत नही देती।
जाने वाले की सिर्फ अच्छाई देखी जाती है, सीखा जाता है, वह यह भी तो कह गए कि ‘जब मै मर जाऊँ तो लहू से मैरी पेशानी पर हिन्दूस्तान लिख देना…।’
अब हुआ क्या, मंद बुद्धियों ने अपनी दिमागी हालात का बखान चालू किया। उधर मेरे देश के भारत रत्न अटल बिहारी जी स्वर्ग में वे तीर झेल रहे है जो तीर सुब्रह्मण्यम स्वामी ने चलाए थे।
महान पुरूष अटल जी देश मे चल रही एक अलग तरह की राष्ट्र भक्ति को कोस रहे होगे।
कृपा करे मित्रों, राहत साहब और अटल जी देश को अपना सर्वश्रेष्ठ देकर गए है…।
अटल जी देश प्रेमियों को माफ करना…
पुन: विनम्रतापूर्वक श्रद्धांजलि🙏🏼🙏🏼

बकौल- नकुल पाटोदी, चिंतक, विचारक

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इंदौर