Oct 21 2019 /
12:45 AM

रावण मत जलाओ . . . कुछ तो रावण बनकर दिखाओ. . .

आज दशहरा मनाओगे . . . किस रावण को जलाओगे . . . जिसने अपनी कठिन तपस्या से भगवान से अमरत्व कावरदान पाया . . .

जिसने दस बार अपना शीश काटकर शिव को चढ़ाया . . . जिसने अपनी आंतों की माला बनाकर भगवान को सजाया . . . जिसके जप के तप ने पूरे ब्रह्माण्ड को हिलाया . . . वो यदि अपनी भक्ति की शक्ति पर इठलाया तो कौन सा अहंकार दिखाया . . .

कैसा देश है यह जहां राम का धरती पर अवतरण कराने वाले रावण को जलाया जाता है . . . अपनी उपासना से साक्षात शिव का दर्शन करने वाला दशानन का तिरस्कार किया जाता है और भगवा धारण कर पाखंड रचाने वालों के आगे शीश झुकाया जाता है . . .

चंद घंटे माला फेरने वालों को शंकराचार्य बनाया जाता है . . . उस रावण के गर्व को अहंकार कहा जाता है . . . जो नवग्रहों को बंदी बनाने का साहस रखता था . . . जो सोने की लंका बनाकर राज करता था . . . जिसके देश में प्रजा हर सुख पाती थी . . .

घरों में ताला लगाए बिना जीवन बिताती थी . . . जहां अनाचार , दुराचार की घटनाएं सपने में भी नहीं हो पाती थी . . . उस रावण को वो नेता जलाते हैं जिनके ईमान की कसमें उनके घर वाले तक नहीं खाते हैं . . .

हम उस रावण के दहन का जश्न मनाते हैं जो अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए भगवान से भिड़ जाता है . . . जो अपनी बहन के सम्मान के लिए सीता का अपहरण कर लाता है . . . लेकिन अपहरण के बाद भी इतनी मर्यादा निभाता है कि उन्हें छूने तक की सीमा नहीं लांघता है . . .

वो आज रावण जलाएंगे जो बहन की शादी के बाद भाई के कर्तव्य और रिश्ते तक को भूल जाते हैं . . . ऐसे लोग वो भाई कहां से लाएंगे जो भातृत्व और स्नेह रावण के भाइयों ने दिखाया . . .

एक के बाद एक भाई की आज्ञा पर अपना जीवन बलि चढ़ाया . . . किसी ने भी यह सवाल पूछने का साहस नहीं दिखाया कि रावण ने राम जैसे पराक्रमी से युद्ध का साहस क्यों दिखाया . . .

सब जानते थे कि वो विष्णु के अवतारी से लड़ने जा रहे हैं , इसलिए उनके जेहन में मोक्ष का ऐसा भाव जागा कि किसी ने भी कदम पीछे नहीं हटाया . . . लेकिन इस देश ने उस रावण की महानता को नहीं पहचाना . . .

उसके पराक्रम को नहीं जाना जिसके आगे शीश झुकाकर भगवान राम तक ने ज्ञान पाया . . . ऐसा ज्ञानी अब कहां मिलेगा . . . ऐसा दानी अब कहां दिखेगा . . . ऐसा तपस्वी अब कहां मिलेगा . . . ऐसे भाई पाकर किसका भाग्य जागेगा . . .

ऐसी मर्यादा का भाव किसमें दिखेगा और यदि रावण हर साल जलता रहेगा तो कौन भाई अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए खड़ा हो सकेगा . . . रावण ने भी अपनी मृत्यु को इसलिए स्वीकार किया कि उसने अपनी तपस्या से राम को पहचान लिया . . .

जीवन तो सभी पाते हैं , मगर अवतारी पुरुष के मोक्ष के लिए भगवान भी धरा पर आते हैं . . . रावण ने अहंकार नहीं दिखाया . . . अपने मोक्ष के मार्ग के लिए भगवान को उकसाया और खुद ही अपने भाई विभीषण को राम के पास अपनी मृत्यु का राज बताने के लिए भिजवाया . . .

ऐसे रावण को हम कैसे जलाएं . . . जिसमें हो राम बनने का साहस वो धनुष उठाए . . . वरना उस रावण के आगे शीश झुकाए और उनका मंदिर बनाए . . . राम तो हम बन नहीं सकते . कुछ रावण के गुण अपने जीवन में लाएं . . . क्षणिक भातृत्व का ही भाव मन में जगाएं . . .

बहन को बहन मानकर अपनाएं . . . माता – पिता को वंदनीय बनाएं और पैसे कमाकर न इठलाएं . . . कुछ तो रावण बनकर दिखाएं , ताकि ईश्वर के आगे मोक्ष की कामना मन में जगा पाएं . . .

-सांध्य दैनिक अग्निबाण के प्रधान सम्पादक राजेश चेलावत के कॉलम ‘खरी-खरी’ से साभार

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