Mar 20 2019 /
4:36 AM

क्या पता था बापू यह हमारी अंतिम मुलाकात होगी…

नियति कितनी क्रूर हो सकती हैं, इसका प्रत्यक्ष पीड़ादायी अनुभव आज उस समय हुआ जब प्रयागराज से लौटते हुए स्कूल से कालेज और लगभग साढ़े तीन दशक तक पत्रकारिता के साथी रहे भाई महेंद्र बापना के इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने की असहनीय खबर आई। मैं ही नही शायद बापू (इसी नाम से विख्यात थे महेंद्र भाई) से जुड़ा हर शख्स इस हिला देने वाली खबर से स्तब्ध था। काफी देर तक मैंने अपने दिल को दिलासा देने की कोशिश की कि शायद यह खबर झूठी निकल जाए, लेकिन भला विधि के विधान को कौन टाल सकता है?

अभी कुछ दिन पहले की तो बात है, नन्दलाल भंडारी स्कूल के हमारे सहपाठी राम बहादुर यादव के यहां शादी में काफी देर बापू व अन्य सहपाठियों के साथ गपशप में स्कूल जीवन की यादें ताजा की थी। तभी बापू ने यह तय किया था कि नन्दलाल भंडारी स्कूल के हमारे तत्समय के सहपाठियों की सपरिवार पार्टी आयोजित की जाए। इसकी जिम्मेदारी बापू ने खुद लेकर इसका समय व स्थान तय करने की जिम्मेदारी मुझे व साथी संजय जैन को सौंपी थी।

तब यह कल्पना भी नही थी कि हमारी यह अंतिम मुलाकात होगी। सरल, सह्रदय, हमेशा साथियों की मदद को तत्पर रहने वाले बापू ने पत्रकारिता की ऊंचाइयों के शिखर को छूने के साथ ही इंदौर शहर में हर चौराहे पर अपने चार यार बनाने की मुहीम में भी सफलता हासिल कर ली थी। अकेले मैं नही बल्कि इंदौर शहर का हर वो शख्स जो बापू से जुड़ा था, उनकी इस तरह की अचानक अंतिम विदाई से स्तब्ध व शोकाकुल है। अश्रुपूरित श्रद्धांजलि के साथ मैं माँ जगतजननी से यही विनती करता हूं कि बापू को अपने श्री चरणों मे अंतिम विश्राम दे। ॐ शांतिः शांतिः शांतिः

-तेजकुमार सेन

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इंदौर