May 26 2019 /
8:30 AM

बहुत कठिन है डगर ताई की…

अब तक 8 बार लगातार इंदौर से लोकसभा चुनाव जीतकर देशभर में अपनी प्रतिष्ठा कायम करने वाली सुमित्रा महाजन यानि ताई का इस बार भी इंदौर से लोकसभा चुनाव लड़ना लगभग तय है।

लेकिन यह माना जा रहा है कि इस बार ताई को लोकसभा तक पहुंचाने वाली डगर इतनी आसान नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस बार ताई के प्रति भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में उतना उत्साह दिखाई नहीं दे रहा है जितना कि अब तक पूर्व के लोकसभा चुनाव के दौरान दिखाई देता था।

इसका कारण यह भी माना जा रहा है कि ताई के लोकसभा अध्यक्ष बनने के बाद उनका कार्यकर्ताओं के प्रति वह लगाव नहीं दिखाई दिया जो हमेशा रहता था। इसके चलते भाजपा का जमीनी कार्यकर्ता ताई से दूर होता चला गया। वहीं भारतीय जनता पार्टी में अंतर्कलह की स्थिति में भी ताई कहीं नजर नहीं आईं। इसके चलते इस बार ताई भाजपा के कई स्थानीय नेताओं के भी निशाने पर हैं।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि 2009 के लोकसभा चुनाव को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह से बिखरी नजर आती थी। लेकिन इस बार कांग्रेस की एकजुटता ने मिसाल कायम की है। इसका उदाहरण विधानसभा चुनाव परिणामो में दिखाई दिया है। वहीं यह भी माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए इंदौर की लोकसभा की सीट इस बार प्रतिष्ठा का प्रश्न है। कमलनाथ स्वयं विधानसभा चुनाव के दौरान इंदौर के लगभग सभी कांग्रेसी नेताओं के संपर्क में रह रहे हैं।

वहीं वे सभी असंतुष्टओं को मनाने में भी सफल रहे हैं। इस बार के विधान सभा चुनाव परिणाम भी संकेत दे रहे हैं कि ताई की जीत इतनी आसान नहीं है। क्योंकि लोक सभा क्षेत्र इंदौर की 8 विधान सभा सीट में से कांग्रेस के कब्जे में 4 और भाजपा के कब्जे भी 4 सीटे ही हैं। इनमें से विधान सभा क्षेत्र क्रमांक 5 में भाजपा कांग्रेस की स्थिति लगभग बराबरी पर है।

वही राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के चलते विधान सभा क्षेत्र क्रमांक 2 ,3 और 4 के भाजपा विधायक ताई के लिए कितना मैदान पकड़ेंगे यह भविष्य के गर्त में है। कुल मिलाकर यह माना जा रहा है कि ताई के लिए यह लोक सभा चुनाव काफी चुनोती भरा है लेकिन उनके भाग्य पर भरोसा किया जा सकता है जिसने अभी तक ताई का ही साथ दिया है।

-वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद दीक्षित से साभार

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