मोदी-मोदी सब करे… हकीकत समझे न कोय… जो मोदी समय पर जगते तो कोरोना काहे को होय…

खता तुम करते हो, सजा देश भुगतता है… कितना कहर ढाया यह ख्याल भी आपके जेहन में कहां रहता है… पूरा देश मोदीजी आपको रहनुमा मानता है… आपके शब्दों के जाल में इस कदर उलझ जाता है कि वो हकीकत समझ ही नहीं पाता है… पहले आपने नोटबंदी कराई… पैसे वालों की नींद उड़ाई…

कारोबारियों, व्यापारियों की जान पर बन आई… देशभर में मंदी की ऐसी मौत छाई कि जान अभी तक संभल नहीं पाई… अब तालाबंदी की गांठ लगाई… अबकी बार मजदूरों की मौत आई… किसानों, खेतिहारों की फसलें सड़वाईं… गरीबों के खाली बर्तनों से आवाज आई… मेहनतकशों पर मुसीबत ढाई… कारखाने बंद पड़े हैं… कारोबारी घर पड़े हैं… सारा देश सन्नाटे का सितम सह रहा है और छूने से मरने का कहर कुछ इस कदर चल रहा है कि कई मर चुके हैं और बचे सारे घरों में मर-मरकर और डर-डरकर जी रहे हैं… आशाएं दम तोड़ चुकी हंै… उम्मीदें निराशा के भंवर में फंसी हैं और यह सब कुछ आपकी नादानी की वजह से हुआ है… जब कोरोना देश में पैर पसार रहा था, तब विमान उड़ानें भर रहे थे… विदेशों के यात्री देश में उतर रहे थे… दूतावासों से वीजा बंट रहे थे…

पर्यटन स्थलों पर महफिलें चल रही थीं… ठंसाठंस भरकर ट्रेनों से कोरोना सफर कर रहा था… बसों के यात्रियों में भी दानव पसर रहा था, तब आपका विदेश मंत्रालय सोया पड़ा था… स्वास्थ्य मंत्रालय ऊंघ रहा था… गृह मंत्रालय घर में पड़ा था… क्योंकि सबका ध्यान राजनीति में लगा था… जिस देश ने आपको भरपल्ले वोट देकर नवाजा… जिस देश ने आपको पलकों पर बैठाया… जिस देश ने हर बार मोदी-मोदी का नारा लगाया… उसी देश के अंगुलभर हिस्से की सत्ता हथियाने के लिए आपने पूरे देश को डुबाया…

आपकी सरकार ने गायिका कनिका कपूर पर मुकदमा लगाया… लेेकिन उसका जवाब जानने के बाद तो प्रकरण आप पर लगना चाहिए… कठघरे में तो मोदीजी आपको खड़ा होना चाहिए… वो 10 मार्च को भारत आई और आपने विमान यात्रियों के लिए 18 मार्च को एडवाइजरी जारी करवाई और 25 मार्च तक मुस्तैदी नहीं दिखाई…

विमान तब भी उड़ान भर रहे थे… यात्री बिना जांच के देश में फैल रहे थे… हजारों यात्री आए, लेकिन एक भी क्वारेंटाइन नहीं किया गया… जबकि केरल में कोरोना फरवरी माह में ही दस्तक दे चुका था… मार्च में तो पूरे देश में संक्रमण फैल चुका था… आप मरकज पर तोहमतें लगा रहे हैं… लेकिन गुनाह के धब्बे तो सरकार पर ही नजर आ रहे हैं… भारत आने वाले 960 विदेशी जमातियों को तो आप ही की सरकार ने वीजा दिया…

और जिन्हें वीजा दिया, उन्हें लॉकडाउन के साथ ही देश छोडऩे के लिए क्यों नहीं कहा गया… जो जहां है वहां रहे का नारा लगाया और हजारों विदेशियों को देश में अटकाया… जब कोरोना ने कहर बरपाया तो इल्जाम उन पर लगाया… आज आप पूरे देश को डरा रहे हो… समझा रहे हो… घर में बैठा रहे हो… लेकिन हकीकत यह है कि आप खुद उस समय समझ नहीं पाए… जब कुछ करना था तब कर नहीं पाए…

आज पूरा देश दांव पर लगा पड़ा है…अभी तो कोरोना से हम लड़ रहे हैं…कई मर रहे हैं…कई मौत के कगार पर खड़े हैं…फिर हमें जिंदगी से लडऩा पड़ेगा… पता नहीं कौन भूख से मरेगा… कौन रोटी के लिए तरसेगा…कौन जिएगा, कौन मरेगा… देश लम्बी मुश्किल में घिरेगा या ईश्वर पर विश्वास करने वाला देश वैक्सीन की खोज में सफल होकर इस विपदा से उबरेगा… पर सच तो यह है कि इस देश की मानव जाति पर हुआ यह हमला आपकी लापरवाही की ही बलि चढ़ेगा…..

■ सांध्य दैनिक अग्निबाण के प्रधान संपादक राजेश चेलावत के कॉलम खरी खरी से साभार.।

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इंदौर