मेडिकल माफियाओ के बंगले टूटे, रासुका हो, जेल भेजें जाए…तो कुछ बात बने, शासन, प्रशासन की इन पर भी वक्र दृष्टि जरूरी

वर्तमान में कोरोना संक्रमण का जो खतरनाक दौर चल रहा है, उसने सभी को हिला कर रख दिया है। संकट की इस घड़ी में तमाम समाजसेवी, धनाढ्य वर्ग से लेकर हर वर्ग के लोग मानवता की सेवा के लिए तन, मन, धन से जुट गए है और पीड़ितों व उनके स्वजनों की अपने अपने स्तर पर यथायोग्य मदद कर रहे हैं, लेकिन महामारी के इस अभूतपूर्व संकटकालीन दौर में भी कुछ ऐसे नरपिशाच हैं जो आपदा को अवसर के रूप में लेकर लाशों पर सौदे करने से नही चूक रहे हैं।

इनमे वे कतिपय अस्पताल वाले शामिल हैं जो बेड से लेकर अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर लोगो के गले काट रहे हैं। कई जगह अस्पतालों में रूम चार्जेस ऐसे लिए जा रहे है जो 7 स्टार होटल्स के कमरों के भी नही है। और तो और मरीजों के एक समय के खाने के 800-1000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। ऐसे ही अन्य मदों में व जांचों के नाम पर खुली लूट चल रही है।


इसी तरह कोरोना के इलाज में लगने वाले रेमेडीसीवीर, ऑक्सीजन सहित अन्य तमाम जरूरी दवाइयों, उपकरणों की खुलकर कालाबाजारी इन तत्वों द्वारा की जा रही है। एमआरपी से कई कई गुना दामों पर इन्हें बेचा जा रहा है।

इनकी इन हरकतों के कारण सैंकड़ो लोग समय पर इलाज के अभाव मेंअसमय दम तोड़ रहे है। ऐसे तत्वों के विरुद्ध लगातार शिकायते आने के बावजूद उतनी सख्त कार्रवाई फिलहाल नज़र नही आ रही जैसी भू माफिया, मिलावट खोरों व गुंडों के विरुद्ध शासन, प्रशासन द्वारा गत दिनों चलाई गई थी।

ऐसे तमाम माफियाओ को न केवल रासुका व अन्य धाराओं में जेल भेजा गया था बल्कि इनकी सम्पत्ति राजसात करने के साथ ऐसे तत्वों के बंगलो, मकानों के अवैध निर्माण बुलडोजर लगाकर तोड़े गए थे। उस कार्रवाई की हर स्तर पर सराहना हुई थी, लेकिन ऐसी सख्त कार्रवाई इन मेडिकल माफियाओ के खिलाफ नजर नहीं आ रही हैं।

जब भी इन चिकित्सा माफियाओ पर कार्रवाई की बात उठती है तो शिकायत मिलने पर कार्रवाई की बात कहकर टाल दिया जाता है जबकि यह सब जानते है कि इस नाजायज वसूली के एवज में पीड़ित या उनके परिवार वालो को लिखित में कोई बिल या अन्य दस्तावेज नही दिए जाते है, जिनके आधार पर वह शिकायत हो सके।

इसका हल यही है कि सरकार में बैठे जिम्मेदार लोग जिस तरहअवैध कामो को पकड़ने के लिए नकली ग्राहक बनकर स्टिंग ऑपरेशन कर अन्य माफियाओ को पकड़ते है, वैसे ही स्टिंग ऑपरेशन इन मेडिकल माफियाओ के खिलाफ किया जाए तो ये बेनकाब हो सकते हैं।

आज जरूरत इस बात की है कि इन लाशों के सौदागरों के विरुद्ध वक्रदृष्टि डाल कर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि और लोग समय से पहले इनके शिकार होकर जीवन गंवाने व आर्थिक रूप से लुटने से बच सके। साथ ही सरकार नए कानून बनाकर या इनमे बदलाव करके भी इन पर नकेल कस सकती है।

बकलम- तेजकुमार सेन

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इंदौर