Mar 21 2019 /
7:01 AM

तो विधानसभा में होगी कमलनाथ की पहली अग्नि परीक्षा…

मप्र में नई कांग्रेस सरकार बनने के बाद 7 जनवरी से शुरू हो रहे विधानसभा के पहले सत्र में ही कांग्रेस के समक्ष बड़ी चुनौती विधानसभा अध्यक्ष चुनाव रूप में खड़ी होने के आसार बन रहे है। यह चुनौती इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि भाजपा भी अध्यक्ष के लिए अपना प्रत्याशी खड़ा कर सकती हैं। इस बात के संकेत देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि पार्टी में इस पर विचार हो रहा है।

सोमवार सुबह प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे और प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह बैठ कर इस विषय पर निर्णय लेंगे। यदि ऐसा होता है तो स्थिति रोचक होगी। संख्या बल की बात करें तो 230 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं लेकिन निर्दलीय 4 के अलावा 3 सपा व बसपा के विधायको का समर्थन भी उसे है।

यानि कांग्रेस के पास कुल 121 का आंकड़ा है, लेकिन मंत्री मंडल गठन के दौरान उभर कर आए असंतोष व निर्दलीय, सपा बसपा को उसमें स्थान न दिए जाने के बाद से समीकरण बदले है और इसी का लाभ उठाकर भाजपा विधानसभा अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस को शिकस्त देने की जुगत में है दिखाई पड़ रही है। खुद कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह व अन्य आरोप लगा चुके हैं कि भाजपा विधायकों की खरीद फरोख्त के प्रयास कर रही है।

हालांकि शिवराज इससे इंकार कर चुके हैं। लेकिन यदि भाजपा भी विधानसभा अध्यक्ष पद पर अपना प्रत्याशी खड़ा करती है, तो उसे देखते हुए इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि वह भी अपनी सारी कोशिशें अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए करेगी। वैसे भी कहा जाता है कि प्रेम, युद्ध और राजनीति में सब जायज है, ऐसे में परिणाम कुछ भी हो सकते हैं।

हालांकि कांग्रेस भी इन हालातों के चलते सतर्क है। कुल मिलाकर यदि भाजपा अध्यक्ष पद पर अपना प्रत्याशी खड़ा करती हैं तो यह कमलनाथ सरकार की पहली अग्नि परीक्षा होगी। हालांकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा अभी ऐसा कोई निर्णय लोकसभा चुनाव के पहले नहीं लेगी जिसमें उसे किसी भी तरह शिकस्त का सामना करना पड़े।

क्योंकि भाजपा के संख्या बल की बात करें तो उसके पास 109 विधायक है। उसे सफलता तभी मिल सकती है जब सपा, बसपा के तीन के अलावा चारो निर्दलीय समर्थन करे, तब उसका आंकड़ा 116 पहुँचेगा। जिसकी सम्भावना फिलहाल दिखाई नही दे रही। किसी कांग्रेस विधायक के अनुपस्थित रहने की सम्भावना इसलिए कम है क्योंकि अभी सरकार बनी ही है, ऐसे में कोई पार्टी विधायक इस तरह खुलकर विरोध करने की स्थिति में नज़र नही आ रहा।


बकलम- तेज कुमार सेन

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