सफेद दाग को लेकर ना रखें भ्रांति:विश्व विटीलिगो दिवस

विटीलिगो (सफेद दाग), इस शब्द से आप सभी परिचित होंगे. शायद यह किसी को पता नहीं परंतु विटीलिगो कुछ नहीं है, यह शरीर का बदला हुआ रंग है,जो कि मेलेबिन के कमी के कारण होता है, यह किसी को स्पर्श करने से फैलता नहीं है l लेकिन आज समाज में इस विषय में बहुत ही कम लोगो को पता है और लोग इसे कोढ कहते है, सफेद दाग वालों को पूजा मे नही बैठने नहीं दिया जाता, इसे बीमारी का नाम दिया जाता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है, यह सिर्फ एक रंग है और कुछ नहीं l आज समाज कितना आगे जा रहा है लेकिन रंगों में भेदभाव हीनभावना बढती जा रही है।आज पूरे विश्व में दुनिया भर में vitiligo दिवस मनाया जा रहा है लोगो को बताया जा रहा है कि ये कोई बिमारी नहीं केवल शरीर का बदला रंग है,जो किसी को कभी भी हो सकता है,

 आकाश तिवारी

हमारा आरुष फांउडेशन हर दिन हीन भावना को दूर करने का भरसक प्रयास कर रहा है ,लोगो से मिलकर, लोगों से बातें कर के, समझा रहा है कि ये कोई बीमारी नहीं है।
मुझे भी सफेद दाग पांच साल पहले हुआ था ,परंतु ना जाने कितनी कठिनाइयों के बावजूद आज समाज में लोगो के हित के लिए काम कर रहा हूँ l
जैसे की भगवत गीता में कहा गया है.

“शरीर के रंगों से व्यक्ति की पहचान नहीं होती उसके पहचान तो उसके स्वभाव और कर्म से होती है।”
इसलिए आइये सब मिल कर इस रंगभेद भाव को दूर करते है, क्योंकि हम ये कर सकते है।
चलिये समाज को इस विषय में जागरुक करते है।

इसे घूरती हुई और हीन भावना की निगाहों से बदल कर एक स्वप्रेम और आत्म विश्वास के सफर की और
बढ़ाने का प्रयास करते है l

” Let’s accept Vitiligo”
आरुष फांउडेशन
आकाश तिवारी

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इंदौर