समर्थकों को एडजस्ट कराने में खर्च हो रही है सिंधिया की उर्जा.. बदले बदले से हैं कमलनाथ.. गोपाल रेड्डी के बाद कौन आईएएस अफसर है केंद्रीय एजेंसियों के निशाने पर… 10 दिन में हो जाएगा वकील कोटे से हाई कोर्ट जज बनाने का फैसला..

बात यहां से शुरू करते है

 • क्या अपने समर्थकों को एडजस्ट करवाने में खर्च हो रही ज्योतिरादित्य सिंधिया की सारी ऊर्जा? क्या सिंधिया बीजेपी में भी कांग्रेस वाली गलती कर रहे हैं? ये सवाल सिंधिया के नजदीकी और शुभचिंतकों को परेशान कर रहे हैं।शिवराज मंत्रिमंडल में सिंधिया के दो सबसे बड़े समर्थक तुलसी सिलावट और गोविन्द राजपूत एक बार फिर शामिल हो गये। ये देर-सवेर होना ही था लेकिन परिस्थितियों ने इसमें सिंधिया की बड़ी ऊर्जा खर्च करवा दी। ‘महाराज’ को इसके लिये चार बार भोपाल आना पड़ा और भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व पर भी दबाव बनाना पड़ा।

 • नगर और जिला इकाइयों के गठन के पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने रायशुमारी की जो प्रक्रिया तय की है वह पार्टी के बड़े वर्ग को भरोसे में लेकर संगठन चलाने की उनकी रणनीति का ही एक हिस्सा है। वह पार्टी नेताओं के बीच यह संदेश देना चाहते हैं कि निर्णय में आपकी भी सहभागिता है या दूसरे शब्दों में नेता यह कह सके कि हमारी सहमति के बाद ही यह फैसले हुए हैं। अपनी संगठन क्षमता के लिए विख्यात बीडी शर्मा विद्यार्थी परिषद की जिस शैली में प्रदेश भाजपा संगठन को आगे बढ़ा रहे हैं वह किसी दुरगामी रणनीति का ही एक हिस्सा है।

 • कमलनाथ दिल्ली जाएंगे या भोपाल में ही रहेंगे इसका फैसला तो नगरीय निकाय चुनाव के बाद ही होता दिख रहा है लेकिन कॉर्पोरेट स्टाइल में काम करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री इन दिनों कुछ बदले बदले से हैं। ‌ बार-बार घड़ी देखने और फिर खड़े होकर नमस्कार कर आगंतुक को विदा करने की अपनी शैली में अब कमलनाथ ने बदलाव किया है। जो भी उनसे मिलने पहुंच रहा है उससे वह बहुत गर्मजोशी से मिलते हैं, ध्यान से उसकी बात सुनते हैं और यह एहसास कराने की कोशिश करते हैं कि आपकी सलाह मेरे लिए बहुत कीमती है। कुछ मामलों में वे पार्टी के लोगों से मिले सुझाव पर अमल लाते भी देखें है।

 • गोविंद राजपूत की मंत्रिमंडल में वापसी हो गई और वह परिवहन विभाग भी फिर से पाने में सफल हो गए। निश्चित तौर पर यह शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच सहमति बनने के बाद ही संभव हो पाया होगा। यह भी तय है कि अब विभाग के सारे सूत्र राजपूत के हाथों में ही रहेंगे। ऐसे में उनकी शिकायत सिंधिया तक पहुंचाने वाले परिवहन आयुक्त मुकेश जैन का क्या होगा इस पर सबकी नजरें। राजपूत जब मंत्री नहीं थे तब उनके और जैन के बीच हुए संवाद की रिकॉर्डिंग सिंधिया तक पहुंचाई गई थी और इसके बाद यह कहां जा रहा था कि अब शायद उन्हें परिवहन विभाग नहीं मिल पाए। लेकिन ऐसा हुआ नहीं और यह भी स्पष्ट हो गया है कि सिंधिया राजपूत पर पहले की तरह ही कृपावंत है।‌

