आपा खोना ही कैलाश विजयवर्गीय की सबसे बड़ी कमजोरी है

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय मध्य प्रदेश के जन-नेता हैं। इंदौर में तो उनके बराबर का कोई लोकप्रिय नेता अब तक नहीं हुआ है।

आज भी इंदौर के लोगों की सबसे ज्यादा पसंद के नेता कैलाश विजयवर्गीय ही हैं, क्योंकि वह हमेशा जनता से सीधे जुड़े रहे हैं। इंदौर के वर्तमान विकास में कैलाश विजयवर्गीय के महापौर कार्यकाल को ही आधार माना जा सकता है।

उन्होंने ही इंदौर में सामाजिक संगठनों को साथ लेकर विकास करने की शुरुआत की थी। कैलाश विजयवर्गीय में वह सब कुछ है जो जनता अपने नेता में देखना चाहती है। लेकिन उनकी सिर्फ एक ही कमजोरी है कि वह जब गुस्से में आ जाते हैं तो अपना आपा खो बैठते हैं और इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल कर बैठते हैं जैसा उन्होंने कल किया।

जबकि कैलाश विजयवर्गीय ऐसे नेता हैं जो इंदौर में लगी आग को हमेशा बुझाते रहे हैं। चाहे वह 1989 हो या फिर उसके बाद शहर हुए सांप्रदायिक उन्माद। उन्होंने ही सभी संप्रदायों के बीच जाकर भाईचारे की बात करने की हिम्मत जुटाई।

उसका परिणाम यह हुआ कि इंदौर में भाईचारे को वह स्थान मिला की एक दशक से भी ज्यादा समय से इंदौर में किसी तरह का सांप्रदायिक सौहार्द नहीं बिगड़ा। यह माना जा सकता है कि ईश्वर सभी को सब कुछ नहीं देता है इसी कारण कैलाश विजयवर्गीय में गुस्से को नियंत्रित करने का गुण नहीं दिया ।

यह भी कहा जा सकता है की कैलाश विजयवर्गीय की इस कमजोरी ने ही उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया वरना वे शिवराज सिंह चौहान, अनिल माधव दवे और कई बड़े नेताओं को स्थापित करने वाले व्यक्ति हैं। खैर गुस्से में वे कुछ भी बोल गए हों लेकिन इंदौर की जनता जानती है कि कैलाश जी कभी भी अपने इंदौर में आग नहीं लगा सकते…।

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद दीक्षित की सोशयल मीडिया पोस्ट से साभार।

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