मुस्लिमों को शरण देते तो म्यांमार – पाकिस्तान जैसे देश खाली हो जाते . . .

केवल शरण नहीं पोषण भी होना चाहिए… शरण के हकदार लोगों के बारे में दिल खोलकर सोचना चाहिए… जिनके दर्द नासुर बन गए… मरहम पहले उन्हें मिलना चाहिए, जिसका कोई नहीं उसका कोई न कोई तो होना चाहिए . . .

भारत धर्म निरपेक्ष राष्ट्र जरूर है, लेकिन धर्म की बहुलता और प्रतिबद्धता का ख्याल तो हमको करना ही चाहिए . . . पूरे विश्व में भारत ही एक ऐसा राष्ट्र है जहां की बहुल जनसंख्या दूसरे देशों में अल्पसंख्यक के तौर पर यातना भोग रही है . . .

पराए देशों में वो जी जरूर रहे हैं , लेकिन मौत से बदतर जिंदगी और अंधकार में डूबा भविष्य उन्हें रातों में सोने नहीं देता और दिन में जागने नहीं देता . . .

बर्बरता उनका दुर्भाग्य बनी हुई है . . . इस कदर वे उलाहना भोगते हैं कि जब लोग उन पर अत्याचार थोपते हैं तो सुनवाई करने वाले तक की आंखों में वो तिरस्कार भोगते हैं . . . पाकिस्तान में हिन्दुओं और सिंधियों पर इस कदर अत्याचार होता है कि बहू – बेटियां घरों से नहीं निकलती है और निकले तो वापस घरों में नहीं पहुंचती है . . .
भीगी आंखों से वह भारत की ओर देखती है . . . ऐसे में नागरिकता संशोधन विधेयक यदि उन्हें पनाह का आंगन देता है तो विरोधियों को बुरा क्यों लगता है . . . वो यदि मांग उठाते हैं, मुस्लिमों को भी पनाह का अधिकार मांगते हैं तो वो इस्लामिक देशों के गुनाहगार कहलाएंगे . . .

मुस्लिम इस कदर भारत में आएंगे कि हम उन्हें संभाल नहीं पाएंगे . . . . हमारे देश के मुस्लिमों के साथ हम इंसाफ नहीं कर पाएंगे . . . क्योंकि भारत का मुस्लिम इस कदर आजाद जिंदगी जीता है कि हर मुल्क उनकी किस्मत पर रश्क करता है . . . भारत में ना कोई मजहबी दखल रहता है और ना ही यह देश इस्लामिक पाबंदियों की शर्त रखता है . . . जीवन की हर शर्त देश का मुस्लिम ही तय करता है . . . .


ना यहां शिया – सुन्नी लडते हैं और ना ही हिन्दु मुस्लिम दंगा करते हैं . . . समानता के इस अधिकार के चलते हर इस्लामिक देश के मुस्लिम भारत को पसंद करते हैं और यदि रास्ते खोल दिए जाए तो ईरान , इराक , अफगानिस्तान , पाकिस्तान से लेकर म्यांमार और बांगलादेश तक के मसलमान देश में चले आए . . .

ऐसी हालत में ना हम उन्हें पाल पाएंगे और ना ही हम अपने देश में रह पाएंगे . . . इसीलिए नागरिकता की सोच में निर्ममता पर दया होना चाहिए . . . सुविधाओं से समझौता नहीं . . . गैर मुस्लिमों को भी उन्हें ही संरक्षण मिलना चाहिए , जो वर्षों से यहां रह रहे हैं और यहां के नियम – कायदों के अनुसार चल रहे हैं . . .

सांध्य दैनिक अग्निबाण के प्रधान संपादक राजेश चेलावत की ‘खरी-खरी’ से साभार

Spread the love

9

इंदौर