 • उद्योग जगत से पुराने रिश्ते अब मध्य प्रदेश के लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रहे हैं। इसी का नतीजा है कि सकलेचा देश के कई औद्योगिक घरानों को मध्यप्रदेश में ऐसे उद्योग लगाने के लिए रजामंद करने में सफल होते दिख रहे हैं जिनमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिले सखलेचा का एक और प्रस्ताव भी एमएसएमई सेक्टर को बहुत पसंद आ रहा है और वह यह है कि उद्योगपति सरकार से जमीन लेकर खुद उसे विकसित करें। शर्त बस यही रहेगी कि जमीन मिलने के 1 साल के भीतर उसे उद्योग शुरू करना होगा। ‌सखलेचा की तैयारी तो मध्यप्रदेश में छोटे उद्योगों को रियायती दर पर बिजली दिलवाने की भी है।

 • एम गोपाल रेड्डी के बाद मध्य प्रदेश के और कौन से आईएएस और आय पी एस अफसर केंद्रीय एजेंसियों के निशाने पर है ? इन दिनों वल्लभ भवन और पी एच क्यू दोनों जगह यही चर्चा गरमाई हुई है। अलग-अलग विभागों से जुड़े कुछ मामलों को खंगालते हुए अफसर अपने हिसाब से ऐसे नामों को चिन्हित करने में लगे हुए हैं। इसी कड़ी में कुछ वर्तमान नौकरशाहों के साथी सेवानिवृत्त हो चुके कुछ नौकरशाहों के नाम भी सामने आ रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर नौकरशाह एक समय में सपा के बेहद करीब रहे हैं चाहे वह भाजपा की सरकार रही हो या फिर कांग्रेस की।

 • मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जिन वकीलों के नाम हाई कोर्ट जज के लिए आगे बढ़ाएं हैं उन नामों पर अगले 10 दिन में सुप्रीम कोर्ट फैसला लेगा यानी यह तय होगा कि किसे जज बनाया जाए और किसे नहीं। ‌ इस सूची में इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के वकीलों के नाम हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से आगे बढ़ी यह सूची दिल्ली में अलग-अलग दफ्तरों से गुजरने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है और अब वहीं पर अंतिम निर्णय होना है। पुराना अनुभव यह कहता है कि कुछ नाम तो बिना अनुमोदन के वापस लौटा दिए जाएंगे।

 • अभिनव कला समाज के मामले में इंदौर की कलाकार बिरादरी यह निगाहें अब राज्य सरकार पर टिकी हुई है। शहर के एक बड़े वर्ग ने सालों पहले गठित इस संस्था बर्बाद होने से बचाने के लिए एक प्रस्ताव सरकार को दिया है और इसे जल्दी से लागू करवाने में संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर से मदद भी मांगी है। अंदर खाने की खबर यह है कि यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो इस परिसर का स्वामित्व सरकार अपने हाथों में लेकर कला साहित्य और संस्कृति में रुचि रखने वाले शहर के प्रबुद्ध लोगों की एक समिति के माध्यम से इसका संचालन करवाएगी। संस्था को जो जमीन लीज पर दी गई थी उसकी अवधि भी समाप्त हो चुकी है। ‌

चलते चलते

 • भैया जी जोशी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अहम दायित्व से मुक्त होने के बाद सुरेश सोनी किस भूमिका में रहेंगे यह तो कहा नहीं जा सकता लेकिन उनकी माताजी के निधन के बाद जिस तरह देश भर के भाजपा नेता संवेदना प्रकट करने राजगढ़ पहुंचे उससे इतना तो संकेत मिल ही रहा है कि भूमिका कुछ भी मिले लेकिन दबदबा तो बरकरार रहेगा।

 • कांग्रेसी समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर डॉ विक्रांत भूरिया ने अपने बलबूते पर मोहनखेड़ा में युवक कांग्रेस के पदाधिकारियों का प्रशिक्षण शिविर इतने व्यवस्थित ढंग और अनुशासित तरीके से कैसे संपन्न करवा लिया। जवाब एक ही है सुनो सबकी और करो अपने मन की।

पुछल्ला

 • सज्जन वर्मा और अरुण यादव के बीच बढ़ती नजदीकी ने मध्यप्रदेश में कई नेताओं की नींद हराम कर रखी है। यह जुगलबंदी क्या गुल खिलाती है इस पर सबकी नजर है।

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद तिवारी के कॉलम ‘राजवाड़ा 2️⃣ रेसीडेंसी’ से साभार

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इंदौर