Aug 21 2019 /
10:16 AM

मोदी-शाह की जोड़ी ने कमाल कर दिया, काम एक किया और दो वादों को पूरा कर दिया, मन्दिर ऐसा बनाया जिसमे भारत माँ की मूर्ति को धर दिया

सारा देश झूम रहा है… भारत माता के मस्तक को चूम रहा है…

आज देश ने आतंक की परवरिश पर बंदिश लगाई है…असली आज़ादी तो कश्मीर पर आज हमने पाई है… वह हमारा होकर भी कहां हमारा था… जिसे जन्नत कहते थे वह जिल्लत से कहां कम था… जिस कश्मीर की सांसो में दुश्मन जहर घोलते थे… जिन बच्चों के जेहन में बचपन से ही वो नफरत पिरोते थे… जहां बच्चा जवान होते ही खौफनाक हो जाता था…

जिन कश्मीरियों का परिवार गद्दारी की रोटी खाता था…जहां फौजी संगीनों के साए में भी पत्थरों के आगे बेबस हो जाता था… वह कश्मीर हमारा होकर भी हमारा कहां था… जिन कश्मीरियों को हमारे हाथों से निवाला खिलाया जाता था… मुफ्त की रोटी, पानी, बिजली देकर जिन्हें पाला जाता था… जिनके आजादी में कभी कोई विघ्न नहीं डाला जाता था… जिन्हें हर वफा और इकरार का एहतराम दिया जाता था… वह कश्मीर हमारा होकर भी कहां हमारा था…

जहां तिरंगा थरथराए हाथों से हाथों से फहराया जाता था… जहां देशभक्त गद्दार कहलाया जाता था और गद्दार वफादार बनकर भारत माता को लजाता था… वह कश्मीर केवल देश के नक्शे में ही भारत कहलाता था… जहां पाकिस्तान के लिए जिंदाबाद का नारा लगाया जाता था…वह कश्मीर हमारा होकर भी कहां हमारा था… जिस कश्मीर की आजादी को नेहरू ने गंवा दिया था… सरदार पटेल के सपने को जिस नादान ने मिटा दिया था…वक्त की जिस गलती ने जन्नत को जहन्नुम बना दिया था…
जिस जख्म को 70 सालों ने नासूर बना दिया था… उस नासूर को एक जांबाज मोदी ने एक पल में मिटा दिया… फौजियों पर पत्थर बरसाने वालों को चट्टान के नीचे दबा दिया…

आतंक की महबूबा को सीखचों में डलवा दिया… आतंकी बोली बोलने वाले उमर की उम्र को घटा दिया… पाकिस्तान जिंदाबाद बोलने वालों के हुजूम में अब भारत माता की जयकार गुंजाने वाले अपना घर बसाएंगे…
देखना है देश के गद्दार अब कहां मुंह छुपाएंगे…कांग्रेस के गुलाम बने नबी आजाद अब किसके तलवे चाट कर जगह बनाएंगे… अपने ही दल के भस्मासुर बनकर बची खुची इज्जत को भी अब खाक में डलवाऐंगे…

गांधी की आजादी को जिस कांग्रेस ने भुनाया है… मोदी की जांबाजी ने उस गांधी का किरदार निभाया है.. न तोप न तलवार से दुश्मन को फना किया… न खून बहाया ना तकरार का आगाज किया… बस एक अलख जगाई , बस एक आरजू जताई… बस कलम उठाई और 70 साल की पीड़ा और गुलामी को लात लगाई … इस जांबाजी को सलाम…इस हौसलाई का एहतराम…

जनता के जिगर तक पहुंचने वाले मोदी और शाह की जोड़ी को देश का एक ही पैगाम… वक्त के कागज पर हौसलों की कलम से इतिहास लिख दिया… जहन्नुम बने कश्मीर की ताबीर को फिर जन्नत में बदल दिया… सलाम है इस जांबाजी को एक साथ दो वादों को पूरा कर दिया… मंदिर भी बनाया और उसमें भारत माता के मूर्ति को धर दिया…

-दैनिक अग्निबाण के प्रधान संपादक राजेश चेलावत के चर्चित कॉलम ‘खरी-खरी’ से साभार।

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इंदौर